आजकल देश की राजनीति में 'मोदी का परिवार' का मुद्दा छाया हुआ है। पिछले 3 मार्च को पटना में आयोजित इंडिया गठबंधन की रैली को संबोधित करते हुए बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने मोदी के परिवारवाद पर तंज कसते हुए कहा था कि मोदी का कोई परिवार ही नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हिंदू भी नहीं हैं। इंडिया गठबंधन की संयुक्त रैली में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी तथा समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी मौजूद थे। मालूम हो कि प्रधानमंत्री अपनी विभिन्न जनसभाओं में परिवारवाद पर हमला करते रहते हैं। लेकिन लालू की टिप्पणी के बाद भाजपा ने इस मुद्दे को तुरंत लपक लिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा एवं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित पार्टी के अनेक नेताओं ने अपने एक्स ट्वीटर पर मोदी का परिवार का डीपी लगा दिया है। मोदी के समर्थन में इस तरह का डीपी लगाने की सोशल मीडिया में बाढ़-सी आ गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लालू यादव की टिप्पणी पर तेलंगाना में आयोजित रैली में जवाब दिया है। उपस्थित जन-समूह को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा है कि देश के 140 करोड़ लोग मेरा परिवार है। देश की माताएं एवं बहनें, युवक-बच्चे सभी लोग मेरे ही परिवार के सदस्य है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि हम उस परिवारवाद के खिलाफ हैं जिन्होंने भ्रष्टाचार कर सत्ता पर कब्जा किया है। ऐसे लोग सरकारी सुविधाओं को आम जनता तक पहुंचने ही नहीं देना चाहते। उनके लिए अपने परिवार तथा निकट संबंधियों के हितों की ही ज्यादा चिंता है। ऐसे लोग देश के युवापीढ़ी की प्रतिभा को उभरने नहीं देते। बड़े पदों पर केवल उन्हीं के परिवार के लोग काबिज होते हैं, चाहे वो उस पद के योग्य हों या नहीं। मोदी ने यह भी कहा कि देश के कई राज्यों में परिवारवादी राजनीतिक दलों का उदाहरण सबके सामने है। भाजपा सरकार ऐसे परिवारवादी दलों के भ्रष्टाचार की पोल खोल रही है। इससे बौखलाकर ये पार्टीयां व्यक्तिगत हमला करने पर उतारू हैं। अब पूरे देश में परिवारवाद बनाम मोदी का परिवार का मुद्दा चर्चा में आ गया है। पूर्व कांग्रेसी नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने भी परिवारवाद के मुद्दे पर विपक्षी दलों को आईना दिखाया है। अगले लोकसभा चुनाव में अब मोदी का परिवार का मुद्दा चुनावी मुद्दा बनने जा रहा है। वर्ष 2014 में कांग्रेसी नेता मणिशंकर अय्यर ने कहा था कि चाय वाला प्रधानमंत्री कैसे बन सकता है। इसको मुद्दा बनाते हुए भाजपा ने 2014 में पूरे चुनाव के दौरान चाय पर चर्चा आयोजित कर कांग्रेस को कटघरे में खड़ा किया था।

उसके बाद वर्ष 2019 में कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा था कि चौकीदार चोर है। उसके बाद भाजपा ने इसको मुद्दा बनाते हुए पूरे चुनाव प्रचार के दौरान 'मैं चौकीदार हूं' का नारा लगाते हुए देश के सारे चौकीदारों को अपने पक्ष में कर लिया था। उनकी सभी चुनावी सभाओं में मैं भी हूं चौकीदार का मुद्दा प्रमुखता से छाया रहा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विपक्षी नेताओं के नकारात्मक बयान को अपने पक्ष में करने में माहिर हैं। ऐसा लगता है इस बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा भाजपा के नेतागण मोदी का परिवार के मुद्दे को आम जनता तक पहुंचा कर परिवारवादी विपक्षी पार्टीयों को घेरने का पूरा प्रयास करेंगे। यह सही हैै कि देश के कई राज्यों में ऐसे राजनीतिक दलों का शासन है जिसके शीर्ष पदों पर उसके परिवार के लोगों का कब्जा है। मोदी उन्हीं राजनीतिक दलों की पोल खोल रहे हैं जिससे वे पार्टीयां बौखलाई हुईं हैं।