पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : जैसे-जैसे चुनाव के दिन नजदीक आ रहे हैं, 16 दलों वाला विपक्षी गठबंधन टूटता जा रहा है। विपक्षी एकता मंच ताश के पत्तों की तरह ढहने वाला है। आप द्वारा तीन निर्वाचन क्षेत्रों के लिए अपने उम्मीदवारों की सूची की घोषणा के बाद विपक्षी एकता मंच के सहयोगियों में से एक, तृणमूल कांग्रेस ने भी एकला चलो नीति अपनाई है। असम तृणमूल कांग्रेस ने 4 निर्वाचन क्षेत्रों में अपने उम्मीदवारों की घोषणा की है और सभी चार निर्वाचन क्षेत्रों में जीत का दावा किया है। सीपीआई ने हाल ही में तीन निर्वाचन क्षेत्रों जोरहाट, लखीमपुर और काजीरंगा लोकसभा क्षेत्रों की मांग कर रही है।
सीपीएम बरपेटा लोकसभा क्षेत्र पर दावा कर रही है, लेकिन विपक्षी एकता मंच के सहयोगी असम जातीय परिषद के नेता दुलु अहमद भी बरपेटा लोकसभा क्षेत्र से टिकट मांग रहे हैं और अन्यथा विपक्षी एकता मंच के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की धमकी दी है। बरपेटा के वर्तमान लोकसभा सांसद अब्दुल खालेक कांग्रेस नेतृत्व के काम से नाखुश हैं। वे धुबड़ी लोकसभा क्षेत्र चाहते थे। उन्होंने रकीबुल हुसैन को धुबड़ी से नामांकित न करने के लिए सार्वजनिक रूप से टिप्पणी की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से व्यक्त किया था कि केवल उन्हीं लोगों को नामांकित करें जो धुबड़ी के स्थानीय लोगों की भाषा बोल सकते हैं। तभी बदरुद्दीन अजमल को हराया जा सकता है। पूर्व विधायक राजू साहू भी विपक्षी एकता मंच के काम से नाखुश हैं।
डिब्रूगढ़ में असम जातीय परिषद के अध्यक्ष लुरिन ज्योति गोगोई को नामांकित किए जाने पर साहू का विरोध है। इसके अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन सिंह घटवार भी लुरिनज्योति गोगोई का नामांकन नहीं चाहते। घटवार और साहु का कहना है कि डिब्रूगढ़ निर्वाचन क्षेत्र में कई चाय बागान हैं। चाय बागान के लोग केवल प्रतीकों पर ही वोट करते हैं। वे केवल हाथ और कमल ही पहचानते हैं। विपक्षी एकता मंच हाथ के अलावा अन्य प्रतीक पर नहीं जीत सकता। इस दौरान प्रदेश में कांग्रेस पार्टी में भारी ढहाव देखा गया है। मंगलदै और डिब्रूगढ़ में सैंकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पार्टी छोड़ दी है। लोकसभा चुनाव की पूर्व संध्या पर पार्टी को ऐसी दुर्दशा से बचाने के लिए भूपेन बोरा क्या कदम उठाते हैं इसी बात पर पार्टी का भविष्य निर्भर करेगा।