फिलहाल बांग्लादेश कूटनीति में सबको मात दे रहा है। वह दूसरे देशों से अपने संबंध को बढ़ाने में  पहले अपना फायदा ढूढ़ता है,उसके बाद वह रिश्ते को आगे बढ़ाता है। फिलहाल भारत और चीन दोनों उसके साथ प्रगाढ़ दोस्ती करना चाहते हैं, परंतु बांग्लादेश इस मामले में बैलेंस पॉलिसी निभा रहा है, वह अपनी बातों से भारत- बांग्लादेश दोनों को रिझा रहा है, परंतु काम वहीं कर रहा है, जहां सिर्फ उसके फायदे हैं, जबकि नेपाल और पाकिस्तान  में अपनी जड़ें जमाने के बाद बांग्लादेश में बैठकर  भारत को घेरने की कोशिश कर रहा है, जो निहायत चिंता का विषय है। सनद रहे कि बांग्लादेश में शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग लगातार चौथी बार चुनाव जीती तो पश्चिमी देशों ने देश में लोकतांत्रिक मूल्यों पर खतरे की दुहाई दी, जबकि भारत और चीन ने शेख हसीना को प्रधानमंत्री बनने पर तुरंत बधाई दी। एशिया की ये दोनों ताकतें दूसरे छोटे देशों को साथ मिलाकर अपना प्रभाव क्षेत्र बढ़ाने में लगी हैं। दूसरी ओर बांग्लादेश अपने हितों का ध्यान रखकर भारत और चीन के साथ संभलकर चल रहा है। बांग्लादेश चीन और भारत के साथ अपने संबंधों के जरिए दो ताकतों के बीच प्रतियोगिता का सफलतापूर्वक फायदा उठा रहा है। वैसे भी बांग्लादेश के बीजिंग के साथ आर्थिक और सामरिक संबंध पिछले कुछ सालों में बहुत ज्यादा बढ़े हैं।  इसी कड़ी में चीन बांग्लादेश के पहले पनडुब्बी बेस के लिए फंड दे रहा है। संतुलन कायम करने में यह बांग्लादेश की सफलता की एक और झलक है। पिछले साल बांग्लादेश ने 1.2 अरब डॉलर की लागत वाले एक सबमरीन बेस का उद्घाटन किया। यह चीन की मदद से बनाया जा रहा है, जिस पर भारत में चिंताएं जगीं कि चीनी पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) भारत के प्रभाव क्षेत्र में घुसने की कोशिश में है। अमरीकी रक्षा विभाग की 2023 में आई एक रिपोर्ट ने भी यह चेतावनी दी कि चीन पीएलए के लिए लॉजिस्टिक सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए बांग्लादेश की ओर देख रहा है। चीनी विदेश मंत्रालय के मुताबिक बांग्लादेश में चीन का निवेश अब डेढ़ अरब डॉलर से ज्यादा का है।  बुनियादी ढांचे के जरिए प्रभुत्व बढ़ाने के चीनी प्रयासों के तहत शुरू हुई बेल्ट एंड रोड योजना में भी बांग्लादेश साल 2016 से ही भागीदार है। चीन ने भारत और बांग्लादेश के बीच बहने वाली तीस्ता नदी पर एक परियोजना प्रस्तावित की है, जिससे दोनों देशों के संबंधों में तनाव पैदा हो सकता है। बांग्लादेश की सरकार चीन के प्रस्ताव पर विचार कर रही है, इसमें तीस्ता नदी के कुछ हिस्सों में ड्रेजिंग यानी तलछट की सफाई और तटबंध बनाने की बात है। तीस्ता रिवर कॉम्पि्रहेंसिव मैनेजमेंट एंड रेस्टोरेशन प्रोजेक्ट कहलाने वाली इस परियोजना का बजट करीब 1 अरब डॉलर बताया जा रहा है। चीन का यह प्रस्ताव भारत और बांग्लादेश के बीच तमाम बातचीत के बावजूद पानी के बंटवारे पर कोई संधि नहीं कर पाने के बाद आया। साल 2011 में एक संभावित समझौता नहीं हो पाया था क्योंकि पश्चिम बंगाल इसके खिलाफ था। उल्लेखनीय है कि भारत का सिलीगुड़ी इलाका, जिसे चिकेंस नेक कहा जाता है इस प्रस्तावित परियोजना के काफी नजदीक है। भू राजनैतिक दृष्टि से 20-22 किलोमीटर में फैला यह इलाका काफी संवेदनशील है। यह भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को बाकी देश से जोड़ता है। भारत को डर है कि चीन इस विकास योजना की आड़ में भारतीय जमीन के नजदीक अपनी मौजूदगी स्थापित करना चाहता है। सात जनवरी को हुए बांग्लादेश के राष्ट्रीय चुनावों की पश्चिमी देशों ने आलोचना की। इन चुनावों में देश की विपक्षी पार्टी बांग्लादेश नैशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने हिस्सा नहीं लिया। इसके कारण बांग्लादेश में लोकतंत्र की स्थिति पर सवाल उठाए गए। शेख हसीना की जीत की घोषणा के बाद अमरीका ने कहा कि वह बांग्लादेश के चुनावों को आजाद और निष्पक्ष नहीं मानेगा। 9 जनवरी को शेख हसीना ने आवामी लीग पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए विपक्षी दल बीएनपी पर आरोप लगाया कि वह अपने  विदेशी मालिकों के लिए काम कर रही है। 2026 में बांग्लादेश और संयुक्त राष्ट्र के सबसे कम विकसित देशों की सूची (एलडीसी) से बाहर होने वाला है। इस बदलाव के बाद यूरोपीय बाजार में ड्यूटी और कोटा फ्री निर्यात की सुविधाएं उठाने के लिए उसके पास महज तीन साल का वक्त होगा।  बांग्लादेश, पश्चिमी देशों से मिलने वाले आर्थिक फायदे जारी रखने के लिए दूसरे विकल्पों का इस्तेमाल कर सकता है।