राजस्थान, मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में मिली करारी पराजय के बाद कांग्रेस में मंथन शुरू हो गया है। कांग्रेस हाई कमान ने चुनाव परिणाम आने के बाद अपने संगठन में भी फेर-बदल किया है। अशोक गहलोत, भूपेश पटेल एवं सचिन पायलट जैसे नेताओं को नई जिम्मेवारी दी गई है। कांग्रेस लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर अपनी अगली रणनीति पर काम कर रही है। राहुल गांधी द्वारा शुरू किये गए भारत जोड़ो यात्रा के बाद कांग्रेस को कर्नाटक में बड़ी सफलता मिली थी। पिछले रिकॉर्ड को ध्यान में रखकर कांग्रेस लोकसभा चुनाव से पहले पूर्वोत्तर क्षेत्र के मणिपुर से भारत न्याय यात्रा शुरू करने जा रही है। 14 जनवरी को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे इस यात्रा को मणिपुर से रवाना करेंगे जो 14 राज्यों से गुजरते हुए 20 मार्च को मुंबई पहुंचेगी और वहीं इस न्याय यात्रा का समापन होगा। यह यात्रा मणिपुर के अलावा असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल, बिहार, गुजरात से होते हुए महाराष्ट्र पहुंचेगी। यह न्याय यात्रा 62 सौ किलोमीटर की दूरी तय करते हुए देश के 85 जिलों से गुजरेगी। मालूम हो कि पूर्वोत्तर क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ रहा है। लेकिन आज की तारीख में पूर्वोत्तर से कांग्रेस का सफाया हो चुका है। मिजोरम को छोड़कर बाकी राज्यों में भाजपा या उसकी सहयोगी दलों की सरकारें हैं। कांग्रेस का मानना है कि न्याय यात्रा से कांग्रेस की अगुवाई वाले इंडिया गठबंधन की लोकसभा चुनाव में बेहतर स्थिति होगी तथा कांग्रेस को भी इसका लाभ मिलेगा।
राहुल गांधी को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत एवं लोकप्रिय नेता के रूप में उभारने में मदद मिल सकती है। मणिपुर में लंबे समय से जातीय संघर्ष चलता रहा है। ऐसी स्थिति में कांग्रेस यहां गैर-भाजपाई वोटरों को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। असम एवं मेघालय जैसे राज्यों में भी कांग्रेस अपनी पुरानी जमीन हासिल करने की इस यात्रा के माध्यम से कोशिश करेगी। भाजपा को इंडिया गठबंधन से पश्चिम बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र में बड़ी चुनौती मिल सकती है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में भाजपा को 42 में से 18 सीटों पर जीत मिली थी, लेकिन विधानसभा चुनाव के दौरान विपक्षी एकता के बाद भाजपा को बड़ी बढ़त नहीं मिली जिससे वह सत्ता से दूर रह गई। पश्चिम बंगाल से न्याय यात्रा निकालने का उद्देश्य भाजपा के लिए चुनौती प्रस्तुत करना है। इसी तरह 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने बिहार के 40 में से 39 सीटों पर सफलता हासिल की थी। लेकिन बदले समीकरण में नीतीश कुमार ने पाला बदल कर महागठबंधन का दामन थाम लिया है। ऐसी स्थिति में महागठबंधन के साथ-साथ कांग्रेस और वाम दलों के शामिल होने से भाजपा के लिए रास्ता कठिन होगा।
इसी तरह महाराष्ट्र में भी शिवसेना (ठाकरे), कांग्रेस तथा एनसीपी (शरद पवार) के एक मंच पर आने से लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए चुनौती बढ़ेगी। अगर एनसीपी के परंपरागत मतदाता शरद पवार के साथ एकजुट हुए तो भाजपा के लिए चुनौती बढ़ेगी। यही कारण है कि इस यात्रा को महाराष्ट्र में बड़े धूमधाम के साथ समाप्त करने का निर्णय लिया गया है। कांग्रेस भारत न्याय यात्रा के माध्यम से राहुल गांधी को नरेन्द्र मोदी के खिलाफ प्रधानमंत्री के रूप में उभारना चाहती है। तीन राज्यों में करारी हार के बाद इंडिया गठबंधन में कांग्रेस का ग्राफ नीचे खिसका है। यही कारण है कि कांग्रेस प्रधानमंत्री पद के नाम को चुनाव तक टाल देना चाहती है। हालांकि ममता बनर्जी एवं अरविंद केजरीवाल ने राजनीतिक पासा फेंकते हुए इंडिया गठबंधन की तरफ से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नाम का प्रस्ताव किया था। तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी खड़गे का नाम आगे बढ़ाकर राहुल गांधी को किनारे करने का प्रयास किया था, जो सफल नहीं हो सका। खड़गे ने आनन-फानन में बयान जारी कर अपने को इस रेस से अलग कर लिया। अब देखना है कि कांग्रेस की भारत न्याय यात्रा लोकसभा चुनाव में सफलता के ग्राफ को कहां तक आगे ले जाती है।