बिहार के जमुई में 17 से 19 फरवरी के बीच जमुई नागी बर्ड फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है। जिसको लेकर पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा पटना जू से पक्षी आश्रयणी जमुई के लिए कार रैली को हरी झंडी दिखाकर आज रवाना किया गया। कार रैली के जरिए आम लोगो को प्रवासी पक्षियों के संरक्षण के बारे में अवेयर किया जाएगा। लोगो को बताया जाएगा कि 2 महीने प्रवासी पक्षी बिहार आते है। ये टूरिज्म पोटेंशियल भी है और बायोडायवर्सिटी के लिए जरूरी भी है। विभाग की सचिव बंदना प्रेयसी ने बताया कि जमुई में अभी करीब 30 हजार पक्षी आए हुए है और ये अपने आप में बहुत अद्भुत है। उम्मीद है की लोग पक्षियों को देखने जाएंगे, वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर भी पहुंचेंगे।

इसके अलावा 5 से 7 फरवरी को पटना जू में दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय परिप्रेक्ष्य में भारत में पक्षी संरक्षण पर पहल और विशेष रूप से जंगली पक्षियों के अवैध शिकार व व्यापार पर केंद्रित प्रबंधन विषयों और चिंताओं पर एक अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। विभाग की सचिव बंदना प्रेयसी ने बताया कि मंगोलिया, साइबेरिया, कजाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल, म्यांमार, सिंगापुर भूटान और बांग्लादेश जैसे अलग-अलग देशों से हर साल ठंड के समय प्रवासी पक्षी बिहार में आते हैं। इसलिए हम लोगों को अवेयर करना चाहते हैं कि हमारे पास इतने मेहमान आते हैं।

सबसे ज्यादा पक्षी जमुई में आते हैं। इसके अलावा भागलपुर, कटिहार, बांका और बेगूसराय में आते है। इसलिए ये इको टूरिज्म का पोटेंशियल है और सीरियस रिसर्चर, फोटोग्राफी के लिए भी बड़ा अपॉर्च्युनिटी आता है। वर्कशॉप का मतलब है कि प्रवासी पक्षियों के जो रूट है। उस रूट में जो देश आते है वहां के रिप्रेजेंटेटिव पटना आएंगे और एक सीरियस चर्चा होगा, 2 कंट्री ऑनलाइन जुड़ेंगे और 7 कंट्री के 14 रिप्रेजेंटेटिव आएंगे। कार्यक्रम का आयोजन BNHS (बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी) के मदद से किया गया है। BNHS प्रवासी पक्षियों को संरक्षण को लेकर एक शोध भी कर रहा है। BNHS  के डिप्टी डायरेक्टर डॉ सतीश ने बताया कि हम लोगों को रीजनल लेवल कॉरपोरेशन चाहिए, वर्कशॉप का उद्देश्य है कि 10 कंट्री से लोग आएंगे। उन लोगों के साथ बात कर के क्या एक्शन लेना चाहिए, सभी चीजों पर चर्चा होगी।