मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू लगातार भारत विरोधी बयान के कारण विवादों में फंसे हुए हैं। मुइज्जू को चीन समर्थक तथा भारत विरोधी नेता के रूप में जाना जाता है। भारत और मालदीव के संबंध सदियों से घनिष्ठ रहे हैं, लेकिन मुइज्जू के सत्ता में आने के बाद परिस्थिति बदल गई है। इंडिया आउट का नारा देकर सत्ता में आए मुइज्जू ने मालदीव में तैनात भारतीय सैनिकों की वापसी की मांग कर दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लक्षद्वीप के दौरे को लेकर मालदीव के तीन मंत्रियों द्वारा आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद संबंधों में और खटास आ गई। हालांकि मालदीव के राष्ट्रपति ने तीनों मंत्रियों पर कार्रवाई की, किंतु मुइज्जू के चीन समर्थक रवैये ने दोनों देशों के संबंधों को पटरी से उतार दिया है।

भारत द्वारा मालदीव जाने वाले पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट होने तथा मालदीव को रियायती दर पर आपूर्ति होने वाले खाद्य सामग्री बाधित होने से वहां की जनता एवं विपक्षी पार्टी के नेताओं ने मुइज्जू सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मालदीव की संसद में जिस तरह धक्का-मुक्की एवं मारपीट की घटना सामने आई वह दर्शाता है कि छोटे से इस देश में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। मालदीव की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) और डेमोक्रेट ने मुइज्जू सरकार से भारत से माफी मांगने की मांग कर दी है। ऐसी खबर है कि विपक्षी पार्टी एमडीपी तथा दूसरी विपक्षी पार्टियां राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग लगाने की प्रक्रिया शुरू की है। महाभियोग प्रस्ताव के लिए 23 सांसदों का समर्थन चाहिए तथा प्रस्ताव पारित करने के लिए 56 सांसदों की जरुरत होगी।

विपक्षी गठबंधन के पास 56 सांसद मौजूद हैं, जबकि सत्ता पक्ष के पास केवल 15 सांसद हैं। मालदीव की संसद में सांसदों की कुल संख्या 87 है। महाभियोग को पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरुरत पड़ती है। मालूम हो कि मालदीव में भारत के कुल 88 सैन्यकर्मी तैनात हैं, जो दो विमानों एवं एक हेलिकॉप्टर की सेवा से जुड़े हुए हैं। इन विमानों एवं हेलिकॉप्टर को भारत सरकार ने मालदीव को उपहार के रूप में दिया है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार मालदीव ने भारत से 10 मई तक वहां तैनात सभी सैन्यकर्मियों को मालदीव छोड़ने निर्देश दिया है। सबसे बड़ी बात यह है कि अपने खाद्य सामग्री एवं आवश्यक वस्तुओं के लिए मालदीव भारत पर निर्भर है।

भारत हमेशा संकट के समय मालदीव को मदद करता आया है। चीन मालदीव को कर्ज के जाल में फंसाकर अपना नौसैनिक अड्डा बनाना चाहता है ताकि वह भारत की सैन्य तैयारियों पर नजर रख सके। ड्रैगन पहले ही भारी-भरकम कर्ज देकर मालदीव के कई द्वीपों को हड़प चुका है। भारत वहां की स्थिति पर काफी नजदीकी से नजर रखे हुए है। पर्यटन के क्षेत्र में हो रहे नुकसान से वहां की अर्थ-व्यवस्था काफी प्रभावित होगी। अगर मुइज्जू ने वर्तमान परिस्थितियों से सबक नहीं सीखा तो भविष्य में वहां की स्थिति बद से बदतर हो जाएगी।