देश की आजादी के बाद केंद्र सरकार पाक और चीन सीमा को महत्व देती आ  रही है। बाकी पड़ोसी देशों की सीमा को उतना महत्व नहीं दिया जा रहा था। असम आंदोलन के बाद भारत-बांग्लादेश सीमा को मजबूत करने के लिए बाड़ लगाने का काम शुरू हुआ जो अभी तक पूरा नहीं हो सका है। बांग्लादेश से आने वाले घुसपैठियों को रोकने के लिए सरकार ने यह अहम फैसला लिया था। अब पड़ोसी देश म्यामां की सीमा पर बाड़ लगाने की जरुरत महसूस हुई है, जिस पर काम शुरू हो चुका है। भारत से म्यामां की 1643 किलोमीटर सीमा लगती है। वर्ष 2000 से ही म्यामां से होने वाली अवैध गतिविधयों को रोकने की जरुरत महसूस की जा रही थी। सीमा पर पहरेदारी की जिम्मेवारी असम रायफल्स के पास है। ढांचागत सुविधा की कमी तथा बीहड़ जंगल होने के कारण सभी जगह सुरक्षा बलों की तैनाती संभव नहीं है। इसी का फायदा उठाकर ड्रग माफिया एवं आतंकी भारत में घुस आते हैं। वर्ष 2014 में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार के सत्ता में आने के बाद म्यामां की सीमा समस्या के समाधान के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी ने म्यामां सीमा की सुरक्षा की जिम्मेवारी भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस को सौंपने की सिफारिश की थी, किंतु उस पर अमल नहीं हुआ। म्यामां की सीमा से करोड़ों रुपए के ड्रग्स का व्यापार होता है। खुली सीमा का फायदा उठाकर ड्रग तस्कर म्यामां के रास्ते भारत में ड्रग्स भेजते हैं। म्यामां पूर्वोत्तर में सक्रिय आतंकी संगठनों के लिए सुरक्षित पनहगार बना हुआ है। भारत से सटे म्यामां के इलाके में पूर्वोत्तर के आतंकी संगठनों के कई शिविर चल रहे हैं जो भारत के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। म्यामां में सेना द्वारा लोकतांत्रिक सरकार को जबर्दस्ती बेदखल कर सत्ता पर कब्जा करने के बाद वहां गृहयुद्ध जैसी स्थिति है। सेना एवं लोकतंत्र समर्थक ग्रुपों के बीच लगातार झड़प होने की खबर है। इसका नतीजा यह है कि म्यामां से बड़ी संख्या में नागरिक तथा सशस्त्र जवान भी भारत की सीमा में घुस आते हैं। इससे भारत में कभी भी विकट स्थिति पैदा हो सकती है। इसका प्रमाण मणिपुर में शुरू हुए जातीय संघर्ष के दौरान देखने को मिला है। म्यामां से आए आतंकी समूहों द्वारा की गई आतंकी कार्रवाई से स्थिति बेकाबू होती चली गई। आज भी आतंकी संगठन अपने नापाक इरादे को अंजाम देने के लिए साजिश रचते रहते हैं। मणिपुर में पिछले कई महीने से चल रही हिंसा में अब तक 200 से ज्यादा लोगों को अपनी जानें गंवानी पड़ी हैं। जब भी मणिपुर में स्थिति सामान्य होने को आती है उस वक्त आतंकी संगठन कोई न कोई बड़ी घटना को अंजाम देकर स्थिति बिगाड़ देते हैं। ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार को लगता है कि म्यामां की सीमा पर कंटीले बाड़ लगाने के बाद ही समस्या का हल हो सकता है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सीमा पर बाड़ लगाने की घोषणा की थी। सीमा-सड़क संगठन बाड़ लगाने का काम कर रहा है। बाड़ लगाने के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्र में सड़क का भी निर्माण करना होगा ताकि सुरक्षा बलों की आवाजाही में कोई परेशानी न हो। दूसरी बात यह है कि भारत और म्यामां के लोगों को बिना पासपोर्ट के 16 किलोमीटर तक एक-दूसरे की सीमा में जाने की छूट थी ताकि वे अपने समाज के लोगों से बेरोक-टोक मिल सकें। मणिपुर में हो रही घटनाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने इस सुविधा को वापस ले लिया है। हालांकि इसके खिलाफ मणिपुर में आवाज भी उठी थी। लेकिन देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पहले के आदेश पर रोक लगाना जरूरी था। पूरी सीमा पर बाड़बंदी होने के बाद म्यामां की तरफ से होने वाली अवैध घुसपैठ पर अंकुश लग सकेगा तथा सुरक्षा बलों को कारगर ढंग से काम करने का मौका मिलेगा। म्यामां में चल रही राजनीतिक अस्थिरता भारत की सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती है। चीन म्यामां के माध्यम से भारत में गड़बड़ी फैलाने की कोशिश करता रहता है। भारत को पूरे मामले में चौकन्ना रहना होगा।