नई दिल्ली : यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (अल्फा) के वार्ता समर्थक गुट ने हिंसा छोड़ने, संगठन को भंग करने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होने पर सहमति व्यक्त करते हुए शुक्रवार को केंद्र और असम सरकार के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए। अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्वशर्मा की उपस्थिति में यहां समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। शाह ने कहा कि यह असम के लोगों के लिए बहुत बड़ा दिन है। उन्होंने कहा कि असम लंबे समय तक अल्फा की हिंसा से त्रस्त रहा और वर्ष 1979 से अब तक 10 हजार लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। उन्होंने कहा कि असम का सबसे पुराना उग्रवादी संगठन अल्फा हिंसा छोड़ने, संगठन को भंग करने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होने पर सहमत हुआ है। उन्होंने कहा कि समझौते के तहत असम को एक बड़ा विकास पैकेज दिया जाएगा।

शाह ने कहा कि समझौते के प्रत्येक खंड को पूरी तरह से लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब असम में हिंसा की घटनाओं में 87 प्रतिशत, मौत के मामलों में 90 प्रतिशत और अपहरण की घटनाओं में 84 प्रतिशत की कमी आई है। असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने शुक्रवार के शांति समझौते को ऐतिहासिक बताया और उम्मीद जताई कि यह असम में स्थायी शांति और प्रगति की शुरुआत करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा ने कहा कि इस समझौते से असम को 1.5 लाख करोड़ रुपए का भारी-भरकम विकासात्मक पैकेज मिलेगा। यह स्वदेशी लोगों के लिए परिसीमन, भूमि अधिकार और एक निर्वाचन क्षेत्र से दूसरे निर्वाचन क्षेत्र में प्रवास पर प्रतिबंध लगाकर असम के लोगों को राजनीतिक सुरक्षा और संवैधानिक सुरक्षा उपाय भी प्रदान करेगा। अल्फा के शीर्ष नेता शशधर चौधरी ने शांति समझौते के लिए प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए उम्मीद जताई कि इससे असम में स्थायी शांति और स्थिरता आएगी।

इस समझौते के साथ लगभग 8,200 उग्रवादी, जिनमें अल्फा के 726 कैडर भी शामिल हैं, मैदान में आ गए हैं और राष्ट्रीय मुख्यधारा में शामिल हो गए हैं। वहीं अधिकारियों ने बताया कि अरविंद राजखोवा के नेतृत्व वाले अल्फा गुट और सरकार के बीच 12 साल तक बिना शर्त हुई वार्ता के बाद इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस शांति समझौते से असम में दशकों पुराने उग्रवाद के खत्म होने की उम्मीद है। परेश बरुआ की अध्यक्षता वाला अल्फा का कट्टरपंथी गुट हालांकि इस समझौते का हिस्सा नहीं है। ऐसा माना जाता है कि बरुआ चीन-म्यामां सीमा के निकट एक स्थान पर रहता है। अल्फा का गठन 1979 में ‘संप्रभु असम’ की मांग को लेकर किया गया था। तब से, यह विध्वंसक गतिविधियों में शामिल रहा है जिसके कारण केंद्र सरकार ने 1990 में इसे प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया था। राजखोवा गुट तीन सितंबर, 2011 को सरकार के साथ शांति वार्ता में उस समय शामिल हुआ था, जब इसके और केंद्र तथा राज्य सरकारों के बीच इसकी गतिविधियों को रोकने को लेकर समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।