केंद्र सरकार ने वर्ष 2024 में कुल पांच शख्यितों को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया है। इससे पहले वर्ष 1999 में चार विशिष्ट व्यक्तियों को भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। चुनावी वर्ष होने के कारण इसके सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं। सर्वप्रथम समाजवादी आंदोलन के अग्रणी, जननायक एवं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. कर्पूरी ठाकुर को मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया। वे इस सर्वोच्च सम्मान के हकदार भी थे। बिहार तथा देश की राजनीति में उनके अवदानों को भुलाया नहीं जा सकता। नरेन्द्र मोदी सरकार ने स्व. ठाकुर को यह सम्मान देकर बिहार सहित देश के दूसरे राज्यों के अति पिछड़े वर्ग एवं गरीबों में यह संदेश देने का प्रयास किया है कि वे इस वर्ग के प्रति काफी गंभीर हैं। भाजपा ने इसके माध्यम से राष्ट्रीय जनता दल एवं कांग्रेस से अति पिछड़ा वर्ग का मुद्दा झटक लिया है। सरकार ने राम मंदिर आंदोलन के नायक एवं पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृृष्ण आडवाणी को भारत रत्न देकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं भाजपा के एक ऐसे वर्ग को संतुष्ट करने का प्रयास किया है जो रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में आडवाणी को उचित सम्मान नहीं मिलने से नाराज था। अगले लोकसभा चुनाव में इस नाराजगी से भाजपा को नुकसान हो सकता था। आडवाणी को भारत रत्न देने से भाजपा का पुराना खेमा निश्चित रूप से प्रसन्न हुआ है। आडवाणी जैसे भाजपा के संस्थापक नेता को यह सम्मान देना मोदी सरकार के लिए गौरव की बात है। किसानों के मसीहा, जाट नेता एवं पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न का सम्मान देकर मोदी सरकार ने देश के किसानों एवं जाट समुदाय को साधने का प्रयास किया है। पिछले किसान आंदोलन के कारण किसानों के बीच मोदी सरकार की छवि को धक्का लगा था। चरण सिंह को भारत रत्न देकर मोदी सरकार ने देश के किसानों को यह संदेश देने का प्रयास किया है कि उनकी सरकार किसानों के हितों प्रति गंभीर है। चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान एवं दिल्ली के किसानों एवं जाट मतदाताओं के बीच भाजपा की पैठ मजबूत होगी। राष्ट्रीय लोकदल के प्रमुख एवं चरण सिंह के पौत्र जयंत चौधरी के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में आने से भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा की स्थिति मजबूत होगी। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. पीवी नरसिम्हा राव एवं देश में हरित क्रांति के जनक एमएस स्वामीनाथन को भारत रत्न देकर मोदी सरकार ने दक्षिण भारत को भी साधने का प्रयास किया है। मालूम हो कि स्व. पीवी नरसिम्हा राव को कांग्रेस में वो सम्मान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे। गांधी परिवार से उनका छत्तीस का रिश्ता रहा है। नरेन्द्र मोदी सरकार ने पीवी नरसिम्हा राव को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान देकर यह साबित करने का प्रयास किया है कि उनकी सरकार पार्टी के नाम पर भेदभाव नहीं करती है। उनको भारत रत्न देने से आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना राज्य में भाजपा को अगले लोकसभा चुनाव में लाभ मिल सकता है। भाजपा कुछ वर्षों से तेलंगाना एवं आंध्र प्रदेश पर फोकस कर रही है। तेलुगुदेशम पार्टी एवं वाईएसआर कांग्रेस के साथ तालमेल के लिए भाजपा की बातचीत भी चल रही है। तेलुगुदेशम पार्टी के प्रमुख चन्द्रबाबू नायडू के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल होने के कयास लगाये जा रहे हैं। लेकिन समस्या यह है कि चन्द्रबाबू के राजग में आने से वाईएसआर कांग्रेस नाराज हो सकता है। कृृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन ने पुलिस की नौकरी छोड़कर देश में कृृषि क्रांति के लिए अपना जीवन लगा दिया। तमिलनाडु के स्वामीनाथन ने किसानों के लिए बहुत कुछ किया। आज देश अनाज के मामले में जो आत्मनिर्भर बना है उसका श्रेय काफी हद तक स्वामीनाथन को जाता है। मोदी सरकार ने स्वामीनाथन को सर्वोच्च सम्मान देकर किसानों के बीच एक सकारात्मक संदेश देश के साथ-साथ तमिलनाडु की जनता को भी यह बताने का प्रयास किया है कि उनकी सरकार क्षेत्र के आधार पर भेदभाव नहीं करती। उपरोक्त पांच विशिष्ट व्यक्तियों को भारत रत्न देकर सरकार ने अगले लोकसभा चुनाव में अपने विजय अभियान का रास्ता और आसान कर दिया है।