इन दिनों आमतौर पर 40 की उम्र पार करते ही कई तरह की बीमारियां घेर लेती हैं और वहां से ही दुःखद दिनों की शुरुआत हो जाती है। कहा जाता है कि इसकी मुख्य वजह हमारे खानपान और दिनचर्या का बदलाव है। सामान्य धारणा है कि प्रोसेस्ड फूड सेहत के लिए हानिकारक हैं, इनकी वजह से वजन और मोटापा बढ़ जाता है। उदाहरण के लिए प्रोसेस्ड फूड में सामान्य खाद्य पदार्थों की तुलना में चार गुना अधिक कैलोरी हो सकती है। प्रोसेस्ड फूड का मतलब ऐसे खाद्य पदार्थों से है, जिनके उत्पादन के दौरान उनमें कुछ बदलाव किया गया है। यह ऐसा खाद्य पदार्थ हो सकता है, जिसमें विटामिन या रंग मिलाया गया हो या जिसे लंबे समय तक इस्तेमाल करने लायक बनाने के लिए कुछ अन्य तरीके अपनाए गए हों, तकनीकी रूप से देखा जाए तो साबुत अनाज का पैक किया हुआ ताजा ब्रेड भी एक प्रोसेस्ड फूड ही है। ऐसा इसलिए कि इसे बनाने की प्रक्रिया में इसके मूल तत्वों में बदलाव हो जाता है। हालांकि, हम अभी कहते हैं कि प्रोसेस्ड फूड हमारे स्वास्थ्य के लिए खराब हैं, जबकि यह इस बात पर निर्भर करता है कि खाद्य पदार्थों को किस हद तक प्रोसेस किया गया है। अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड में प्रति 100 ग्राम औसतन 378 कैलोरी होती है, वहीं सामान्य तौर पर प्रोसेस किए गए खाद्य पदार्थों में 94 कैलोरी होती है। ये पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड जैसे कि रेडी-टू-ईट फूड, पैकेटबंद केक, चिप्स, बिस्किट, कुकीज, मिठाई और चॉकलेट से सेहत पर जो बुरा असर पड़ता है, वह इस वजह से होता है कि इन्हें बहुत ज्यादा प्रोसेस किया जाता है या फिर इस वजह से कि इनमें जरूरी पोषक तत्व और विटामिन कम होते हैं। पिछले शोध से पता चलता है कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि खाद्य पदार्थों को प्रोसेस करने से स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। हालांकि, इस बात से असर पड़ सकता है कि वह खाद्य पदार्थ किस चीज से बना है और किस तरीके से तैयार किया गया है। खाद्य पदार्थ को जिस तरीके से तैयार किया जाता है, उससे इसे खाने की आदत पर असर पड़ सकता है। इसका नतीजा यह हो सकता है कि लोग इसे ज्यादा खा सकते हैं और ज्यादा खाना आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। अध्ययन में प्रोसेस किए गए जिन खाद्य पदार्थों को सेहत के लिए लाभदायक माना गया है, उनमें पैकेटबंद सैनविच, पौधों से मिलने वाले ऐसे खाद्य पदार्थ जो दूध के विकल्प हो सकते हैं और नाश्ते के तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले ज्यादा फाइबर वाले अनाज शामिल हैं। दूसरी ओर सिर्फ कैलोरी की मात्रा के आधार पर ही ये नहीं कहा जा सकता है कि कोई खाना कितना अच्छा या बुरा है। अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड यानी औद्योगिक तौर पर तैयार किया गया भोजन भी प्राकृतिक और संश्लेषित खाद्य पदार्थों से प्राप्त होता है। अधिकांश अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड में काफी ज्यादा कैलोरी होती है और पोषक तत्व कम होते हैं। उदाहरण के लिए फ्रोजन पिज्जा, डोनट्स और चिप्स, इन्हें गेहूं, टमाटर, डेयरी और आलू से तैयार किया जाता है, लेकिन ये प्रोसेस्ड फूड मूल खाद्य पदार्थ से काफी अलग होते हैं। इसके अलावा प्रोसेस्ड फूड में अक्सर काफी ज्यादा केमिकल का भी इस्तेमाल किया जाता है और इससे उनकी लत लग सकती है। वैसे हमारे शरीर के लिए विटामिन अति आवश्यक है, जो हमें भोज से प्राप्त होते हैं। जैसे- विटामिन ए आंखों के लिए जरूरी है और शरीर को सर्दी से बचाता है। विटामिन सी त्वचा और हड्डियों के लिए जरूरी है। विटामिन डी हड्डियों, दांतों और मांसपेशियों के लिए महत्वपूर्ण है। विटामिन ई हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाए रखता है। विटामिन बी12 लाल रक्त कोशिकाओं और तंत्रिका तंत्र के लिए महत्वपूर्ण है। चाहे पैकेटबंद स्नैक्स हों या घर का बना खाना, अगर उनमें ज्यादा वसा, चीनी और नमक है, तो वे सेहत के लिए अच्छे नहीं हैं, इससे मोटापा, दिल की बीमारी, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं, मानसिक संतुलन बिगड़ सकता है और जल्दी मरने का खतरा भी बढ़ जाता है।
खान-पान और बीमारी
