भारत के पड़ोसी देश मालदीव में सत्ता परिवर्तन होने के बाद से ही दोनों देशों के रिश्ते में खटास आने लगी है। मालदीव के नए राष्ट्रपति मुहम्मद मुइज्जू के पदभार संभालने के बाद भारत विरोधी बयान आने लगे हैं। मुइज्जू ने मालदीव में तैनात भारतीय सेना को वापस बुलाने की मांग कर दी है। चीन समर्थक मुइज्जू चुनाव से पहले ही लगातार भारत विरोधी बयान दे रहे थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 2 जनवरी को केंद्रशासित प्रदेश लक्षद्वीप की यात्रा की गई थी। उन्होंने लक्षद्वीप की नैसर्गिक सुंदरता तथा पर्यटन की संभावनाओं को लेकर सोशल मीडिया पर कई फोटो जारी किये थे। उन्होंने भारतीय नागरिकों से लक्षद्वीप आने का अनुरोध किया था। प्रधानमंत्री की इस पहल से मानो मालदीव को मिर्ची लग गई। वहां के तीन उप मंत्रियों ने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ विवादित टिप्पणी की जिससे दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। मालदीव के राष्ट्रपति ने बढ़ते तनाव को देखते हुए अपने उन तीनों उप मंत्रियों मरियम शिउना, मलासा शरीफ एवं अब्दुल्ला महजूम माजिद को तत्काल प्रभाव से मंत्रिमंडल से निलंबित कर दिया है। वहां के विदेश मंत्री मुसा जमीर ने भी इस घटना की निंदा की है।

मालदीव के विपक्षी पार्टियों ने भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आलोचना के लिए अपनी सरकार को घेरा है। मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम मुहम्मद सोलिह ने तीन उप मंत्रियों की टिप्पणी को अस्वीकार्य बताया। वहां की विपक्षी पाॢटयां अपने सरकार को घेरने के लिए पूरी तैयारी में हैं। इस घटना के बाद भारत सरकार भी एक्शन में आ गई है। मालदीव में भारतीय उच्चायुक्त ने विदेश मंत्रालय में जाकर अपना विरोध दर्ज करवाया। इधर भारतीय विदेश मंत्रालय ने आज सुबह नई दिल्ली स्थित मालदीव के राजदूत इब्राहिम साहिब को तलब किया तथा फटकार लगाई है। दोनों देशों के बीच चल रही तनातनी के बीच सोशल मीडिया पर बायकॉट मालदीव पोस्ट की बाढ़ आ गई है। फिल्म स्टार, क्रिकेटर तथा अन्य हस्तियां भी मैदान में कूद चुकी हैं। मालूम हो कि पर्यटन से मालदीव को काफी राजस्व मिलता है। पिछले वर्ष मालदीव में कुल 17.57 लाख पर्यटक आये, जिसमें दो लाख से ज्यादा पर्यटक भारत से गए थे। कोरोना काल में भी भारत से 63 हजार पर्यटक मालदीव पहुंचे थे।

भारत से मालदीव को पर्यटन के क्षेत्र में 15 से 20 प्रतिशत की आमदनी होती है, जो वहां की अर्थ-व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। भारत से 750 किलोमीटर दूर मालदीव में कुल 1190 द्वीप हैं जिनमें से केवल 190 द्वीप पर ही रहने लायक स्थिति है। मालदीव की 90 प्रतिशत आय पर्यटन उद्योग एवं आयातित वस्तुओं से पूरी होती है। विभिन्न व्यक्तियों द्वारा बायकॉट मालदीव अभियान चलाये जाने के बाद अभी तक 20 हजार से ज्यादा पर्यटकों ने अपनी यात्रा रद्द कर दी है। देश के विशिष्ट व्यक्तियों ने मालदीव के बजाय लक्षद्वीप एवं अंडमान निकोबार जाने की सलाह दी है। भारत के इस पहल से मालदीव के अर्थ-व्यवस्था को जबर्दस्त धक्का लगेगा। चीन की भक्ति में पागल मालदीव भारत के तमाम एहसानों को भुला रहा है। भारत मालदीव में पर्यटन के विकास पर  कुल खर्च के 45 प्रतिशत निवेश कर रहा है। चावल-दाल एवं जेनेरिक दवाओं पर भी मालदीव को भारत सब्सिडी देता है, लेकिन मालदीव को केवल चीन की ही भक्ति दिखाई दे रही है। वर्ष 2014 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मालदीव यात्रा के बाद ही वहां बदलाव शुरू हुआ था। चीन ने भारी रकम देकर मालदीव के 17 द्वीपों को 50 साल के लीज पर ले लिया है।

मालदीव के नए राष्ट्रपति मुइज्जू ने सत्ता संभालने के बाद सर्वप्रथम भारत विरोधी देश तुर्की की यात्रा की थी। उसके बाद वे दूसरे भारत विरोधी देश चीन की यात्रा पर पहुंच गए हैं। चीन के सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स ने भारत को मालदीव के प्रति बड़ा दिल दिखाने की नसीहत दी है। जो चीन श्रीलंका और पाकिस्तान को कर्जजाल में फंसाकर कंगाल बना दिया उसकी नजर अब मालदीव पर है। मालदीव की जनता को इसके प्रति सावधान होना पड़ेगा। 17 द्वीपों को लीज पर देने को लेकर मालदीव में विरोध भी शुरू हो गया है। मालदीव भारत के लिए सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। ऐसी स्थिति में भारत को मालदीव को सबक सिखाने के साथ-साथ चीन की साजिश पर भी नजर रखनी होगी।