पाकिस्तान में अगले महीने चुनाव होने जा रहे हैं। देश में पंजीकृृत मतदाताओं की संख्या लगभग 12.7 करोड़ है, जिनमें महिलाओं की संख्या सिर्फ  5.85 करोड़ ही है। यहां महिलाओं के पंजीकरण कराने की संभावना कम रहती है। साथ ही पुरुषों की तुलना में कम महिलाएं चुनाव में भाग लेती हैं। यहां तक कि लाहौर और कराची जैसे बड़े शहरों में भी यही हाल है, परंतु अब पाकिस्तान की फिजा बिल्कुल बदल गई है। इस बार महिलाएं ज्यादा संख्या में मतदान करने को उत्सुक दिख रही हैं। यकायक उनके मन में आया है कि वोट करना उनका जनतांत्रिक अधिकार है। अब उन्हें लग रहा है कि सियासत में भ्रष्टाचार सबसे बड़ा मुद्दा है और भ्रष्टाचारियों को सत्ता में आने से रोकने के लिए वोट सबसे बड़ा माध्यम है और इस बार पाक की महिलाएं वोट के माध्यम से यहां की सियासत बदलने के प्रति ज्यादा तत्पर लग रही हैं। उल्लेखनीय है कि विकासशील देशों में साक्षरता और उच्च जीवन स्तर को अक्सर ऐसे कारकों के रूप में देखा जाता है, जो महिलाओं को राजनीतिक जीवन में बड़ी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करते हैं, लेकिन पाकिस्तान में हुए पिछले आम चुनाव में जिन पांच निर्वाचन क्षेत्रों में महिलाओं ने सबसे ज्यादा मतदान किया था, वो सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में हैं और वहां जीवन स्तर काफी नीचे है।

2018 में पाकिस्तान में औसत मतदान 51.7 फीसदी से थोड़ा ज्यादा था, इसमें महिला मतदाताओं की भागीदारी लगभग 46.7 प्रतिशत थी, लेकिन थारपारकर के रेगिस्तानी इलाके के दो निर्वाचन क्षेत्रों में महिला मतदान कहीं ज्यादा प्रभावशाली रहा। यहां एक निर्वाचन क्षेत्र में महिला मतदाताओं की हिस्सेदारी 72 फीसदी से ज्यादा और दूसरे में 71 प्रतिशत के करीब थी। यहां पुरुषों के मतदान की स्थिति पहले निर्वाचन क्षेत्र में 65.4 फीसद और दूसरे में करीब 70.5 फीसद थी। थारपारकर मुस्लिम बहुल देश पाकिस्तान के सिंध प्रांत का सीमावर्ती इलाका है। यहां बड़ी संख्या में हिंदू रहते हैं। पेयजल, बिजली, स्कूल, स्वास्थ्य ढांचा और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के मामले में यह इलाका काफी पिछड़ा हुआ है। एक तरह से इसे अविकसित माना जाता है। हालांकि, यह क्षेत्र कोयले के भंडार से समृद्ध है। आर्थिक परेशानियां महिलाओं को मतदान के लिए प्रेरित करने में भूमिका निभाती हैं। थार के इस सुदूर क्षेत्र की महिलाएं शहरी महिलाओं की तुलना में आर्थिक रूप से मजबूत नहीं हैं। वो हर पांच साल में इस उम्मीद के साथ राजनीतिक व्यवस्था में भाग लेती हैं कि शायद इससे उनके जीवन में भी थोड़ा बदलाव आएगा।

इस क्षेत्र में मतदान विभिन्न समुदायों पर जीत हासिल करने पर ज्यादा आधारित है। इससे राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों के लिए गांव से वोट लेना आसान हो जाता है। दुर्भाग्य है कि कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं जो भोजन, एक या दो थैली आटा या सार्वजनिक नौकरी की गारंटी जैसी बुनियादी जरुरतों के बदले उम्मीदवारों के साथ वोटों का सौदा करती हैं। दरअसल गरीबी लोगों को अपनी बुनियादी जरुरतें पूरी करने के तरीके खोजने के लिए मजबूर करती हैं। महिलाएं एक बार फिर आगामी आम चुनावों का इंतजार कर रही हैं क्योंकि उनके पास अपनी आजीविका में सुधार का कोई दूसरा विकल्प नहीं है। सिंध प्रांत में थारपारकर इलाके के इन दो निर्वाचन क्षेत्रों के अलावा सबसे ज्यादा महिला मतदान प्रतिशत वाले बाकी तीन क्षेत्र पंजाब प्रांत के सुदूर ग्रामीण इलाकों में स्थित है। दूर-दराज के इलाकों की महिलाएं अब राजनीति के प्रति अधिक जागरूक हो गई हैं और उनके पास मोलभाव के लिए और भी बहुत कुछ है।

पाकिस्तान की चुनावी व्यवस्था में ग्रामीण महिलाओं की दिलचस्पी अभूतपूर्व है। राजनीतिक लामबंदी के लिए जो बातें प्रेरित कर रही हैं, उनमें शिक्षा या उच्च सामाजिक स्थिति की बजाए गरीबी और परिवर्तन की इच्छा ज्यादा मजबूत है। मुख्यधारा के पाकिस्तानी राजनीतिक दल भी ग्रामीण महिलाओं से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, इनमें सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम और देश की स्वास्थ्य प्रणाली में सुधार शामिल हैं। हालांकि गरीबी से जूझ रही महिलाओं के जीवन में सुधार के लिए ग्रामीण और अविकसित क्षेत्रों में अभी भी बहुत काम बाकी है। कुल मिलाकर समय के साथ पाकिस्तान की महिलाएं पहले से ज्यादा जागरूक हुई हैं और उनकी जागरुकता इस बार चुनाव में अपना रंग दिखाएगी और जो भी पार्टी सत्ता में आएगी, उसे महिलाओं के मामले को ज्यादा प्राथमिकता देनी होगी, इसमें कोई शक नहीं है।