भारतीय संस्कृति के सनातन धर्म में हिन्दू धर्मशास्त्रों के अनुसार प्रत्येक माह के तिथि विशेष पर पर्व-उत्सव मनाने की परम्परा है। प्रख्यात ज्योतिषविद् विमल जैन ने बताया कि अमावस्या तिथि पर स्ïनान-दान-श्राद्ध करके पुण्य प्राप्त किया जाता है। प्रत्येक माह की तिथि की विशेष महिमा है। पौष कृष्णपक्ष की अमावस्या तिथि 'कुहू अमावस्या' के नाम से जानी जाती है। ज्योतिषविद् ने बताया कि पौष कृष्णपक्ष की अमावस्या तिथि बुधवार, 10 जनवरी को रात्रि 8 बजकर 12 मिनट पर लगेगी जो कि अगले दिन गुरुवार, 11 जनवरी को सायं 5 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। स्ïनान-दान-श्राद्धादि की अमावस्या गुरुवार, 11 जनवरी को मनाया जाएगा।
व्रत का विधान—ज्योतिषविद् ने बताया कि अमावस्या तिथि के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर अपने समस्त दैनिक कृत्यों से निवृत्त होकर गंगा-स्नानादि करना चाहिए। गंगा-स्नान यदि सम्भव न हो तो घर पर ही स्वच्छ जल से स्नान कर स्वच्छ वस्ïत्र धारण करना चाहिए। अपने आराध्य देवी-देवता की पूजा-अर्चना के पश्चात् अमावस्या तिथि के व्रत का संकल्प लेना चाहिए। अमावस्या तिथि के दिन पीपल के वृक्ष को जल से ङ्क्षसचन करके धूप-दीप के साथ विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना करनी चाहिए। पीपल वृक्ष में समस्त देवताओं का वास माना गया है। अमावस्या तिथि पर विधि-विधान पूर्वक पितरों की भी पूजा-अर्चना की जाती है। अमावस्या पर पितृदोष एवं कालसर्प दोष का निवारण के लिए भी धाॢमक अनुष्ठïान किये जाते हैं। पितरों के आशीर्वाद के लिए पितृसूक्त का पाठ करना भी लाभदायी माना गया है। जीवन में भौतिक सुख-समृद्धि, खुशहाली बनी रहती है। इस दिन पीपल के वृक्ष व भगवान् शिवजी व श्रीविष्णु जी की पूजा-अर्चना के साथ पीपल वृक्ष की 108 परिक्रमा करने पर आरोग्य व सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है। शिवजी का रुद्राभिषेक भी आज के दिन करवाना लाभकारी माना गया है।
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