पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए नरेंद्र मोदी सरकार नागरिकता संशोधन कानून के नियम तैयार करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। भारत में प्रवेश करने वाले पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के लिए 2019 में संसद में पारित नागरिकता संशोधन अधिनियम किसी भी समय प्रख्यापित किया जा सकता है। गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले नागरिकता संशोधन अधिनियम के तहत नियम तैयार और लागू हो जाएगा। भाजपा सरकार छठी अनुसूची वाले क्षेत्रों को छोड़कर पूरे देश में नागरिकता संशोधन अधिनियम लागू करने की योजना बना रही है, लेकिन असम के लिए इस कानून के नियम अलग होने की संभावना है। क्योंकि राज्य सरकार ने सीएए के तहत नियमावली के मसौदे पर कई प्रस्तावों के साथ केंद्र सरकार को एक गोपनीय पत्र भेजा है। ऐसी संभावना है कि केंद्र सरकार असम सरकार के आह्वान पर असम के लिए नागरिकता संशोधन अधिनियम का एक अलग नियम तैयार करेगी। गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार असम के मामले में नागरिकता संशोधन अधिनियम के नियम अलग होंगे। असम में अधिनियम की घोषणा के तीन महीने के भीतर नागरिकता के लिए आवेदन करना होगा। पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से असम आए हिंदू, सिख, ईसाई, फारसी, जैन और बौद्ध लोगों को नियमों के लागू होने के तीन महीने के भीतर सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ जिला प्रशासन कार्यालय में आवेदन करना होगा। शीर्ष सूत्रों ने कहा कि असम सरकार से इस तरह के एक अलग नियम का अनुरोध आया है। असम में नागरिकता के लिए आवेदन की अंतिम समय सीमा तय नहीं होने पर राज्य सरकार को इस कानून पर असंतोष बढ़ने की आशंका है। गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन कानून कोई स्वचालित कानून नहीं है। इस कानून को लागू करने के लिए कुछ नियमों की जरूरत है। नियम तैयार करने की जिम्मेदारी केंद्रीय गृह मंत्रालय की है। गृह मंत्रालय नियमावली तैयार कर संसदीय समिति को सौंप देंगे। समिति की मंजूरी से नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा। नागरिकता के लिए केवल वे लोग ही आवेदन कर सकते हैं जिन्होंने 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में प्रवेश किया हो। गृह मंत्रालय के शीर्ष सूत्रों ने कहा कि आवेदकों को अपना धर्म साबित करने के लिए 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत सरकार या राज्य सरकार द्वारा जारी दस्तावेज जमा करने होंगे। आवेदकों को  भारत में प्रवेश करने से पहले अपने गृह देश में धार्मिक उत्पीड़न का शिकार होने का कोई सबूत देने की आवश्यकता नहीं है। क्योंकि धार्मिक उत्पीड़न साबित करने के लिए पुलिस स्टेशन में की गई शिकायत या अन्य कोई दस्तावेज होगा जो पड़ोसी देश के अधिकारियों द्वारा जारी किया गया दस्तावेज होगा। लेकिन दूसरे देशों के दस्तावेज भारत सरकार द्वारा स्वीकार नहीं किए जा सकते। गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन कानून के लागू होने से असम और पश्चिम बंगाल समेत देशभर में फिर से आंदोलन शुरू होने का खतरा है। इसलिए नरेंद्र मोदी सरकार बहुत ही कौशलपूर्ण तरीके से लोकसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने की पूर्व संध्या पर नागरिकता संशोधन कानून की नियमावली लागू करने की योजना बना रही है ताकि चुनाव प्रचार के धूमधाम में सीएए विरोधी आंदोलन को कमजोर किया जा सके। राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गैर-मुस्लिम विदेशी नागरिकों को सीएए के तहत नागरिकता के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन करना होगा। गृह मंत्रालय ने इसके लिए पहले ही एक ऑनलाइन पोर्टल तैयार कर लिया है। इसका मतलब है कि पूरी आवेदन प्रक्रिया डिजिटल रूप से संचालित की जाएगी। आवेदक विदेशियों को अपना नाम और पता ऑनलाइन दर्ज करना होगा और बिना किसी यात्रा दस्तावेज के केवल भारत में प्रवेश के वर्ष का उल्लेख करना होगा। गृह मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि नागरिकता आवेदन प्रक्रिया के लिए किसी अतिरिक्त दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, आवेदन के समय आवेदक को यह उल्लेख करना होगा कि उसने 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में प्रवेश किया था। संबंधित अधिकारी आवेदक के दस्तावेजों की प्रामाणिकता की पुष्टि करेंगे और आवश्यक कार्रवाई करेंगे। अगले चरण में आवेदक को 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में शरण के दस्तावेज और धर्म के प्रमाण के साथ कोई भी अनुमोदित दस्तावेज जमा करना होगा।