परीक्षा के नाम पर घबरा जाना स्वाभाविक है। पर आपका बच्चा परीक्षा नजदीक आते ही तबियत खराब होने की बात करने लगे तो आपको सतर्क होने की जरूरत है। परीक्षा में अपने दोस्तों जैसा या उनसे बेहतर नंबर लाने का दबाव या फिर माता-पिता द्वारा लगातार बनाया जा रहा दबाव बच्चे को मानसिक रूप से परेशान कर देता है। इस वजह से वे कभी सिर दर्द तो कभी पेट दर्द की शिकायत करते हैं। अक्सर माता-पिता बच्चे के इस व्यवहार के पीछे उसकी मानसिक स्थिति को समझने कि बजाय पढ़ाई से मन चुराने का बहाना समझकर, उसे डांट-फटकार लगा देते हैं। कई अभिभावक बच्चे को सजा देने से भी नहीं चूकते। पर, ऐसा करना गलत है। मनो चिकित्सकीय भाषा में इस परेशानी को एंग्जाइटी डिसऑर्डर कहते हैं। हमारे देश में परीक्षा के दौरान लगभग 40 प्रतिशत बच्चों में एंग्जाइटी डिसऑर्डर की समस्या देखने को मिलती है। इसकी वजह से वह बहुत अधिक चिड़चिड़ा व घबराया हुआ रहता है। घबराहट के कारण सब याद करने के बावजूद, परीक्षा के समय उसका दिमाग एकदम खाली हो जाता है, उसे कुछ भी याद नहीं रहता। फेल होने का डर, आत्मविश्वास में कमी आदि सभी समस्याएं एंग्जाइटी डिसऑर्डर के कारण ही होती हंै। वह अपनी समस्या को शब्दों में बयान नहीं कर पाता। कई बार तनाव ज्यादा होने पर घर से स्कूल के लिए निकलने के बावजूद स्कूल नहीं जाता और गलत संगत में फंस जाता है। यही वजह है माता-पिता को बच्चे की समस्या को समझकर, उसे डर से बाहर निकालने में मदद करनी चाहिए। वरना आप कितनी भी पढ़ाई करवाएं वह परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाएगा।
परीक्षा की तैयारी है अहम : यदि बच्चे की परीक्षा की तैयारी सही प्रकार से नहीं हुई है तो दुनिया की किसी भी तकनीक द्वारा उसकी मदद नहीं की जा सकती। इसलिए टाइम मैनेजमेंट बहुत जरूरी है ताकि समय रहते वह अपना पाठ्यक्रम पूरा कर सके और रिवीजन के लिए भी उसके पास पर्याप्त समय रहे। टाइम-टेबल बनाना और उसे अपनाना भी बहुत जरूरी है।
तरीके को समझना जरूरी : परीक्षा की तैयारी के लिए पेपर के तरीके को समझना भी जरूरी है, इसलिए पिछले सालों के प्रश्न पत्रों को इकट्ठा करें और उन्हें परीक्षा से पहले जरूर हल करें। घर पर मॉक टेस्ट लेकर भी परीक्षा की तैयारी में आप बच्चे की मदद कर सकती हैं।
परीक्षा शुरू होने पर : प्रश्न पत्र को पढ़ने की हड़बड़ी न करें। सहजता के साथ उत्तर लिखना शुरू करें। अगर किसी सवाल का जवाब नहीं मालूम है तो उसी पर उलझे रहने की बजाय अगले सवाल को हल करें। जो नहीं आता उसके लिए जगह छोड़ दें और बाद में उस पर ध्यान दें। हर जवाब के बाद कुछ स्थान छोड़ें ताकि अगर बाद में आपको कुछ जोड़ना पड़े तो उसके लिए जगह हो। जो कुछ भी आपने लिखा है उसे एक बार जरूर जांच लें।
परीक्षा से कुछ घंटे पहले : परीक्षा से पहले बच्चे को पौष्टिक नाश्ता दें, जिसमें कार्बोहाइड्रेट पर्याप्त मात्रा में हो लेकिन ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम मात्रा में हो ताकि बच्चे में ऊर्जा का स्तर बना रहे। परीक्षा वाले दिन भी सुबह में बच्चे को हल्का-फुल्का व्यायाम करने के लिए प्रेरित करें। वहीं, बच्चे को सलाह दें कि परीक्षा केंद्र में प्रवेश करने से पहले वह कुछ नहीं पढ़ें। दोस्तों से बातचीत करें, लेकिन पढ़ाई के विषय में कोई बात न करें। बच्चे को समझाएं कि परीक्षा से ठीक पहले, खुद को मानसिक रूप से हल्के-फुल्के मूड में रखना जरूरी है। इसके लिए वह दोस्तों के साथ हंसी मजाक करे।