ईरानी सेना द्वारा पिछले मंगलवार को पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से किये गए हमले तथा जवाब में पाकिस्तानी सेना द्वारा गुरुवार को तड़के की गई जवाबी कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। कूटनीतिक पहल के बावजूद मामला गरमाया हुआ है। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर की ईरान यात्रा के तुरंत बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉप्र्स (आईआरजीसी) ने हमला कर पाकिस्तान के बलूचिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-अल-अदल के दो मुख्यालयों को तबाह कर दिया। मिसाइल और ड्रोन से किये गए हमले में दर्जनों आतंकी ढेर हो गए। मृतकों में दो मासूम बच्चे भी शामिल हैं। इससे पहले ईरान ने सीरिया एवं इराक में भी मिसाइल से आतंकी ठिकानों पर हमला किया था। ईरान का यह हमला कुछ दिन पहले ईरान के करमन शहर में हुए आत्मघाती विस्फोट के बाद किया गया है। उस हमले में ईरान के 80 नागरिक मारे गए थे। आतंकी संगठन आईएस ने इस घटना की जिम्मेवारी ली थी, किंतु ईरान का मानना है कि इस घटना के पीछे जैश-अल-अदल का हाथ है। ईरान एवं पाकिस्तान के तनाव के बीच गुरुवार की सुबह पाकिस्तानी सेना द्वारा 60 किलोमीटर अंदर घुसकर ईरान स्थित आतंकी ठिकाने पर मिसाइल से हमला किया गया, जिसमें सात विदेशी लोगों के मारे जाने की खबर है।

यह घटना ईरान के सिस्तान प्रांत के सरावन शहर में हुई। पाकिस्तान का आरोप है कि उस क्षेत्र में बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट एवं बलोच लिबरेशन आर्मी सक्रिय हंै। ईरान के द्वारा किये गए हमले ने पाकिस्तान की पोल खोलकर रख दी है। भारत लगातार यह आरोप लगा रहा है कि पाकिस्तान आतंकी संगठनों का पनहगार बना हुआ है, लेकिन पाकिस्तान इससे लगातार इनकार करता रहा है। अब तो ईरान ने भी पाकिस्तान पर आतंकियों को शरण एवं समर्थन देने का आरोप लगाकर हमला भी कर दिया है। भारत ने ईरान का समर्थन करते हुए कहा है कि आत्मरक्षा के लिए ईरान द्वारा की गई कार्रवाई उचित है। हालांकि भारत ने इसे दोनों देशों का आंतरिक मामला बता दिया है। अमरीका सहित पश्चिमी देश पाकिस्तान के समर्थन में आए हैं, जबकि चीन दोनों देशों से संयम बरतने की अपील कर तटस्थता बनाए हुए है। पश्चिम एशिया एवं मध्य-पूर्व में ईरान की अपनी अहमियत है। गैस भंडार के क्षेत्र में विश्व में ईरान का दूसरा स्थान है, जबकि कच्चे तेल के उत्पादन के क्षेत्र में चौथा स्थान है। क्षेत्रफल के दृष्टिकोण से पाकिस्तान के मुकाबले ईरान दोगुना बड़ा देश है, जबकि जनसंख्या के दृष्टिकोण से एक-तिहाई है।

भारत अफगानिस्तान एवं ईरान को साथ लेकर पाकिस्तान पर दबाव डालने की कोशिश में है। चीन अपने हितों को ध्यान में रखते हुए तटस्थ नीति अपना रहा है। ईरान को साथ लेकर चीन पश्चिम एशिया में अपना दबदबा बढ़ाना चाहता है, जबकि पाकिस्तान में चीन-पाकिस्तान आर्थिक परियोजना चल रही है। इस परियोजना पर चीन का 60 अरब अमरीकी डॉलर निवेश हो चुका है। पाकिस्तान की आजादी के बाद ईरान-पाकिस्तान के बीच मधुर संबंध रहे थे। पाकिस्तान को मान्यता देने वाला ईरान पहला देश था। 1979 में ईरान में हुए इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान एवं पाकिस्तान के संबंधों में खटास आनी शुरू हो गई थी। अफगानिस्तान में तत्कालीन सोवियत संघ की फौज के हस्तक्षेप के बाद दोनों देशों के बीच और दूरी बढ़ती गई। जहां पाकिस्तान अमरीका के पाले में खिसकता गया वहीं ईरान दूर होता गया। इसका कारण यह है कि ईरान सोवियत संघ की ओर झुकने लगा। ईरान-पाकिस्तान तनाव का असर इजरायल-हमास युद्ध पर भी पड़ सकता है। अमरीका एवं इजरायल जैसे देश यह जानकर खुश होंगे कि ईरान अब हमास और हिज्बुल्लाह जैसे आतंकी संगठनों पर पूरा ध्यान नहीं दे पाएगा। इधर भारत का मानना है कि ईरान द्वारा पाकिस्तान पर आक्रामक रुख अपनाने से भारत को भी पाक पर दबाव डालने का अच्छा मौका मिलेगा। आतंकवाद पर भारत जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहा है। लेकिन चीन और अमरीका जैसे कुछ देश अपनी सुविधा के हिसाब से आतंकवाद की परिभाषा तय करते रहते हैं।