मनुष्यों ने हमेशा आकाश की ओर देखा है, तारों का उपयोग नौवहन में मार्गदर्शक के रूप में या आध्यात्मिक कहानी कहने के लिए किया है। प्रत्येक मानव सभ्यता ने समय को मापने और अर्थ खोजने के लिए सितारों का सहारा लिया है और आकाशीय गतिविधियों का उपयोग किया है। तकनीकी प्रगति के साथ ज्ञान की इस अतृप्त प्यास ने हमारे लिए अंतरिक्ष में यात्रा करने का सपना देखना संभव बना दिया है। द्वितीय विश्वयुद्ध, औद्योगिक क्रांति, शीतयुद्ध और पृथ्वी के संसाधनों के बड़े पैमाने पर दोहन के बाद ये सपने और अधिक वास्तविक हो गए। अंतरिक्ष यात्रा के सपने सोवियत संघ द्वारा स्पूतनिक-1 के प्रक्षेपण के साथ छोटे पैमाने पर शुरू हुए और 1969 में अमरीकी अपोलो के चंद्रमा पर उतरने के साथ आगे बढ़े।
छह दशक बाद अंतरिक्ष पर्यटन, चंद्रमा और मंगल ग्रह पर मिशन तथा चंद्रमा पर खनन की योजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। चंद्रमा पर मूल्यवान संसाधनों का पता लगाने वाले और निवेशकों को आवश्यक अन्वेषण एवं खनन कार्यों का संचालन करने में मदद करने वाले निजी कारोबार 'लूनर रिसोर्सेज रजिस्ट्री' ने कहा कि अंतरिक्ष की दौड़ अंतरिक्ष औद्योगीकरण के रूप में विकसित हो रही है। नासा के अनुसार, चंद्रमा पर सैकड़ों अरबों डॉलर के संसाधन मौजूद हैं जिनमें पानी, हीलियम-3 और इलेक्ट्रॉनिक्स में इस्तेमाल होने वाली दुर्लभ पृथ्वी धातुएं शामिल हैं। 'एंथ्रोपोसीन' की शुरुआत पृथ्वी पर पर्यावरणीय स्थिरता के विभिन्न पहलुओं पर शोध करने वाले शिक्षाविदों का समूह इस तरह की गतिविधियों और संसाधनों के दोहन से चंद्रमा एवं अंतरिक्ष पर्यावरण पर पड़ने वाले इसके प्रभावों को लेकर चिंतित है। अंतरराष्ट्रीय भूवैज्ञानिक समुदाय नए युग 'एंथ्रोपोसीन' का आह्वान करता है, जो दर्शाता है कि द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति के बाद से मानव गतिविधियों ने धरती को किस हद तक बदल दिया है।
वर्तमान भूवैज्ञानिक युग 'एंथ्रोपोसीन' को उस अवधि के रूप में देखा जाता है जब मानव गतिविधियों के कारण जलवायु और पर्यावरण पर प्रमुख प्रभाव पड़ रहा है। स्ट्रैटिग्राफर्स - चट्टान और तलछट की परतों का अध्ययन करने वाले भूविज्ञानी को 'स्ट्रैटिग्राफर्स' कहा जाता है। उनके शोध के अनुसार, एंथ्रोपोसीन की शुरुआत की पहचान 1950 के दशक के आरंभ और परमाणु परीक्षण के परिणामों के रूप में की गई है। अंतरिक्ष में व्यापक विनाश को रोकने के लिए चंद्रमा पर चंद्र एंथ्रोपोसीन को जोडऩा प्रभावी हो सकता है। धरती को नुकसान इस नए मानव युग में स्ट्रेटिग्राफर्स के साथ-साथ अन्य विषयों के अनुसंधानकर्ताओं के बीच तीखी बहस जारी है।