पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता कार्बी आंग्लांग : असम के पहाड़ी जिले पश्चिम कार्बी आग्लांग के खेरनी चाराली में गत 15 फरवरी को पीजीआर तथा वीजीआर जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच हुई मारपीट के बाद दोनों पहाड़ी जिलों में पिछले पांच दिनों से बनी तनावपूर्ण स्थिति के उचित समाधान हेतु आज राजनीतिक दलों व संगठनों की एक बैठक संपन्न हुई। मालूम हो कि दो समुदायों के बीच चल रहे इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्बी आंग्लांग स्वयात शासी परिषद के मुख्य कार्यकारी सदस्य तुलीराम रोंगहांग ने सभी से शांति बनाए रखने और भाईचारा बहाल करने को कहते हुए गत रविवार को एक तत्काल आदेश जारी किया कि बीस फरवरी को पीजीआर और वीजीआर जमीन को लेकर सभी राजनीतिक दलों और संगठनों के साथ बैठक कर इस पर एक फैसला लिया जाएगा। अपने आदेश पर अमल करते हुए आज मंगलवार को डिफू के मातिपुंग स्थित आर्बोरेटम व क्राफट सेंटर में सुबह दस बजे से मुख्य कार्यकारी सदस्य तुलिराम की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। लगभग तीन घंटे तक चली लंबे बहस के अंत में कार्बी आंग्लांग स्वयात शासी परिषद ने यह फैसला लिया कि आखिरकार खेरनी अंचल के पीजीआर और वीजीआर जमीन में रहने वाले लोगों के खिलाफ निष्कासन की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उक्त जमीन पर रहने वाले जितने भी गांव है और वहां के सभी सरकारी गांवबुढा की नियुक्ति रद्द की जाएगी। बैठक के अंत में मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए कार्बी आंग्लांग परिषद के मुख्य कार्यकारी सदस्य तुलिराम रोंगहांग ने बताया कि परिषद के अंतर्गत हवाईपुर मौजा के दोनकामोकाम सर्किल अंतर्गत कुल 1,983 परिवार हैं, जिसकी कुल जनसंख्या 9865 है। वहीं सिलोनीजान सर्किल अबतक खाली है, जबकि फुलनी सर्किल में 103 परिवार पीजीआर और वीजीआर जमीन में बसे हैं। तुलिराम ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए उक्त पीजीआर और वीजीआर जमीन में रहने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही। बहरहाल कार्बी आंगलांग परिषद के इस फैसले के बाद से ही मामले को लेकर पिछले पांच दिनों से अतिक्रमण हटाने की मांग कर रहे दल-संगठनों में जहां खुशी का माहौल है, वहीं पश्चिम कार्बी आंग्लांग जिले में पीजीआर और वीजीआर जमीन रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। आखिर सालों से रह रहे लोग उक्त जमीन पर अपना घर बना चुके हंै और ऐसे में सब टूटने के बाद वे आखिर कहां जाएंगे। आखिर उनका भविष्य क्या होगा, यह एक बड़ा सवाल है। बताते चलें कि कुल नौ हजार से अधिक आबादी वाली इस जमीन पर छह हजार के आसपास केवल हिंदीभाषी समुदाय के लोग हैं, जो वर्षों से उक्त इलाके में रहते हैं और अपनी जीविका के लिए उक्त जमीन पर खेती-बाड़ी कर परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। लेकिन अफसोस की बात है कि आज की बैठक के अंत में इस पर कोई विचार नहीं आया कि आखिर पीजीआर और वीजीआर जमीन पर अभियान चलाने के बाद उन परिवारों को पुनर्वास देने के लिए कार्बी आग्लांग स्वायत शासी परिषद क्या कदम उठाएगी। मुख्य कार्यकारी सदस्य तुलिराम से इस मामले में पूछे गए सवाल पर वे अपना जवाब देने से दूर रहे और आने वाले समय में देखा जाएगा, यह कहकर बात तो टालते नजर आए। इस बैठक में सत्तारूढ़ दल के सभी विधायक, सांसद और पर्षद के साथ पूर्व सांसद डॉ. जयंत रोंगपि, पूर्व मंत्री होलीराम तेरांग, राजनीतिक दल क्रमशः कांग्रेस से अशोक तेरन, सीपीआई (एमएल) से रवि कुमार फांगचो, एपीएचएलसी से जॉन इंग्ति कठार, एएसडीसी से चंद्रकांत तेरन के अलावा कार्बी छात्र संस्था के सभी गुट, एएसडीसी युवा मोर्चा, केएनसीए समेत अन्य छात्र और राजनीतिक दल महिला समिति आदि के प्रतिनिधि उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि गत 15 फरवरी को दो समुदायों के बीच शुरू हुए विवाद को लेकर पिछले पांच दिनों से दोनो पहाड़ी जिलों के लगभग सभी स्थानों में जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया जा रहा था। जगह-जगह कार्बी आंग्लांग के विभिन्न दल-संगठन उक्त मारपीट को केंद्र कर बस यही मांग कर रहे थे कि खेरनी अंचल में पीजीआर और वीजीआर जमीन में रहने वाले बिहारियों को जल्द से जल्द निष्कासित किया जाए और उक्त मारपीट की घटना में जुड़े सभी आरोपियों को पकड़कर कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। इसे लेकर पिछले पांच दिनों से दोनों जिलों में तनाव का माहौल बना हुआ था। जानकारों का कहना है कि यदि घरों को तोड़ा जाता है तो करीब दस हजार लोग बेघर हो जाएंगे, वैसे भी उनके पुनर्वास के बिना घरों को तोड़ना कतई सही नहीं है। ऐसे में मुख्यमंत्री को हस्तक्षेप कर पीड़ितों की समस्या को ध्यान में रखकर विचार करना चाहिए।
हजारों हिंदीभाषी बेघर होने के कगार पर