पूर्वांचल प्रहरी संवाददाता गुवाहाटीः असम सरकार ने प्राथमिक विद्यालयों और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के बाद राज्य के अनेक कॉलेजों को हमेशा के लिए बंद करने की योजना बनाई है। राज्य सरकार पहले ही 8,066 उच्च प्राथमिक और निम्न प्राथमिक विद्यालयों को विलय के नाम पर बंद कर चुकी है। असम विधानसभा के चालू बजट सत्र में शिक्षा विभाग ने कहा कि सरकार ने विलय के माध्यम से 6,032 निम्न प्राथमिक विद्यालयों और 2,034 उच्च प्राथमिक विद्यालयों को बंद कर दिया है। इसके अलावा राज्य के 214 सरकारी माध्यमिक, उच्च माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बंद कर दिए गए हैं। पिछले 10 वर्षों में लगभग 10,000 सरकारी स्कूलों को बंद करने के बाद शिक्षा मंत्री डॉ. रोनोज पेगु ने विलय के नाम पर कम छात्रों वाले प्रादेशीकृृत कॉलेजों को बंद करने  की योजना की घोषणा की है। शिक्षा मंत्री द्वारा न्यूनतम 500 छात्रों की संख्या वाले सरकारी कॉलेजों को बंद करने का निर्णय लिया गया है। शिक्षा मंत्री डॉ. पेगु ने ट्वीट कर उच्च शिक्षा विभाग की योजनाओं की जानकारी दी। पहले चरण में राज्य के 79 कॉलेजों को बंद करने के लिए चिह्नित किया गया है। इन कॉलेजों में 500 से भी कम छात्र हैं। शिक्षा विभाग सार्वजनिक प्रतिक्रिया के डर से कॉलेजों को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने की योजना बना रहा है। सबसे पहले कम छात्र संख्या वाले कॉलेजों के विभागों को बंद कर पड़ोसी कॉलेजों में विलय कर दिया जाएगा। एक-एक करके सभी विभागों को बंद करने के बाद किसी समय कॉलेज में ही ताला लग जाएगा और सभी विभागों को पास के कॉलेजों में विलय कर दिया जाएगा। इसके अलावा यदि कुल मिलाकर कम छात्र हैं, तो पूरे कॉलेज को सीधे बंद कर दिया जाएगा और पड़ोसी कॉलेजों में विलय कर दिया जाएगा। विलय के फलस्वरूप बंद हुए मुख्य महाविद्यालय के पद भी समाप्त हो जायेंगे। मंत्री ने उच्च शिक्षा विभाग को कम छात्र संख्या वाले विभागों में रिक्त पदों पर भर्ती रोकने का भी निर्देश दिया है। उच्च शिक्षा विभाग ने 500 से कम नामांकन वाले 79 कॉलेजों के प्राचार्यों और प्रबंधन समितियों के अध्यक्षों के साथ बैठक कर नामांकन बढ़ाने के संभावित रोडमैप पर चर्चा की। उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग को इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग के शिक्षा क्षेत्र के समान एक नीति तैयार करने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य कम नामांकन वाले कॉलेजों या विभागों का विलय करना और कम नामांकन वाले विभागों में रिक्त पदों पर शिक्षकों की भर्ती को रोकना है।