पाकिस्तान में नए प्रधानमंत्री के रूप में शहबाज शरीफ को चुना गया है। विपक्ष के हंगामे के बीच नवनिर्वाचित संसद में बहुमत हासिल करने के बाद शहबाज शरीफ गठबंधन सरकार का नेतृत्व करने के लिए दूसरी बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने। शहबाज शरीफ पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन)और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) की ओर से सर्वसम्मति से उम्मीदवार चुने गए। उन्हें 336 सदस्यीय सदन में 201 वोट हासिल हुए हैं। पीएमएल-एन अध्यक्ष शहबाज (72) पाकिस्तान के तीन बार के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ (74)के छोटे भाई हैं। नेशनल असेंबली के स्पीकर सरदार अयाज सादिक ने नतीजों की घोषणा करते हुए शहबाज को पाकिस्तान का 24वां प्रधानमंत्री नियुक्त किया। शहबाज को सोमवार को राष्ट्रपति भवन ऐवान-ए-सद्र में पद की शपथ दिलाई जाएगी।  सनद रहे कि पाकिस्तानी संसद में रविवार को पीएम के चुनाव के लिए वोटिंग शुरू हुई। वोटिंग के दौरान शहबाज ने अपने प्रतिद्वंद्वी पर 100 वोटों से अधिक की बढ़त हासिल की। शहबाज शरीफ को 201 वोट मिले, वहीं पीटीआई के उमर अयूब खान को 92 वोट मिले। इसके बाद शहबाज शरीफ के नाम की घोषणा पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री के रूप में कर दी गई। उनका जन्म 1950 में लाहौर (पाकिस्तान) में हुआ था। वह पूर्व में पाकिस्तान के सबसे घनी आबादी वाले प्रांत पंजाब के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। शाहबाज शरीफ 20 फरवरी 1997 से 12 अक्तूबर 1999 तक भी पंजाब के मुख्यमंत्री रहे। 1999 में मुशर्रफ के पाकिस्तान सरकार पर कब्जा कर लेने के बाद वह सऊदी अरब में निर्वासित रहे। 11 मई 2004 को उन्होंने पाकिस्तान वापस आने की कोशिश की मगर लाहौर के अल्लामा इकबाल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से उन्हें वापस भेज दिया गया था। उनके दो बेटे हमजा शाहबाज और सलमान शाहबाज और तीन बेटियां हैं। हमजा शाहबाज राजनीतिज्ञ हैं और एनए के सदस्य भी हैं। सलमान शाहबाज ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय लंदन से अध्ययन किया और उनका अधिक प्रवृत्ति व्यापार की ओर है। शहवाज शरीफ सख्त प्रबंधन के लिए प्रसिद्ध हैं जिसमें उन्होंने लाहौर का प्रारूप बदलने की कोशिश की। उन्होंने अपने शासनकाल में भाई-भतीजावाद और सिफारिश के खिलाफ भी काफी प्रदर्शन किया और बूटी माफिया के खिलाफ काम किया। अपने दौर के खर्च अपनी जेब से भुगतान किए और इस दौरान पूरे पंजाब में कोई नई कार नहीं खरीदी गई। पुलिस में पहली बार पढ़े लिखे युवा लड़कों की भर्ती मैरिट के आधार पर की गई। फरवरी 2008 के चुनाव के बाद उपचुनाव में जीतकर दोबारा पंजाब के मुख्यमंत्री चुने गए। मई 2013 के चुनाव के बाद वे फिर पंजाब के मुख्यमंत्री बने। इसी बीच 12 अक्तूबर 1999 को पाकिस्तान सेना ने सत्ता पर कब्जा कर लिया और अन्य लोगों के साथ शाहबाज शरीफ भी जेल में रहे। बाद में उन्हें सऊदी अरब निर्वासित कर दिया गया। सरकार के अनुसार यह एक अनुबंध के तहत हुआ मगर इससे शरीफ परिवार इनकार करता है और सरकार भी कोई सबूत पेश नहीं कर सकी। लाहौर हाईकोर्ट ने जब फैसला दिया कि वह पाकिस्तान आने के लिए स्वतंत्र हैं तो 11 मई 2004 को उन्होंने पाकिस्तान वापस आने की कोशिश की मगर लाहौर के अल्लामा इकबाल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (अल्लामा इकबाल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे) में उन्हें गिरफ्तार कर वापस सऊदी अरब भेज दिया गया। सऊदी अरब से फिर वह ब्रिटेन की राजधानी लंदन चले गए और वहां से राजनीति करते थे। इसके बाद वह नवाज शरीफ के साथ लंदन चले गए। हाल ही में ऑल पार्टी सम्मेलन में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई और अब उन्हें दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने का मौका मिल रहा है। वैसे उनकी डगर आसान नहीं रहेगी क्योंकि पाकिस्तान की आवाम इमरान खान के जेल में जाने से परेशान है और वह इसके लिए सेना और शरीफ बंधुओं को जिम्मेवार मानती है। अब देखना है कि शहवाज नाराज आवाम को मनाने के लिए क्या करते हैं और सेना को कैसे बैलेंस करते हैं। दूसरी ओर जहां तक शहवाज शरीफ और प्रधानमंत्री मोदी के संबंधों का सवाल है, इसकी अभी परीक्षा होनी बाकी है, यह अलग बात है कि पीएम मोदी और नवाज शरीफ के बीच अच्छे संबंध रहे हैं, अब देखना है कि भारत-पाक के बीच आगे संबंध कैसा रहता है, यह सब कुछ शहवाज शरीफ के आचरण पर निर्भर करता है।