नरेन्द्र मोदी सरकार का अंतिम बजट सत्र 31 जनवरी से शुरू हुआ है। 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अंतरिम बजट पेश करेंगी। देश के लोगों को उम्मीद है कि चुनावी वर्ष होने के कारण सरकार द्वारा लोक-लुभावन घोषणाएं हो सकती हैं। बजट सत्र में भी राम मंदिर का मुद्दा छाया रहा। संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करती हुई राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विकसित भारत 'एक भारत, शेष भारत' का एहसास कराया। अपने 74 मिनट के भाषण में श्रीमती मुर्मू ने चन्द्रयान-3, नारी शक्ति वंदन कानून, अयोध्या के राम मंदिर तथा तमाम सरकारी योजनाओं का जिक्र किया। राष्ट्रपति ने कहा कि सदियों से रामलला के लिए राम मंदिर के निर्माण की आकांक्षा पूरे देश के रामभक्तों में थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कर-कमलों से राम मंदिर का निर्माण हुआ एवं रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा का भी कार्यक्रम पूरा हुआ। मालूम हो कि पिछले 22 जनवरी को अयोध्या में रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह का आयोजन हुआ जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मुख्य यजमान थे।

इस समारोह में देश-विदेश के आठ हजार से ज्यादा मेहमानों ने शिरकत की थी। केंद्र सरकार पर्यटन के विकास के लिए योजनाएं लाकर रोजगार सृजन करने के लिए वर्तमान बजट सत्र में पहल कर सकती है। उत्तर प्रदेश में भी एक सप्ताह बाद बजट सत्र शुरू होने वाला है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राम केंद्रित पर्यटन को विकसित करने के लिए योजनाएं ला सकते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने पहले ही राम वन गमन पथ को उन्नत करने के लिए पहल शुरू कर दी है। आज संसद में भी राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान जय श्रीराम के नारे लगे। संसद में सदस्यों ने एक-दूसरे को राम-राम कहकर संबोधित किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी मीडिया से रू-ब-रू होने के दौरान राम-राम कहकर  अभिवादन किया। राष्ट्रपति द्वारा जैसे ही रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा का जिक्र किया गया उस वक्त संसद सदस्यों ने मेज थपथपाकर स्वागत किया। भारतीय जनता पार्टी राम मंदिर की लहर को किसी भी कीमत पर छोडऩा नहीं चाहती है।

आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा देश के विभिन्न भागों से रामभक्तों को रामलला का दर्शन करवाने के लिए कदम उठा रही है। भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री फरवरी महीने में क्रमवार तरीके से अपनी पूरी कैबिनेट के साथ रामलला के दर्शन के लिए जाने वाले हैं। राम मंदिर बनाने का मुद्दा हमेशा से एजेंडे में शामिल रहा है। अब भाजपा इस वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा को अपनी कामयाबी के रूप में पेश करेगी। प्रधानमंत्री ने रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा से पहले दक्षिण भारत के उन सभी मंदिरों में माथा टेका जहां किसी न किसी रूप में प्रभु श्रीराम का नाता जुड़ा हुआ था। प्रधानमंत्री की इस पहल से उत्तर भारत के साथ-साथ दक्षिण भारत में भी राममय वातावरण हो गया है।

कुछ विपक्षी पार्टी के नेताओं ने अपने वोट बैंक के खिसकने के डर से प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में यह कहकर हिस्सा नहीं लिया कि यह कार्यक्रम भाजपा का है। विपक्ष की इस पहल का भाजपा ने फायदा उठाते हुए इस महत्वपूर्ण मुद्दे को हाईजैक कर लिया है जिसका लाभ पार्टी को आगामी लोकसभा चुनाव में मिलेगा। भाजपा ने प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में मुस्लिम समाज के कुछ विशिष्ट व्यक्तियों को आमंत्रित कर यह दर्शाने का प्रयास किया है कि मुस्लिम समाज भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ है। अन्य मुद्दों के साथ-साथ राम मंदिर का मुद्दा भी भाजपा के लिए चुनाव जिताऊ साबित होगा।