बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक बार फिर पाला बदलने से इंडिया गठबंधन को करारा झटका लगा है। इस गठबंधन के सूत्रधार नीतीश कुमार ने ही राष्ट्रीय जनता दल से नाता तोड़कर भाजपा के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से नाता जोड़ लिया है। नीतीश की इस पहल से बिहार में इंडिया गठबंधन का सोशल इंजीनियङ्क्षरग गड़बड़ा गया है। राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस अपने एमवाई समीकरण के तहत मुस्लिम एवं यादव मतदाताओं पर अपना अधिकार मानती है। बिहार में मुस्लिम और यादव मतदाताओं की जनसंख्या का कुल औसत 32 प्रतिशत है। बाकी के वोटरों पर राजग की अच्छी पकड़ है। अब राजग बिहार में सभी 40 सीटों पर विजय हासिल करने के लिए रणनीति बनाकर आगे बढ़ेगा। रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह तथा अति पिछड़े समाज से आने वाले समाजवादी नेता एवं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने के फैसले के बाद बिहार सहित अन्य राज्यों में भाजपा का वोट प्रतिशत बढ़ गया है। बिहार के जातिगत सर्वे के जवाब में इसे देखा जा रहा है। आश्चर्य की बात यह है कि जातिगत सर्वे कराने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पाला बदल कर राजग खेमे में शामिल हो गए हैं। इंडिया गठबंधन को दूसरा झटका पश्चिम बंगाल में लगा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बंगाल में अकेले लोकसभा चुनाव लडऩे का ऐलान कर दिया है। पहले ममता कांग्रेस को केवल दो सीट छोडऩे का ऑफर दे रही थी, ङ्क्षकतु कांग्रेस द्वारा गंभीर पहल नहीं करने एवं स्थानीय नेताओं द्वारा की जा रही टीका-टिप्पणी के बाद ममता ने अकेला चलने का रास्ता अपनाया है। उस समय अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई जब ममता सरकार ने राहुल गांधी के भारत जोड़ो न्याय यात्रा को सिलीगुड़ी शहर में प्रवेश करने से रोक दिया। इस बारे में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े को सार्वजनिक रूप से बयान देना पड़ा। यह टकराव दर्शाता है कि कांग्रेस तथा टीएमसी के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। ममता किसी भी कीमत पर वामपंथी पाॢटयों के लिए कोई सीट छोडऩा नहीं चाहती जबकि कांग्रेस वामपंथी दलों को गठबंधन में शामिल रखना चाहती है। आम आदमी पार्टी (आप) ने भी पंजाब में सभी 13 लोकसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसकी घोषणा करते हुए कहा है कि आम आदमी पार्टी पंजाब में अपने दम पर चुनाव लड़ेगी। दिल्ली में भी इसी तरह की स्थिति बनी हुई है। यहां भी आप दिल्ली की सभी सात लोकसभा सीटों पर चुनाव लडऩे का मन बना रही है। अगर यही स्थिति रही तो कांग्रेस के लिए आगे की स्थिति मुश्किल होगी। उत्तर प्रदेश में भी समाजवादी पार्टी ने राष्ट्रीय लोकदल के साथ कांग्रेस से सलाह लिये बिना चुनावी तालमेल कर लिया है। अखिलेश यादव ने राष्ट्रीय लोकदल को 13 सीट देने की घोषणा की है। नीतीश से मिली झटके के बाद अखिलेश ने एकतरफा फैसला लेते हुए कांग्रेस के लिए 11 सीट छोडऩे की घोषणा की है। प्रश्न यह उठता है कि जिन 11 सीटों को छोड़ा गया है वे सीटें कांग्रेस के लिए कितना जिताऊ है यह कांग्रेस ही जानें? महाराष्ट्र में भी कांग्रेस के लिए आगे का रास्ता आसान नहीं है क्योंकि शिवसेना (उद्धव) अपने को बड़ा भाई मानते हुए ज्यादा सीट पर चुनाव लडऩे की मांग कर रही है। एनसीपी भी मांग करने में पीछे नहीं है। ऐसी स्थिति में कांग्रेस के लिए यहां भी विकट स्थिति है। कांग्रेस हर हाल में बड़ी पार्टी होने के कारण ज्यादा सीटों पर चुनाव लडऩा चाहती है। अगर यही स्थिति रही तो इंडिया गठबंधन मोदी के रथ को रोकने में शायद ही कामयाब हो पाए।
इंडिया गठबंधन को झटका
