नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) बनने के चार साल बाद 11 मार्च को पूरे देश में लागू कर दिया गया। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नागरिकता के लिए ऑनलाइन आवेदन हेतु वेब पोर्टल लांच कर दिया है। इस कानून के लागू होने से पाकिस्तान, अफगानिस्तान एवं बांग्लादेश से आए अल्पसंख्यक समुदाय को भारत की नागरिकता मिल सकेगी। मालूम हो कि उपरोक्त तीनों देशों में धर्म के आधार पर वहां रहने वाले हिंदू, सिख, जैन, पारसी, इसाई सहित दूसरे अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को प्रताडि़त किया जाता है। बहुत-से अल्पसंख्यक समुदाय के लोग इन देशों से आकर कई वर्षों से भारत में शरण लिये हुए हैं। यहां की नागरिकता नहीं होने के कारण उन्हें अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

नरेन्द्र मोदी सरकार ने वादा किया था कि वह सत्ता में आने पर उपरोक्त तीनों देशों से आये अल्पसंख्यक शरणार्थियों को भारत की नागरिकता उपलब्ध करवाने के लिए कानून बनाएगा। पिछले 9 दिसंबर 2019 को लोकसभा ने नागरिक संशोधन विधेयक पारित कर दिया था। उसके बाद 11 दिसंबर 2019 को राज्यसभा ने भी इस विधेयक को हरी झंडी दिखा दी थी। फिर 12 दिसंबर 2019 को राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के साथ ही नागरिकता संशोधन कानून बन गया था। लेकिन चार साल तक इसे लागू नहीं किया गया था। अधिसूचना जारी होने के साथ ही पूरे देश में कुछ पार्टियों एवं संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। असम में भी इसके खिलाफ आवाज उठने लगी है। केंद्र और राज्य सरकार पहले से ही इसको लेकर सतर्क है। अधिसूचना जारी होने से पहले ही पूरे देश में सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

सीएए के खिलाफ असम में पिछली बार ज्यादा विरोध हुआ था। संसद के दोनों सदनों से नागरिकता संशोधन विधेयक पारित होने के बाद असम में सीएए के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन हुए थे, जिसमें पुलिस की गोली से पांच लोगों की मौत भी हो गई थी। आंदोलन दो-तीन दिन तक अनियंत्रित हो गया था। पिछली घटना से सीख लेते हुए इस बार राज्य सरकार ने राज्य के सभी संवेदनशील एवं प्रमुख स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए हैं। राज्य के मुख्य सचिव पवन बरठाकुर एवं पुलिस महानिदेशक जीपी सिंह ने सभी जिलों के आयुक्तों एवं पुलिस अधीक्षकों को स्पष्ट निर्देेश दिया है कि किसी भी स्थिति में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति बहाल रखी जानी चाहिए। गुवाहाटी के सभी प्रमुख चौराहों पर पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है।

विपक्षी पार्टियों के नेताओं का मानना है कि मोदी सरकार ने लोकसभा चुनाव को देखते हुए सीएए लागू किया है। प्रश्न यह उठता है कि यह कानून केवल पाकिस्तान, अफगानिस्तान एवं बांग्लादेश से आये अल्पसंख्यक शरणार्थियों को नागरिकता देने के लिए बनाया गया है। यह कानून भारत में रहने वाले मुसलमानों के बिल्कुल खिलाफ नहीं है। इसे मानवीय दृष्टिकोण से देखने की जरुरत है। उपरोक्त तीनों देशों में मुस्लिम आबादी बहुसंख्यक है। ऐसी स्थिति में वहां के मुस्लिम नागरिकों को प्रताडि़त करने का प्रश्न ही नहीं उठता है। हिंदू शरणार्थियों के लिए भारत के अलावा उनका दूसरा कोई ठिकाना नहीं है।

सीएए पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, बल्कि सभी दलों को मिलकर शांति एवं सद्भाव बनाए रखने के लिए काम करना चाहिए। असम पहले से ही बांग्लादेशी घुसपैठ से त्रस्त रहा है। यहां बड़ी संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठिए घुस आये हैं। ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार को असम की जनता की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए अलग से विशेष पहल करना चाहिए। असम में बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ 1979 से लेकर छह साल तक आंदोलन चला था जिसके बाद 1985 में केंद्र सरकार, राज्य सरकार एवं अखिल असम छात्र संघ के बीच त्रिपक्षीय समझौता हुआ था।