अब वर्ष 2023 विदा चुका है, इसके साथ ही नए वर्ष 2024 का आगाज हो चुका है। इस वर्ष लोकसभा चुनाव यानी आम चुनाव-2024 होने वाला है। इसलिए इस वर्ष को चुनावी वर्ष कहा जा रहा है। इस साल होने वाला लोकसभा चुनाव इतना महत्वपूर्ण है कि इसकी तैयारी 2023 में ही हो गई थी। पक्ष और विपक्ष दोनों इस वर्ष होने वाले चुनावी तैयारी में लगे हुए हैं, जिन पर बीते वर्ष की तैयारी का असर दिखना स्वाभाविक है। इस बार चुनाव में कौन जीतेगा और कौन हारेगा? इसकी वास्तविकता मतगणना के बाद ही सामने आएगी, परंतु इसके कयास बहुत पहले से लगाए जा रहे हैं। केंद्र की एनडीए सरकार के अश्वमेघ के घोड़े को रोकने के लिए विपक्ष ने इंडिया गठबंधन बनाया है और गठबंधन के नेताओं का दावा है कि इस बार वे भाजपा को मात देने में कामयाब होंगे, उनके दावों में कितनी मजबूती है, इसका भी पटाक्षेप मतगणना के बाद हो जाएगा।

उल्लेखनीय है कि पिछले साल असम के लिए काफी महत्वपूर्ण रहा। साल के अंत में केंद्र, राज्य सरकार और अल्फा के बीच त्रिपक्षीय समझौते हस्ताक्षरित हुए। इस समझौते के बाद कहा जा रहा है कि इस समझौते से राज्य में शांति स्थापित होगी, परंतु अधिकांश लोगों का मानना है कि अल्फा के परेश बरुवा गुट से समझौते किए बिना अल्फा समस्या का समाधान आसान नहीं है। कारण कि समझौते के बावजूद अल्फा (स्वाधीन) जिंदा रहेगा, जिसका नेतृत्व परेश बरुवा करते हैं। अल्फा (स्वाधीन) गाहे-बगाहे विस्फोट वगैरह करवाकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहता है। पिछले महीने अल्फा ने कई  स्थानों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में कामयाब रहा। दूसरी ओर इसी बीच यह भी खबर आई थी कि इन दिनों अल्फा के नाम पर ऊपरी असम में व्यापक पैमाने पर धन उगाही के कार्य लगातार किए जा रहे हैं, इसकी भी छाया नए वर्ष में दिखने की संभावना है।

दूसरी ओर पिछले साल राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा सालों भर सुर्खीयोंमें बने रहे, उन्होंने देशभर में घूम-घूमकर साबित कर दिया कि वह भाजपा के बड़े वक्ताओं में एक हैं। उन्होंने राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में भाजपा की ओर से जमकर चुनाव प्रचार किया और लोगों ने चुनावी सभाओं में उनके भाषण को खूब पसंद किया। चुनावी सभाओं में उनका असमिया मिश्रित ङ्क्षहदी खूब पसंद की गई और वे जहां-जहां गए, उनमें अधिकांश सीटों पर भाजपा चुनाव जीतने में कामयाब रही। छत्तीसगढ़ में उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ महादेव ऐप का मामला उठाया और यह मामला बघेल की हार का कारण बना। इस दौरान उन्होंने कुछ ऐसी बातें कहीं, जो कथित तौर पर विवादास्पद रहीं, परंतु वह भाजपा के लिए सार्थक सिद्ध हुआ और भाजपा नेतृत्व उनसे गद्गद् दिखा। सीएम असम की राजनीति में भी सुर्खीयों में रहे। उन्होंने कई विकासमूलक कार्यों की आधारशिला रखी तो दूसरी ओर कई विकास योजनाओं के पूरे होने पर उनका उद्घाटन भी किया। खासतौर पर उन्होंने मेडिकल कॉलेजों, ओवर ब्रिजों, पुलों और पार्कों का उद्घाटन कर विकास की नई इबारत लिखी।

उनके कार्यों को देखकर उम्मीद है कि वह विकासशील असम को विकसित असम बनाने के सपने को पूरा करने में कामयाब होंगे। उन्होंने पिछले साल असम की कला व संस्कृति को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने में महती भूमिका निभाई। खासतौर पर बिहू को लेकर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रिकार्ड बनाए गए। दूसरी ओर प्रदेश कांग्रेस की पहल पर एआईयूडीएफ को छोड़कर विपक्षी दलों का एक गठबंधन बना है, जो अगले लोकसभा चुनाव-2024 और विधानसभा चुनाव-2026 में सत्ताधारी भाजपा का मुकाबला करेगा, जो किसी भी पार्टी को हराने के लिए किया जाता है। पिछले वर्ष असम सरकार ने बाल विवाह और बहुविवाह के खिलाफ जमकर अभियान चलाया और एनकाउंटर का सिलसिला भी खूब चला, इसकी वजह से कुछ लोगों ने सरकार की जमकर आलोचना की, परंतु सीएम इसके प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध दिखे। ऐसे में माना जा रहा है कि नए साल-2024 पर भीं 2023 की छाया बरकरार रहेगी।