भारतीय श्रमिक वर्क परमिट लेकर खाड़ी देशों से लेकर अमरीका और यूरोप तक फैले हुए हैं और अपनी मेहनत, लगन और श्रम की बदौलत विदेश में भी भारत का डंका बजवा रहे हैं। वे पासपोर्ट और बीजा लेकर वहां जाते हैं और एक निश्चित अवधि तक वहां रहते हैं और फिर अपनी अच्छी यादों को लेकर स्वदेश वापस आ जाते हैं, परंतु एक बड़ी संख्या उन भारतीय श्रमिकों की भी है, जो अवैध रूप से  खाड़ी से लेकर अमरीका तक जाते हैं। पकड़े जाने पर जेलों में डाल दिए जाते हैं और बाद में उन्हें अपने देश भेज दिया जाता है। इस अवैध कार्य को अंजाम देने में एजेंटों की अहम भूमिका होती है, जो उनसे मोटी रकम लेकर नए सपनों के साथ विदेश भेजते हैं, परंतु जब वे पकड़े जाते हैं तो  उन्हें बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। हाल ही में फ्रांस के एक छोटे से एयरपोर्ट पर रोके गए एक विमान में सवार लगभग 300 भारतीयों की जांच की गई जिसके बाद विमान को वहां से जाने की इजाजत दे दी गई। फ्रांस के न्याय विभाग के अधिकारियों की मानें तो पेरिस के पास एक हवाई अड्डे पर विमान को रोका गया। निकारागुआ जा रहे एयरबस ए340 विमान को पेरिस के पूर्व में 150 किलोमीटर दूर वाट्री एयरपोर्ट पर रोका गया था। यह विमान दुबई से आया था और ईंधन भरने के लिए वाट्री में रुका था, लेकिन अधिकारियों ने एक अनजान व्यक्तिद्वारा दी गई सूचना के बाद इसे रोक लिया क्योंकि उन्हें संदेह था कि यह मानव तस्करी का मामला हो सकता है।

दो दिन तक इस विमान में सवार लोगों से न्याय विभाग द्वारा पूछताछ की गई, उसके बाद रविवार को जारी एक बयान में कहा गया कि विमान को वहां से जाने की इजाजत दे दी गई। विमान में सवार लोग संभवतया संयुक्त अरब अमीरात में काम करने वाले लोग थे जिन्हें निकारागुआ ले जाया जा रहा था और शायद निकारागुआ से इन लोगों को अवैध रूप से अमरीका या कनाडा ले जाया जाना था। इस दौरान पत्रकारों और बाहरी लोगों को उनसे मिलने की इजाजत नहीं दी गई। सबसे कम उम्र का यात्री 21 महीने का बच्चा था जबकि इन यात्रियों में 11 अवयस्क भी थे, जो बिना किसी वयस्क के यात्रा कर रहे थे। शुक्रवार को दो यात्रियों को हिरासत में लिया गया था ताकि इस बात की पुष्टि की जा सके कि उनकी भूमिका विमान में सवार अन्य यात्रियों से अलग तो नहीं थी और वे किन हालात में किस मकसद से यात्रा कर रहे थे। हाल के सालों में भारतीयों के अवैध रूप से अमरीका जाने के मामलों में बहुत ज्यादा वृद्धि हुई है। ऐसे अधिकतर लोग मैक्सिको से होते हुए अमरीका में घुसते हैं। अमरीकी सरकार ने निकारागुआ को उन देशों की सूची में रखा है जहां मानव तस्करी को रोकने के लिए समुचित कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। 2022 में मैक्सिको के रास्ते अमरीका में घुसने वाले भारतीयों की संख्या करीब 3,000 रही थी, जबकि मैक्सिकन इमिग्रेशन एजेंसी के मुताबिक इस साल जनवरी से नवंबर के बीच ही 11,000 से ज्यादा भारतीय इस रास्ते से अमरीका जा चुके हैं।

इस साल 30 नवंबर तक मैक्सिको से अमरीका में अवैध रूप से घुसते 41,770 भारतीय गिरफ्तार किए गए, जबकि पिछले साल यह संख्या 18,308 थी। दूसरी ओर एक अन्य संस्थान की रिपोर्ट को मानें तो अमरीका में अवैध रूप से घुसने वाले करीब 97 हजार भारतीयों को गिरफ्तार किया गया है। ये आंकड़ा एक साल यानी अक्तूबर 2022 से सितंबर 2023 का है। गिरफ्तार किए गए 96,917 भारतीयों में से 30,010 अमरीका-कनाडा बॉर्डर पर पकड़े गए। वहीं, 41,770 भारतीय मैक्सिको बॉर्डर पार करते समय गिरफ्तार हुए। अमरीकी सांसद जेम्स लैंकफोर्ड ने संसद में कहा कि पिछले एक साल में लगभग 45,000 भारतीयों ने अवैध रूप से अमरीका की दक्षिणी सीमा पार की। इन भारतीयों को अपने देश में डर महसूस होता है। सांसद का कहना है कि धार्मिक उत्पीडऩ और नौकरी की कमी की वजह से ये लोग अवैध रूप से विदेश में प्रवेश करते हैं और पकड़े जाने पर कई तरह की समस्याओं का सामना करते हैं। भारतीय अमरीकन ड्रीम के चक्कर में अपनी जान भी जोखिम डाल रहे हैं। पिछले साल 21 जनवरी को अमरीका से 30 मील पहले कनाडा में एक गुजराती परिवार के चार लोगों के शव बर्फ में दबे मिले थे। यह परिवार अवैध तरीके से अमरीका में दाखिल होना चाहता था और बर्फीले तूफान की जद में आ गया। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि विदेश जाकर कमाई करना कोई बुरी बात नहीं है, परंतु अवैध ढंग से जाना कतई ठीक नहीं है। कारण कि वह सदैव जोखिम भरा होता है।