पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से 75 किलोमीटर दूर उत्तरी 24 परगना जिले में स्थित संदेशखाली पिछले कई दिनों से मीडिया की सुर्खियों में बना हुआ है। पिछले 13 वर्षों से संदेशखाली के लोग खासकर महिलाएं तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता शेख शाहजहां की काली करतूतों से तंग आ चुकी है। टीएमसी के नेता शाहजहां तथा उनके गुर्गों ने संदेशखाली में गुंडाराज चला रखा है, जहां प्रशासन केवल मूकदर्शक बनकर रह गया है। जिस राज्य की मुख्यमंत्री महिला हो उसी के राज्य में उसी की पार्टी के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं द्वारा महिलाओं को शारीरिक एवं मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा हो, इसकी कल्पना नहीं की जा सकती। सर्वप्रथम संदेशखाली 5 जनवरी 2024 को विवादों में आया। उस दिन प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम राशन घोटाला मामले में शेख शाहजहां के यहां जांच-पड़ताल करने पहुंची थी, लेकिन शेख के समर्थकों ने ईडी की टीम पर पत्थरबाजी की जिसमें टीम के कई अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना के बाद शेख पिछले 40 दिनों से फरार हैं। हालांकि काफी हंगामे के बाद पश्चिम बंगाल की पुलिस ने शेख के दो गुर्गों शिव प्रसाद हाजरा एवं उत्तम सरकार को गिरफ्तार कर लिया है। इस घटना के लगभग एक महीने के बाद संदेशखाली की महिलाओं की हिम्मत बढ़ी तथा उन लोगों ने पिछले 8 फरवरी को शेख के खिलाफ सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन किया तथा आवश्यक कदम उठाने की मांग की। उसके बाद जो खुलासा हुआ है वह दिल दहलाने वाला है। वहां की महिलाओं ने बताया कि टीएमसी के नेता और कार्यकर्ता शेख के इशारे पर उनकी जमीन को जबर्दस्ती दखल कर रहे हैं तथा महिलाओं का शारीरिक उत्पीड़न किया जा रहा है। अनेक महिलाओं ने कैमरे के सामने आकर आरोप लगाया है कि वहां की महिलाओं को मीटिंग के बहाने मध्य रात्रि को बुलाया जाता था तथा सुबह छोड़ दिया जाता था। सबसे दुखद पक्ष यह है कि पुलिस प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। कुछ महिलाएं जो हिम्मत करके पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराती थीं तो उल्टे पुलिस वाले कार्रवाई करने की जगह उक्त महिलाओं की पूरी जानकारी शेख शाहजहां को देते थे। बढ़ते विरोध प्रदर्शन के बाद पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने भी पिछले 12 फरवरी को संदेशखाली का दौरा किया तथा महिलाओं की फरियाद सुनी। ऐसा आरोप है कि वहां की पुलिस ने महिलाओं को धमकाते हुए कहा था कि वे राज्यपाल को घटना की सच्ची जानकारी नहीं दें। मामला कोलकाता हाईकोर्ट तक पहुंच गया किंतु ममता सरकार पर कोई असर नहीं हुआ। कोलकाता हाईकोर्ट ने 20 फरवरी को सुनवाई करते हुए यह स्वीकार किया है कि संदेशखाली की घटनाएं ममता सरकार के इशारे पर चल रही थीं। इस तरह की घटना को रोकने में ममता सरकार विफल रही है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाएं प्रशासन की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी उक्त स्थान का दौरा किया तथा इस तरह की शर्मनाक घटनाओं के लिए ममता सरकार को निशाने पर लिया है। महिला आयोग की राष्ट्रीय अध्यक्ष रेखा शर्मा ने यहां तक कह दिया है कि ममता के शासन में इस तरह की घटनाओं को रोकना संभव नहीं है। ममता सरकार इस बड़ी घटना को छिपाने के लिए मामले को रफा-दफा करने में लगी हुई है। ममता ने उल्टे इस घटना के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं भाजपा को जिम्मेदार ठहरा दिया है। प्रदर्शनकारी महिलाओं को आरएसएस का एजेंट बता दिया है। मामले को दूसरी तरफ मोड़ने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आधार कार्ड एवं एनआरसी का मुद्दा उठा दिया है। भाजपा संदेशखाली के मुद्दे पर ममता सरकार को घेरने के लिए पूरी तरह जुट गई है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुवेंदु अधिकारी तथा शंकर घोष ने संदेशखाली पहुंचकर महिलाओं का दुखदर्द सुना तथा इस घटना की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। केंद्र सरकार भी ममता को बख्शने के मूड में नहीं है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने संदेशखाली घटना की जांच के लिए एनआईए को भी अधिकृृत कर दिया है। संदेशखाली की घटना ममता सरकार के लिए लोकसभा चुनाव से पहले खतरे की घंटी है। संदेशखाली की घटना ने ममता सरकार को बैकफुट पर ला दिया है।