पूर्वांचल प्रहरी कार्यालय संवाददाता गुवाहाटी : हिमंत सरकार की कैबिनेट बैठक में बीते शनिवार की रात में असम मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम, 1935 को निरस्त कर दिया गया। सरकार के इस फैसले पर मुख्य विपक्ष दल कांग्रेस सहित अन्य दलों ने भी इसका कड़ा विरोध किया, वहीं मुख्यमंत्री हिमंत विश्वशर्मा ने इसे सही ठहराया है। असम विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष देवब्रत सैकिया ने कहा कि सरकार के इस फैसले से राज्य में अवैध विवाह की संख्या बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के अध्यक्ष मौलान बदरुद्दीन अजमल ने शनिवार को दावा किया कि इस अधिनियम को निरस्त करना असम में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लाने की दिशा में पहला कदम है, लेकिन यह राज्य में भाजपा सरकार की ताबूत में आखिरी कील साबित होगा। उल्लेखनीय है कि असम मंत्रिमंडल ने इस कानून को निरस्त करने की शुक्रवार रात मंजूरी दे दी। इस फैसले पर मुख्यमंत्री हिमंत ने कहा कि बाल विवाह को समाप्त करने के लिए स्वतंत्रता-पूर्व के इस अधिनियम को निरस्त कर दिया गया है। मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि इस अधिनियम में विवाह पंजीकरण की तब भी अनुमति देने के प्रावधान शामिल थे, भले ही दूल्हा और दुल्हन 18 और 21 वर्ष की कानूनी उम्र के ना हुए हों, जो कि कानून द्वारा आवश्यक है। इससे सामाजिक सुधार लाने का प्रयास किया जा रहा है। देवब्रत सैकिया ने कहा है कि मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम को निरस्त करने से राज्य में अवैध विवाह के और अधिक मामले सामने आएंगे। अब इस कदम से अवैध शादियां आसानी से प्रकाश में नहीं आएंगी। साथ ही इस अधिनियम के निरस्त होने से काजी प्रथा समाप्त हो जाएगी। अधिनियम को समाप्त करने से और अधिक अवैध विवाहों को बढ़ावा मिल सकता है। सरकार को इस कानून को खत्म करने की बजाए इसमें सुधार करना चाहिए था। यूसीसी के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसे लोगों द्वारा स्वेच्छा से स्वीकार किया जाना चाहिए और उन पर इसे लागू नहीं किया जाना चाहिए। सरकार को इसे बलपूर्वक लागू नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक भारत में समान नागरिक संहिता नहीं बन जाती है, तब तक समाज में कुछ प्रथागत कानूनों और परंपराओं का पालन करना होगा। अन्यथा लोग तनावग्रस्त हो सकते हैं। सैकिया ने कहा कि सरकार अब यूसीसी के लिए माहौल उपयुक्त बनाने के लिए इस तरह के कानूनों को खत्म कर रहे हैं। वहीं अजमल ने मीडिया से कहा कि सरकार मुसलमानों को भड़काने और मतदाताओं को अपने पक्ष में ध्रुवीकृत करने की कोशिश कर रहे हैं। धुबड़ी से सांसद अजमल ने कहा कि अधिनियम को निरस्त करना राज्य में यूसीसी शुरू करने की दिशा में भाजपा सरकार का पहला कदम है, लेकिन इससे असम में भाजपा सरकार का पतन हो जाएगा। उन्होंने कहा कि हम निश्चित रूप से अधिनियम को निरस्त करने का विरोध करेंगे, लेकिन चुनाव के बाद। हम अभी चुप रहेंगे। कानून निरस्त होने के बाद मुस्लिम विवाह कराने वाले काजी को उनके पुनर्वास के लिए दिए जाने वाले दो लाख रुपए के एकमुश्त मुआवजे का उल्लेख करते हुए अजमल ने कहा कि काजी भिखारी नहीं हैं। मैं उनसे अनुरोध करता हूं कि वे सरकार से एक भी पैसा न लें।
मुस्लिम विवाह अधिनियम निरस्त होने पर राजनीतिक घमासान शुरू