नई दिल्ली :  निर्वाचन आयोग ने चुनावी बॉण्ड को लेकर नया डेटा रविवार को सार्वजनिक कर दिया। यह डेटा आयोग ने सीलबंद लिफाफे में उच्चतम न्यायालय को सौंपा था। न्यायालय ने बाद में आयोग से यह डेटा सार्वजनिक करने के लिए कहा था। माना जा रहा है कि ये विवरण 12 अप्रैल, 2019 से पहले की अवधि से संबंधित हैं।  आयोग ने आज चुनावी बॉण्ड को लेकर उच्चतम न्यायालय की रजिस्ट्री से डिजिटल रूप में प्राप्त डेटा को अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार  भाजपा को 2018 में चुनावी बॉण्ड योजना के लागू होने के बाद से इनके (बॉण्ड के) माध्यम से सबसे अधिक 6,986.5 करोड़ रुपए की धनराशि प्राप्त हुई, इसके बाद पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस (1,397 करोड़ रुपए), कांग्रेस (1,334 करोड़ रुपए) और बीआरएस (1,322 करोड़ रुपए) का स्थान रहा। 

वहीं अब रद्द हो चुके चुनावी बक्तॉण्ड के शीर्ष खरीदार 'फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज' ने इसके माध्यम से तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी द्रमुक को 509 करोड़ रुपए का दानदिया। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) द्वारा बताए गए 656.5 करोड़ रुपए के चुनावी बॉण्ड से प्राप्त कुल प्राप्तियों में 'फ्यूचर गेमिंग' द्वारा दिया गया दान 77 प्रतिशत से अधिक है। इस कंपनी के मालिक लॉटरी किंग सैंटियागो मार्टिन प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के दायरे में हैं। अधिकांश राजनीतिक दलों ने दानदाताओं के नामों का खुलासा नहीं किया है इसलिए यह ज्ञात नहीं है कि 'फ्यूचर गेमिंग' द्वारा खरीदे गए शेष 859 करोड़ रुपये के बॉण्ड के लाभार्थी कौन थे। यह खुलासा उच्चतम न्यायालय के आदेश पर निर्वाचन आयोग द्वारा सार्वजनिक किए गए कुल 523 मान्यता प्राप्त और गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से संबंधित आंकड़ों के विवरण का हिस्सा है।

आंकड़ों के मुताबिक, ओडिशा की सत्तारूढ़ पार्टी बीजद को 944.5 करोड़ रुपए मिले। इसके बाद द्रमुक ने 656.5 करोड़ रुपए और आंध्र प्रदेश की सत्तारूढ़ पार्टी वाईएसआर कांग्रेस ने लगभग 442.8 करोड़ रुपए के बॉण्ड भुनाए। गैर सरकारी संगठन, एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉम्र्स (एडीआर) द्वारा संकलित एक पूर्व रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2018 से जनवरी 2024 तक 16,518 करोड़ रुपए के चुनावी बॉण्ड बेचे गए थे। दोनों आंकड़ों को मिलाकर अनुमान लगाया गया है कि योजना की पूरी अवधि के दौरान भाजपा को कुल 7,700 करोड़ रुपए की राशि प्राप्त हुई है।

रविवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, जनता दल (सेक्युलर) को 89.75 करोड़ रुपए के बॉण्ड मिले, जिसमें चुनावी बॉण्ड की दूसरी सबसे बड़ी खरीदार मेघा इंजीनियरिंग से मिले 50 करोड़ रुपए भी शामिल हैं। फ्यूचर गेमिंग कंपनी 1,368 करोड़ रुपयों के साथ चुनावी बॉण्ड की सबसे बड़ी खरीदार थी, जिसमें से लगभग 37 प्रतिशत द्रमुक को गया। द्रमुक के अन्य प्रमुख दानदाताओं में मेघा इंजीनियरिंग 105 करोड़ रुपए, इंडिया सीमेंट्स 14 करोड़ रुपए और सन टीवी 100 करोड़ रुपए शामिल हैं। तृणमूल कांग्रेस को चुनावी बॉण्ड के माध्यम से 1,397 करोड़ रुपए मिले और वह भाजपा के बाद दूसरी सबसे बड़ी प्राप्तकर्ता है। द्रमुक दानदाताओं की पहचान का खुलासा करने वाले कुछ राजनीतिक दलों में से एक है, जबकि भाजपा, कांग्रेस, तृणमूल और आप जैसे प्रमुख दलों ने निर्वाचन आयोग को इन विवरणों का खुलासा नहीं किया था। तेदेपा ने 181.35 करोड़ रुपए, शिवसेना ने 60.4 करोड़ रुपए, राजद ने 56 करोड़ रुपए, समाजवादी पार्टी ने चुनावी बॉण्ड के जरिए 14.05 करोड़ रुपए प्राप्त किए।

आंकड़ों में कहा गया कि अकाली दल ने 7.26 करोड़ रुपए, अन्नाद्रमुक ने 6.05 करोड़ रुपए, नेशनल कॉन्फ्रेंस ने भारती ग्रुप से मिले 50 लाख रुपए के बॉण्ड भुनाए। सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट को भी 50 लाख रुपए के चुनावी बॉण्ड दान में मिले। आम आदमी पार्टी ने हालांकि अपने दान का संचयी आंकड़ा नहीं दिया, लेकिन एसबीआई के आंकड़ों से पता चला कि उसे 65.45 करोड़ रुपए मिले थे, जबकि निर्वाचन आयोग में दी गई जानकारी के बाद उसे 3.55 करोड़ रुपए और मिलने का अनुमान है, जिससे कुल दान 69 करोड़ रुपए हो गया। माकपा ने घोषणा की थी कि वह चुनावी बॉण्ड के माध्यम से धन प्राप्त नहीं करेगी, जबकि एआईएमआईएम, इनेलोद और बसपा ने कोई रकम प्राप्त नहीं करने की जानकारी दी है। खुलासे के बाद, विपक्षी दलों ने चुनावी बॉण्ड को वैध भ्रष्टाचार करार दिया है, जबकि भाजपा ने कहा है कि बांड को खत्म करने से राजनीति में काले धन की वापसी हो सकती है।