नई दिल्ली : संसद का बजट सत्र मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करने के साथ शुरू होगा। वर्तमान लोकसभा का यह आखिरी सत्र है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अप्रैल-मई में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले एक फरवरी को अंतरिम बजट पेश करेंगी। नई सरकार कार्यभार संभालने के बाद पूर्ण बजट पेश करेगी। संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने विभिन्न दलों के नेताओं की बैठक में कहा कि सीतारमण जम्मू-कश्मीर के लिए भी बजट पेश करेंगी, जहां राष्ट्रपति शासन है। जोशी ने कहा कि 17वीं लोकसभा के 9 फरवरी को समाप्त होने वाले इस संक्षिप्त सत्र का मुख्य एजेंडा राष्ट्रपति का अभिभाषण, अंतरिम बजट की प्रस्तुति और राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा तथा इसका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जवाब दिया जाना है। वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई में हुई सर्वदलीय बैठक के दौरान विपक्षी नेताओं ने कई मुद्दे उठाए। जबकि सरकार ने विभिन्न दलों के नेताओं से कहा कि वह 31 जनवरी से आरंभ हो रहे संसद के बजट सत्र में हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। बजट सत्र के मद्देनजर सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी, जिसमें विभिन्न दलों के नेता शामिल हुए। बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि बैठक में बातचीत बहुत सौहार्द्रपूर्ण रही और सरकार इस छोटे सत्र के दौरान हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। लोकसभा चुनाव से पहले यह आखिरी सत्र है। रक्षा मंत्री और लोकसभा में सदन के उपनेता राजनाथ सिंह, संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी और संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बैठक में सरकार का प्रतिनिधित्व किया। संसद भवन परिसर में हुई इस बैठक में उपस्थित नेताओं में कांग्रेस के नेता कोडिकुनिल सुरेश, तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंदोपाध्याय, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के नेता टी आर बालू, शिवसेना के राहुल शेवाले, समाजवादी पार्टी के नेता एस टी हसन, जनता दल (यूनाइटेड) के नेता राम नाथ ठाकुर और तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) के जयदेव गल्ला शामिल थे। बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के. सुरेश ने कहा कि पार्टी सत्र के दौरान बेरोजगारी, महंगाई, कृषि संकट और जातीय हिंसा प्रभावित मणिपुर की स्थिति का मुद्दा उठाएगी। तृणमूल कांग्रेस नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि वित्त मंत्री को अंतरिम बजट में विभिन्न केंद्रीय योजनाओं के तहत पश्चिम बंगाल के बकाये को भी शामिल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक मुख्यमंत्री को राज्य को केंद्रीय बकाया के समय पर आवंटन की मांग के लिए धरने पर बैठना पड़ा। समाजवादी पार्टी के नेता एसटी हसन ने पूजा स्थल अधिनियम को मजबूत करने के लिए कदम उठाने की मांग की। यह अधिनियम धार्मिक स्थलों के 15 अगस्त 1947 की यथास्थिति के अनुरूप उनके धार्मिक स्वरूप को बनाये रखने और उनके रूपांतरण को प्रतिबंधित करता है। हसन की यह मांग वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद को हिंदू समुदाय को सौंपने की मांग के मद्देनजर आई है। बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि बैठक में बातचीत बहुत सौहार्र्द्रपूर्ण रही और सरकार इस छोटे सत्र के दौरान हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। जोशी ने कहा कि सरकार के पास बजट सत्र के लिए कोई विधायी एजेंडा नहीं है और इसका मुख्य जोर राष्ट्रपति के अभिभाषण, धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा, अंतरिम बजट की प्रस्तुति और जम्मू-कश्मीर के बजट पर होगा। जोशी ने कहा कि उन्होंने सुझाव दिए हैं, लेकिन चूंकि यह वर्तमान लोकसभा का आखिरी सत्र है। हमने कहा है, हम उन्हें अगले सत्र में मौका देंगे। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का बैठक में प्रतिनिधित्व करने वाले कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि उन्होंने असम में राहुल गांधी के नेतृत्व वाली ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ पर हिंसक हमले और उस पर राज्य सरकार द्वारा लगाई गई पाबंदियों का मुद्दा उठाया। उच्च सदन में कांग्रेस के उप नेता तिवारी ने संवाददाताओं से कहा कि देश में ‘अघोषित तानाशाही’ कायम है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद जैसे विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए सीबीआई और ईडी का दुरुपयोग कर रही है। तिवारी ने कहा कि उन्होंने विपक्षी दलों से विचार-विमर्श के बाद ये मुद्दे उठाए हैं। प्रत्येक सत्र से पहले एक सर्वदलीय बैठक बुलाने की प्रथा है । बैठक में विभिन्न दलों के नेता उन मुद्दों को उजागर करते हैं जिन्हें वे संसद में उठाना चाहते हैं। सरकार उन्हें अपने एजेंडे की एक झलक बताती है और उनका सहयोग मांगती है।
विपक्ष के 14 सदस्यों का निलंबन रद्द, बजट सत्र में ले सकेंगे भाग
नई दिल्ली : विपक्ष के 14 निलंबित सांसदों का निलंबन रद्द कर दिया गया है और अब वे बुधवार से आरंभ हो रहे बजट सत्र में भाग ले सकेंगे। सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। इन्हें शीतकालीन सत्र के दौरान निलंबित करने के साथ ही उनके मामले को विशेषाधिकार समितियों के पास भेज दिया गया था। जिन विपक्षी सांसदों का निलंबन रद्द हुआ है उनमें 11 राज्यसभा और तीन लोकसभा के हैं। राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने 11 विपक्षी सदस्यों के निलंबन रद्द करने का फैसला किया, हालांकि सदन की विशेषाधिकार समिति ने इन्हें विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना का दोषी ठहराया था। राज्यसभा के जिन सदस्यों का निलंबन रद्द हुआ है उनमें जेबी मैथर हिशाम, एल हनुमंतैया, नीरज डांगी, राजमणि पटेल, कुमार केतकर, जी सी चंद्रशेखर, विनय विश्वम, संतोष कुमार पी, एम मोहम्मद अब्दुल्ला, जॉन ब्रिटास और ए ए रहीम शामिल हैं। सूत्रों का कहना है कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी तीन सदस्यों अब्दुल खालिक, के. जयकुमार और विजय वसंत का निलंबन रद्द किया। ये तीनों कांग्रेस के सदस्य हैं। संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मंगलवार को कहा था कि इन सांसदों के संदर्भ में सरकार के आग्रह पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने सहमति जताई है। दोनों सदनों में कुल 146 विपक्षी सांसदों का निलंबन हुआ था। इनमें से 100 लोकसभा सदस्य और 46 राज्यसभा सदस्य शामिल थे।