नई दिल्ली : चुनाव आयोग में इस समय दो चुनाव आयुक्तों के पद खाली हैं। इन्हें भरे जाने को लेकर प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले पैनल की 15 मार्च को शाम 6 बजे बैठक होगी। नियम के मुताबिक चुनाव आयोग में एक मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) के अलावा दो चुनाव आयुक्त होते हैं। एक चुनाव आयुक्त अनूप चंद्र पांडे फरवरी में रिटायर हो गए थे। दूसरे अरुण गोयल ने 9 मार्च को अचानक इस्तीफा दे दिया। लिहाजा 3 सदस्यीय चुनाव आयोग में इस वक्त सिर्फ सीईसी राजीव कुमार ही हैं। अरुण गोयल मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) बनने की कतार में थे, क्योंकि मौजूदा सीईसी राजीव कुमार फरवरी 2025 में रिटायर होने वाले हैं। गोयल ने 21 नवंबर 2022 को चुनाव आयुक्त का पद संभाला था। उनका कार्यकाल 5 दिसंबर 2027 तक था। चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक, गोयल और सीईसी राजीव कुमार के बीच फाइल पर मतभेद है। हालांकि गोयल ने इस्तीफे के लिए निजी कारणों का हवाला दिया है।
केंद्र ने उन्हें पद छोड़ने से रोकने की कोशिश की थी। गोयल की सेहत भी ठीक है। इसलिए खराब सेहत के कारण इस्तीफे की अटकलों को खारिज किया गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार और चुनाव आयोग लोकसभा चुनावों की तैयारियों का जायजा लेने पश्चिम बंगाल गए थे। गोयल ने पश्चिम बंगाल में तैयारियों से जुड़ी जानकारी देने कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल होने से इनकार कर दिया था। सूत्रों का कहना है कि दोनों के बीच गंभीर मतभेद हो गए थे। इसके बाद 5 मार्च को राजीव कुमार ने अकेले ही प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी और कहा था कि खराब सेहत के चलते गोयल दिल्ली लौट गए। अरुण गोयल के इस्तीफे के बाद तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में केवल सीईसी राजीव कुमार ही रह गए हैं। इससे पहले अनूप पांडे 15 फरवरी को चुनाव आयुक्त पद से रिटायर हुए थे। पांडे के रिटायरमेंट के बाद से चुनाव आयोग में एक पद खाली था। गोयल 1985 बैच के पंजाब कैडर के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने 18 नवंबर 2022 को सचिव (भारी उद्योग) पद से वीआरएस लिया था। इसके एक दिन बाद वे चुनाव आयुक्त बनाए गए थे। गोयल हाल में चुनावी तैयारियों का जायजा लेने के लिए विभिन्न राज्यों का दौरा कर रहे थे।
गोयल के इस्तीफे पर क्या बोला विपक्ष
मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस अध्यक्ष : इलेक्शन कमीशन या इलेक्शन ओमिशन। लोकसभा चुनाव से पहले ऐसा क्यों? हमने स्वतंत्र संस्थाओं का खत्म किया जाना नहीं रोका तो लोकतंत्र पर तानाशाही कब्जा कर लेगी।
के सी वेणुगोपाल, कांग्रेस नेता : ईसीआई जैसी संवैधानिक संस्था में बिल्कुल भी पारदर्शिता नहीं है। केंद्र सरकार उन पर दबाव डालती है। 2019 में चुनावों के दौरान, तत्कालीन आयुक्त अशोक लवासा ने आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन मामले में पीएम मोदी को क्लीन चिट देने पर असहमति जताई थी। बाद में उन्हें लगातार पूछताछ का सामना करना पड़