पूर्वांचल प्रहरी कार्यालय/निज संवाददाता गुवाहाटी/लंका : निकटवर्ती पश्चिम कार्बी आंग्लांग जिले के पीजीआर की जमीन को लेकर एएसडीसी-कार्बी छात्र संस्था और हिंदीभाषियों के बीच बीती रात हुए झड़प के बाद दोनों समुदाय में तनाव व्याप्त है। हालांकि जिला प्रशासन के सख्त निगरानी के कारण स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। सूत्रों के अनुसार एएसडीसी आंचलिक दल और कार्बी छात्र संस्था की ओर से वहां बसे हिंदीभाषियों के खिलाफ बृहस्पतिवार को लंका-शिलांग रोड पर धरने पर बैठकर मुख्य मार्ग को अवरुद्ध कर दिया। शाम को प्रदर्शनकारी खेरनी चाराली ङ्क्षहदीभाषी बहुल इलाके में आकर उन्हें गाली-गलौज करने लगे, जिसके कारण दोनों पक्ष में कहासुनी और उसके बाद धक्का-मुक्की हुई। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार स्थानीय कार्बी समुदाय एवं हिंदी भाषी लोगों के हाल के उत्पन्न विवाद का मूल कारण पीजीआर की भूमि है। सूत्रों का कहना है कि जिले में सक्रिय हिंदीभाषी संगठनों से जुड़े सदस्यों ने कपिली नदी के इस पार का क्षेत्र जो पीजीआर लैंड के नाम से संरक्षित है, उसे खत्म करवाने के लिए राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू से हाल ही में शिलांग में उनसे मुलाकात की थी और एक ज्ञापन सौंपते हुए इस समस्या के स्थायी समाधान करने का आग्रह किया था।
सूत्रों का कहना है कि अगर पीजीआर संरक्षित क्षेत्र हट जाता है तो इस क्षेत्र में वर्षों से बसे तकरीबन 500 सौ से अधिक हिंदीभाषी परिवार को कोई परेशानी नहीं होगी और वे भूमि का अधिकार का प्रबल दावेदार बन जाएंगे। साथ ही जमीन का पट्टा मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। इस मुद्दे की खबर चलते ही एएसडीसी के यूथ फ्रंट और कार्बी छात्र संस्था के कार्यकर्ता खेरनी चाराली में जमा होकर कल से ही धरने पर बैठ थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि धरने के दौरान ही कुछ लोग जानबूझ कर वहां तनाव उत्पन्न किया। सूत्रों के अनुसार दोनों पक्षों में विवाद इतना बढ़ा कि पूरी रात वहां दोनों पक्ष बड़ी संख्या में एक दूसरे के खिलाफ लगे रहे, इसको लेकर आज दूसरे दिन भी काफी संख्या में लोग जमा होकर मार्ग अवरूद्ध कर दिए और हिंदीभाषी लोगों के खिलाफ नारे लगाते हुए विरोध जारी रखा। सूत्रों के अनुसार स्थानीय पुलिस सहित जिला प्रशासन की ओर से धरने पर बैठे लोग बार-बार भरोसा दिलाते रहे कि इस घटना के दोषी को नहीं छोड़ा जाएगा। उल्लेखनीय है कि प्रशासन द्वारा आश्वासन देने के बाद भी नहीं हटने पर वहां से सभी को हटाया गया। समाचार लिखे जाने तक स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। स्थिति अभी भी तनावपूर्ण है, परंतु नियंत्रण में है। स्थानीय लोग इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना से काफी चिंतित हैं।
उल्लेखनीय है कि वर्षों से सत्ता से दूर रहने वाले कुछ राजनीतिक दल के नेता और लोग इस मामले को भड़काने में लगे हुए हंै ताकि वे अपनी राजनीतिक रोटी सेंक सकें और इसके लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है। दूसरी तरफ पुलिस प्रशासन शांति कायम करने में लगी हुई है। उल्लेखनीय है कि पीजीआर विवाद कई दशकों पुराना है और संविधान प्रदत है और इसे खत्म करने की प्रक्रिया काफी पेंचीदा है। इस विवाद के नाम पर दशकों से राजनीतिक दल के नेता अपनी रोटी सेंकते आ रहे हैं। लोग भरोसा कर विभिन्न दलों को वोट तो देते आ रहे हैं, लेकिन विवाद जस का तस है, वहीं दोनों पक्ष के लोगों ने जिला प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि इसमें शामिल दोषियों को गिरफ्तार कर सजा दी जाए, वहीं दूसरी ओर अखिल असम भोजपुरी परिषद, कार्बी आंग्लांग जिला समिति के अध्यक्ष गणेश पासवान ने खेरोनी की घटना की निंदा करते हुए ऐसे कृत्यों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की।