अयोध्या में श्री रामलला के नवीन विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुआ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र इस पावन पल के साक्षी बने, क्योंकि उन्हीं के कर-कमलों से यह कार्य संपन्न हुआ। प्रधानमंत्री ने इस कार्यक्रम के लिए 11 दिन का उपवास रखा था। प्राण-प्रतिष्ठा के दौरान मधुमंगल ध्वनि के लिए देश के 50 वाद्य यंत्रों का इस्तेमाल किया गया। रामलला की अलौकिक मूर्ति में भगवान विष्णु के दस अवतारों को दिखाया गया है। मूर्ति के नीचे पवन पुत्र हनुमान एवं पक्षीराज गरुड़ भी परिलक्षित हो रहे हैं। प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न होने पर हेलिकॉप्टर से नवनिर्मित राम मंदिर पर पुष्प वर्षा की गई। श्री रामलला के मंदिर बनाने के दौरान देश के सभी भागों की वस्तुओं का इस्तेमाल किया गया। सोमवार को अयोध्या पूरी तरह श्री राममय हो गया, क्योंकि देश-विदेश के 8 हजार से ज्यादा विशिष्ट व्यक्तियों ने इस समारोह में भाग लिया तथा रामलला के दर्शन किये। पूरे धार्मिक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत तथा उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रधानमंत्री के साथ रहे।
देश के विभिन्न भागों से 15 यजमानों का चयन किया गया था। श्री रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर पूरे देश में दिवाली जैसा माहौल रहा। देश के मंदिरों में 21 जनवरी से ही पूजा-पाठ, संकीर्तन एवं अष्टयाम चलता रहा। 22 जनवरी की शाम लोगों ने अपने-अपने घरों एवं मंदिरों में दीपक जलाकर दिवाली मनाई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी लोगों से अपने-अपने घरों में दीपक जलाने की अपील की थी। देश के करीब 50 हजार जगहों पर सुंदरकांड का पाठ आयोजित किये गए, जबकि 30 हजार जगहों पर भंडारे हुए। केवल देश में ही नहीं, बल्कि दुनिया के 160 देशों में भी धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। 31 वर्ष तक टेंट में रहने के बाद श्री रामलला को अपना स्थायी मंदिर मिला जो देश के लिए गौरव की बात है। श्री राम मंदिर की सजावट एवं फूलों से किया गया भव्य शृंगार देखते ही बनता है। देश के हर क्षेत्र के लोग वहां पहुंच कर अपने को भाग्यशाली महसूस कर रहे थे। अयोध्या आज पूरी तरह भक्तिरस में सराबोर नजर आ रहा था। हालांकि विपक्षी पार्टियों के कुछ नेता इस समारोह में शामिल नहीं हुए। प्रभु श्री राम के नाम पर राजनीति करना सही नहीं है, क्योंकि श्री राम देश की संस्कृृति के प्रतीक एवं सबके आराध्य हैं।
उनके द्वारा किये गए आचरण से सबको सीख लेने की जरुरत है। कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने अपने सिद्धांत के साथ कोई समझौता नहीं किया। उनके सिद्धांत में निराशा के लिए कोई जगह नहीं थी। सबसे बड़ी बात यह है कि गूगल में भी आज सबसे ज्यादा श्री रामलला को सर्च किया जा रहा था। प्रधानमंत्री ने इस कार्यक्रम को देश के सनातन धर्म से जोड़कर यह संदेश दिया कि हमें अपने धार्मिक एवं सांस्कृृतिक पहचान के साथ कोई समझौता नहीं करनी चाहिए।