पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : एनएससीएन, जीपीआरएन और यूनाइटेड लिबरेशन फोर्सेज, असम (आई) ने एक संयुक्त बयान द्वारा 26 जनवरी को कथित औपनिवेशिक भारत में 75वां फर्जी लोकतंत्र दिवस मनाए जाने का विरोध किया। संयुक्त बयान में कहा गया है कि यह सर्वविदित है कि यांदाबू की संधि द्वारा असम पर अधिकार जमाने के बाद दिल्ली ने तथाकथित आजादी के बाद फैलाया गया विश्वासघात के जाल को आज की तारीख में ज्यादा आक्रामक और मजबूत बनाई है। औपनिवेशिक भारत राष्ट्र ने पूर्वोत्तर के मूल निवासियों की स्वतंत्रता की सुरक्षा के मूल तत्व का उल्लंघन करते हुए राजनीतिक साजिश के तहत 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू किया गया।
फर्जी गणतंत्र दिवस मनाकर कब्जे वाले राष्ट्र के संविधान को मान्यता देकर ऐतिहासिक रूप से गौरवशाली और प्रसिद्ध राष्ट्र और जातीय समूह हमेशा के लिए अधीनता से मुक्त नहीं हो सकते। पिछले तैंतालीस वर्षों में तथाकथित स्वतंत्र भारत में असम के 15,000 युवाओं के साथ-साथ और नागालैंड, मिजोरम, मणिपुर, त्रिपुरा और मेघालय के हजारों युवाओं ने अपने जीवन का बलिदान दिया है। दूसरी ओर युद्धोन्माद भारत अपने हितों की पूर्ति के लिए इस प्रांत के स्वतंत्रता चाहने वाले लोगों पर विभिन्न तरीकों से अत्याचार करता रहता है। अत: यह शापित दिन असम और नागालैंड सहित स्वतंत्र राष्ट्रीय संस्थाओं के वंचना के इतिहास से जुड़ा है।
मूल निवासियों के वैध राजनीतिक अधिकारों का उल्लंघन करके केवल चुनावी जीत से सच्चा लोकतंत्र स्थापित नहीं किया जा सकता। यह लोकतंत्र के टूटे ढोल बजाकर सच्ची तस्वीर छिपाने की कवायद मात्र है। इसलिए हम औपनिवेशिक भारत में हर साल फर्जी लोकतंत्र दिवस मनाए जाने का विरोध करते रहे हैं। इस बार भी हम सभी राजनीतिक, गैर-राजनीतिक, राष्ट्रीय दलों और संगठनों और असम और नागालैंड के स्वतंत्रता सेनानी लोगों से कथित दुश्मन राष्ट्र तंत्र के सभी निर्धारित कार्यक्रमों का सभी सरकारी एवं निजी कार्यालयों, सार्वजनिक स्थानों एवं निजी स्तर पर भी बहिष्कार करने का आह्वान कर रहे हैं। फर्जी लोकतंत्र दिवस के बहिष्कार तथा विरोध प्रदर्शन के लिए 26 जनवरी को 01:00 बजे से 18:00 बजे तक पूर्ण बंद रहेगा।