भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आगामी लोकसभा चुनाव के लिए अपनी पहली सूची जारी कर दी है। 150 उम्मीदवारों की घोषणा की गई है, जिसमें 34 केंद्रीय एवं राज्यमंत्री शामिल किये गए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वाराणसी, गृह मंत्री अमित शाह गांधीनगर, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह लखनऊ तथा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला कोटा से चुनाव लड़ेंगे। भाजपा की पहली सूची में जातीय संतुलन का पूरा ख्याल रखा गया है, जिसमें सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया गया है। पहली सूची में 28 महिलाओं, 47 युवाओं, 27 अनुसूचित जाति, 18 अनुसूचित जनजाति तथा 57 अन्य पिछड़े वर्ग के उम्मीदवारों को मौका दिया गया है। उत्तर प्रदेश से 80 में से 51 सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा कर दी गई है। इसमें से वर्तमान 47 सांसदों पर फिर से भरोसा जताया गया है, जबकि चार जगहों पर उम्मीदवार बदल दिये गए हैं। भाजपा उत्तर प्रदेश में अपने सहयोगी दलों के लिए छह सीटें छोड़ दी है। हालांकि अभी भी इस मसले पर अंतिम सहमति नहीं बनी है, क्योंकि सहयोगी दल और सीटों की मांग कर रहे हैं। अयोध्या में रामलला की मूर्ति के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के बाद भाजपा के पक्ष में एक माहौल बना है। भाजपा इस माहौल का फायदा उठाते हुए विपक्ष के जातीय जनगणना के मुद्दे को हाशिये पर धकेलने के लिए हरसंभव कोशिश कर रही है। दिल्ली की सत्ता का रास्ता उत्तर प्रदेश से ही गुजरता है, क्योंकि यहां लोकसभा की 80 सीटें हैं। भाजपा की पहली सूची में पश्चिम बंगाल की 20, मध्यप्रदेश की 24, गुजरात और राजस्थान की 15-15, केरल एवं तेलंगाना की 12-12 और असम, झारखंड एवं छत्तीसगढ़ के लिए 11-11 उम्मीदवारों की घोषणा की गई है। सूची पर गौर करने से पता चलता है कि 195 सीटों में से 155 सीटों पर भाजपा ने पिछले चुनाव में जीत दर्ज की थी। अभी केवल 20 प्रतिशत वर्तमान सांसदों को उम्मीदवारी से बाहर किया गया है। इस सूची में केवल केरल के मल्लपुरम से एकमात्र मुस्लिम उम्मीदवार अबुल सलाम को मौका दिया गया है। भाजपा ने अपने युवा चेहरों को मौका देकर अपने इरादे स्पष्ट कर दिये हैं। पार्टी ने पहले ही 70 वर्ष से अधिक उम्र के नेताओं को पार्टी की सक्रिय राजनीति से किनारा करना शुरू कर दिया है। दिल्ली में भाजपा को आम आदमी पार्टी एवं कांग्रेस के गठबंधन से कड़ी चुनौती मिलने की उम्मीद है। इसी को ध्यान में रखकर भाजपा ने दिल्ली के सात में से पांच सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की है। इन पांचों में से चार सीटों के सांसदों को इस बार मौका नहीं दिया गया है। केवल मनोज तिवारी उत्तर-पूर्व दिल्ली संसदीय क्षेत्र से दोबारा उम्मीदवार घोषित किये गए हैं, जबकि नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र से केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी की जगह पूर्व विदेश मंत्री स्व. सुषमा स्वराज की बेटी बांसुरी स्वराज को मौका दिया गया है। इसी तरह पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन की जगह प्रवीण खंडेलवाल, रमेश विधुड़ी की जगह रामवीर विधुड़ी तथा प्रवेश वर्मा की जगह कमलजीत सेहरावत को मौका दिया गया है। दिल्ली के लिए घोषित पांच उम्मीदवारों में से दो महिलाएं हैं। अभी भी दो सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा बाकी है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी चार सीटों पर प्रतिद्वंद्विता करेगी, जबकि तीन सीटें कांग्रेस के लिए छोड़ दी गई है। काफी मंथन करने के बाद भाजपा ने अपनी पहली सूची जारी की है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के लिए मिशन-400 का लक्ष्य पूरा करने के लिए पार्टी एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पूरी तरह चुनावी मोड में आ गए हैं। वे लगातार चुनावी सभाओं को संबोधित कर रहे हैं तथा जनता के लिए लाभार्थी परियोजनाओं की झड़ी लगा रहे हैं। अब भाजपा अपनी दूसरी सूची के लिए तैयारी में जुट गई है।
जातीय संतुलन का प्रयास
