चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या अर्थव्यवस्था में उछाल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए वोटों में तब्दील होगा? आम लोगों के लिए मजबूत जीडीपी आंकड़े क्या मायने रखते हैं, इस परिस्थिति में एक आम शिकायत है कि अर्थव्यवस्था का यह विकास रोजगार में तब्दील नहीं हुआ है। इसी बीच आए दिन सरकार कहती है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। ऐसा शायद इसलिए कि अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से सेवा क्षेत्र, औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों द्वारा संचालित है, लेकिन इन क्षेत्रों में नौकरियां मिलना मुश्किल है। दूसरी ओर भाजपा के समर्थकों का दावा है कि आर्थिक विकास का लाभ जल्द ही पूरे भारतीय समाज में महसूस किया जाएगा। अगले तीन साल में आर्थिक अवसर कई गुना बढ़ जाएंगे। कारोबार करने में आसानी होगी और बुनियादी ढांचा तेजी से बढ़ेगा। बस इंतजार करें, कुछ सालों में हर नागरिक अर्थव्यवस्था में भाग लेने में सक्षम होगा। भाजपा समर्थकों का तो यहां तक कहना है कि भारत में गरीबों को कल्याणकारी योजनाओं का सीधे लाभ मिल रहा है और यही कारण है कि मोदी ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी जीत हासिल कर रहे हैं, परंतु सभी इससे संतुष्ट नहीं हैं। कारण कि जीडीपी के ये आंकड़े आर्थिक विकास का भ्रम पैदा कर रहे हैं।

आर्थिक विकास का पैसा अमीरों की जेब में जा रहा है और आम लोगों की हालत खराब होती जा रही है। बहुत सारे लोगों को इन आंकड़ों पर संदेह है। विपक्ष जिन प्रमुख मुद्दों पर मोदी सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है, उनमें बेरोजगारी और मुद्रास्फीति सहित तमाम आर्थिक चुनौतियां प्रमुख हैं। अब सरकार का अनुमान है कि मार्च तक वित्तीय वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 7.6 फीसद तक पहुंच जाएगी, जो पहले के 7.3 फीसद के अनुमान से ज्यादा है। इन आंकड़ों के हिसाब से यह बताया जा रहा है कि भारत दुनिया में सबसे तेजी से विस्तार करने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बने रहने की राह पर है। आमतौर पर भारत की जीडीपी वृद्धि बढ़ती मुद्रास्फीति, कृषि और संबद्ध क्षेत्रों की धीमी वृद्धि और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में गिरावट जैसी आर्थिक चुनौतियों का सामना करती है। भारत की विकास गति की स्थिरता महत्वपूर्ण है और यह निजी घरेलू मांग और निर्यात जैसी विदेशी मांग दोनों पर ही निर्भर करती है। पिछले कई वर्षों में घरेलू मांग बेहद सुस्त रही है और वैश्विक आर्थिक मंदी के कारण निर्यात में गिरावट आ रही है। उल्लेखनीय है कि भारत के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ओर से जारी किए गए ताजा आर्थिक आंकड़ों से पता चला है कि अक्तूबर-दिसंबर 2023 की तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी)में 8.4 फीसद की वृद्धि हुई।

पिछले साल इस दौरान यह बढ़ोतरी 4.3 प्रतिशत थी। आंकड़े जारी होने के तत्काल बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि बढ़ती वृद्धि के पीछे सरकार की नीतियां हैं। भारत में अप्रैल और मई के बीच लोकसभा चुनाव होने हैं। पीएम मोदी और उनकी पार्टी भाजपा ने अभी से चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है ताकि लगातार तीसरी बार सरकार बना सकें। मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा  कि 2023-24 की तीसरी तिमाही में 8.4 प्रतिशत की मजबूत जीडीपी वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था की ताकत और इसकी क्षमता को दर्शाती है। तेज आर्थिक विकास लाने के लिए हमारे प्रयास जारी रहेंगे, जिससे 1.4 अरब भारतीयों को बेहतर जीवन जीने में मदद मिलेगी। चुनाव से पहले मोदी विकसित भारत 2047 नामक एक आर्थिक नीति का प्रचार कर रहे हैं, जो ब्रिटिश शासन से आजादी पाने के ठीक 100 साल बाद, यानी 2047 तक भारत को एक विकसित देश में बदलने की उनकी सरकार की कार्य योजना  है। भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन कहते हैं कि मजबूत घरेलू मांग और निजी निवेश से विकास को गति मिलती रहेगी। आशा है कि केंद्र सरकार इस विकास की यात्रा को आगे बढ़ाएगी और आम लोगों की इच्छा और आकांक्षा को पूरा करेगी।