चीन की तरफ से बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत अपनी नौसेना की ताकत लगातार बढ़ाने पर लगा हुआ है। चीन की ङ्क्षहद महासागर में लगातार दादागिरी बढ़ती जा रही है। उसको देखते हुए भारत को भी तैयार रहना पड़ेगा। हाल ही में भारत के दो युद्धपोतों आईएनएस विक्रमादित्य एवं आईएनएस विक्रांत ने अपना शक्ति प्रदर्शन कर यह दिखा दिया कि भारत हिंद महासागर में किसी देश की मनमानी नहीं चलने देगा। कई देशों के साथ हुए संयुक्त युद्धाभ्यास में दोनों विमानवाहक पोतों ने भाग लिया। इन दोनों विमानवाहक पोतों पर लड़ाकू विमान एवं हेलिकॉप्टर तैनात हैं जो खतरनाक मिसाइलों से लैस हैं। नौसेना के कमांडरों के सम्मेलन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट कहा कि भारतीय नौसेना ने यह सुनिश्चित किया है कि हिंद महासागर में किसी भी तरह का दखलंदाजी न हो।

आईएनएस विक्रमादित्य पर आयोजित कमांडर सम्मेलन में नौसेना की वर्तमान शक्ति की समीक्षा की गई तथा आगे की रणनीति तय की गई। रक्षा मंत्री ने चीन को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि भारत अपने साथ-साथ हिंद महासागर में सहयोगी देशों की पूरी मदद कर रहा है। हिंद महासागर एवं अरब सागर में हुती विद्रोहियों द्वारा व्यापारिक जहाजों पर किये जा रहे हमलों को भारतीय नौसेना ने कई बार विफल किया है तथा व्यापारिक जहाजों को संकट से उबारा है। यह भारतीय नौसेना की बढ़ती ताकत का जीता-जागता उदाहरण है। चीन जिबूती में नौसैनिक बेड़ा बनाकर तथा मालदीव में जासूसी जहाज खड़ा कर भारत के लिए चुनौती पैदा कर रहा है। बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत ने भी लक्षद्वीप के पास स्थित मनिकॉय द्वीप पर नौसैनिक बेस बना रहा है। इसके पूरा होने से चीन की गतिविधियों एवं समुद्री लुटेरों पर अंकुश लगाया जा सकेगा।

भारत लक्षद्वीप में स्थित एयर स्ट्रीप को भी विकसित कर रहा है जहां लड़ाकू विमान भी उतर सके। अंडमान निकोबार द्वीप समूह में भी हवाई पट्टी को विकसित किया गया है। इन सबका उद्देश्य नौसेना की बुनियादी ढांचा को मजबूत करना है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में पहले से ही चीन की दादागिरी बढ़ चुकी है। उसके पड़ोसी देश चीन की गतिविधियों से परेशान है। वे चाहते हैं कि भारत उनको मदद करे। भारत भी चीन को उसी की भाषा में जवाब देते हुए उसे पड़ोसी फिलिपींस, वियतनाम, जापान एवं इंडोनेशिया जैसे देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी बढ़ाकर चीन को घेरने में लगा हुआ है। भारत के साथ भी गलवान एवं तवांग में सीमा पर चीनी सैनिकों की झड़प हो चुकी है। डोकलाम में पहले भी दोनों देशों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई थी। भारत नौसेना में आधुनिक युद्धक विमान एवं हेलिकॉप्टर शामिल कर अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रहा है। सेना और वायु सेना भी सीमा पर चौकस है। अगर चीन ने कोई हिमाकत की तो इस बार भारत की तरफ से करारा जवाब मिलेगा।