असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने नववर्ष के अवसर पर कहा कि अगर असम में इसी तरह शांति का वातावरण रहा तो यह राज्य आर्थिक दृष्टि से काफी मजबूत हो जाएगा। वर्ष 2026 तक असम अलग रूप में दिखेगा। अपने बयान के समर्थन में उन्होंने कहा कि वर्ष 2023-24 में असम की जीडीपी 5.65 लाख करोड़ है जो 2024-25 में बढ़कर 6.38 लाख करोड़ हो जाएगा। इसी तरह वर्ष 2026 तक असम का जीडीपी 10 लाख करोड़ का आंकड़ा पार करने की उम्मीद है। जीडीपी में इस वर्ष 14.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि राजस्व वसूली की दर में 18 प्रतिशत दर्ज की गई है। सरकार ने पिछले तीन वर्षों के दौरान 58000 करोड़ की विभिन्न परियोजनाओं को पूरा किया है। इस वर्ष दो-तीन बड़ा निवेश लाने की तैयारी है जो 20 हजार से 30 हजार करोड़ का पूंजी निवेश होगा। मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि पिछले वर्ष राज्य में विदेशी पर्यटकों की संख्या में 523 प्रतिशत तथा देशी पर्यटकों की संख्या में 103 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जो राज्य के लिए शुभ संकेत है। 30 वर्षों से असम आतंकवाद के ज्वाला में जल रहा था, किंतु असम अब शांति के पथ पर अग्रसर हो चुका है। असम सहित पूर्वोत्तर में आतंकवाद में 90 प्रतिशत की कमी आई है। हिमंत सरकार के शासन में आतंकी समूहों के साथ कुल 11 समझौते हुए हैं। महिलाओं के खिलाफ अपराधों में भी काफी कमी आई है।

वर्ष 2021 में इसकी संख्या 30 हजार थी जो वर्ष 2023 में घटकर 7453 हो गई है। इसी तरह 2021 में कुल अपराधों की संख्या 1.33 लाख थी, जो घटकर 2023 में 63 हजार रह गई है। पेंडिंग केसों के मामले में भी काफी गिरावट आई है। उम्मीद है कि वर्ष 2026 तक लंबित मामलों की समय-सीमा केवल 90 दिन रह जाएगी। मालूम हो कि 29 दिसंबर को नई दिल्ली में केंद्र सरकार, राज्य सरकार तथा आत्मसमर्पण करने वाले अल्फाइयों के बीच त्रिपक्षीय समझौता हुआ है। सरकार का दावा है कि इस समझौते से असम के मूल निवासियों एवं अल्फा की लंबित मांग पूरी हो जाएगी। लेकिन कुछ लोगों का मानना है कि जब तक परेश बरुवा राज्य की मुख्य धारा में शामिल नहीं होते हैं तब तक यह समझौता अधूरा ही रहेगा। देखना है कि सरकार परेश बरुवा के स्वाधीन असम एवं संप्रभुता की मांग को छोड़ने के लिए उनको कैसे राजी कर पाती है? हालांकि मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोग अल्फा की मांग को एक-एक कर पूरा करते जा रहे हैं। स्वाधीन असम एवं संप्रभुता पर सरकार कोई समझौता नहीं करेगी, क्योंकि यह मांग वास्तविकता से परे है।

मुख्यमंत्री का कहना है कि इस समझौते से असम के लोगों को राजनीतिक एवं भूमि का अधिकार मिल जाएगा। परिसीमन ने भी असम के मूल निवासियों के अधिकारों को सुनिश्चित करने का काम किया है। परिसीमन के कारण ही राज्य के 126 विधानसभा क्षेत्रों में से 104 विधानसभा क्षेत्रों में केवल असम के ऐसे निवासी प्रतिद्वंद्विता कर सकेंगे जो 200 से 300 वर्षों से असम में रह रहे हैं। इसी तरह मिशन वसुंधरा के बारे में उन्होंने कहा कि अब तक जितने लोगों को भूमि का पट्टा दिया गया है उनमें से 80 प्रतिशत पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जनजातियों एवं अनुसूचित जातियों के हैं और राज्य के मूल निवासी हैं। मुख्यमंत्री ने अपने लोखा-जोखा में पूरे वर्ष किये गए कामों का विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अभी तक 112 कैबिनेट मीटिंग की गई है, जिसमें कुल 1513 निर्णय लिये गए। इनमें से 1370 कार्यान्वित हुए हैं। सरकार को इस कामयाबी के साथ-साथ आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों एवं मध्यम वर्ग की समस्याओं पर विशेष ध्यान देना होगा। मध्यम वर्ग वर्तमान सरकार के शासन में संकट के दौर से गुजर रहा है। इसके साथ ही ट्राफिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कारगर कदम उठाए जाने की जरुरत है।