पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव का परिणाम आने के बाद भाजपा ने लोकसभा चुनाव के लिए तैयारी शुरू कर दी है। इसकी झलक राजस्थान, मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों के चयन के दौरान देखने को मिली। भाजपा ने जहां राजस्थान में ब्राह्मण समाज से भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री का दायित्व सौंपा वहीं मध्यप्रदेश में ओबीसी समाज से मोहन यादव तथा छत्तीसगढ़ में आदिवासी समाज से विष्णुदेव साय को कमान सौंपी है। इसी तरह तीनों राज्यों के उपमुख्यमंत्रियों एवं मंत्रियों के चयन के दौरान जातिगत समीकरण का पूरा ध्यान रखा गया है। विपक्षी दलों द्वारा जातिगत सर्वेक्षण का मुद्दा आगामी लोकसभा चुनाव में उछालने के मुद्दे को देखते हुए भाजपा ने पहले से ही इसकी काट के लिए तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी पदाधिकारियों के चयन के दौरान भी इस चीज का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। इन तीनों राज्यों में मंत्रियों को जिलेवार जिम्मेवारी देने की पहल शुरू हो गई है। एक-एक मंत्री को एक-एक जिले का प्रभारी बनाया जाएगा ताकि पार्टी की सांगठनिक स्थिति को मजबूत किया जा सके। बूथ स्तर तक पार्टी को मजबूत बनाने के लिए पहले ही कई कदम उठाए जा चुके हैं।
भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भाजपा का वोट शेयर 10 प्रतिशत बढ़ाने के लिए पार्टी के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को कड़ी मेहनत करने तथा केंद्र सरकार के कामों को जनता तक पहुंचाने का निर्देश दिया है। जहां विपक्षी गठबंधन सीटों के तालमेल के भंवर जाल में फंसी हुई है, वहीं भाजपा पूरी तरह मैदान में उतर चुकी है। राम मंदिर के मुद्दे पर भाजपा पूरी तरह फ्रंट फुट पर खेल रही है। मालूम हो कि 22 जनवरी को अयोध्या में रामलला का प्राण-प्रतिष्ठा समारोह हो रहा है। उसके लिए भव्य तैयारी चल रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले 30 दिसंबर को अयोध्या में निर्मित महर्षि वाल्मीकि हवाई अड्डे तथा अयोध्या धाम जंक्शन का उद्घाटन किया। हवाई अड्डे के उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री ने अयोध्या धाम जंक्शन तक व्यापक रोड शो का आयोजन किया। रास्ते में मोदी की झलक पाने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। प्रधानमंत्री ने 14 जनवरी से ही हर घर में एक दीपक जलाने का अनुरोध किया है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से देश के हर क्षेत्र से श्री राम ज्योति यात्रा निकालने का अनुरोध किया है। अखिल भारतीय सनातन महासभा भी इस क्षेत्र में काम कर रही है।
देश में हो रहे श्री राममय माहौल का भाजपा को अगले लोकसभा चुनाव में निश्चित रूप से फायदा मिलेगा। शुरू से ही भाजपा के एजेंडे में राम मंदिर बनाने का मुद्दा शामिल रहा है। पार्टी ने अब तो मथुरा एवं काशी का मुद्दा भी उठाना शुरू कर दिया है। अगले साल लोकसभा के साथ-साथ आठ राज्यों के विधानसभा चुनाव भी होने वाले हैं। आंध्र प्रदेश, ओडिशा, सिक्किम एवं अरुणाचल प्रदेश का चुनाव 2024 के प्रथम भाग में ही होने वाले हैं, जबकि सितंबर में जम्मू-कश्मीर, अक्तूबर में हरियाणा तथा महाराष्ट्र तथा साल के अंत में झारखंड विधानसभा के चुनाव होंगे। लोकसभा चुनाव की तैयारी का फायदा भाजपा को विधानसभा चुनाव में भी मिलेगा। अयोध्या के मुद्दे को भाजपा देश के हर कोने के लोगों से जोड़ना चाहती है। पाक अधिकृृत कश्मीर की नदियों का जल भी जलाभिषेक के लिए लाया गया है। श्रीलंका एवं बिहार को भी प्राण-प्रतिष्ठा समारोह से जोड़ा जा रहा है। प्राण-प्रतिष्ठा समारोह की बढ़ती लोकप्रियता ने विपक्षी खेमे को बेचैन कर दिया है।
श्री राम मंदिर प्रबंधन की तरफ से प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के लिए सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे सहित कई विपक्षी दलों के नेताओं को आमंत्रित किया गया है। लेकिन विपक्षी दल के अनेक नेता अभी तक यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि उन्हें समारोह में भाग लेना चाहिए या नहीं। कांग्रेस तथा वामपंथी दलों के नेताओं को यह भय है कि अगर वे प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए तो मुस्लिम मतदाता उनसे दूर हो जाएंगे। अगर नहीं गए तो हिंदू वर्ग के मतदाता नाराज हो सकते हैं। भाजपा द्वारा खेले गए हिंदू कार्ड के सामने विपक्ष असमंजस की स्थिति में है। अगले लोकसभा चुनाव में भाजपा विकास के साथ-साथ कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के साथ-साथ श्री राम मंदिर बनवाने का मुद्दा लेकर जनता के दरबार में जाएगी। कुल मिलाकर वर्ष 2024 की लड़ाई काफी दिलचस्प होने वाली है।