गुवाहाटी : भारत सरकार साल के आखिरी दिन वार्ता समर्थक अल्फा गुट के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर करेगी। उल्लेखनीय है कि स 31 दिसंबर को हस्ताक्षरित होने वाले समझौते के लिए अल्फा का एक प्रतिनिधिमंडल पहले ही नई दिल्ली के लिए रवाना हो चुका है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की उपस्थिति में बहुप्रतीक्षित समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। समझौते पर हस्ताक्षर के समय केंद्रीय गृह मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी,असम सरकार के मुख्य सचिव तथा गृह विभाग के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहेंगे। समझौते के दौरान वार्ता समर्थक अल्फा के अध्यक्ष अरविंद राजखोवा, महासचिव अनुप चेतिया, वित्त सचिव चित्रबन हजारिका, विदेश सचिव शशधर चौधरी, उप सेना प्रमुख राजू बरुवा, प्रचार सचिव मिथिंगा दैमारी और सांस्कृतिक सचिव प्रणति डेका सहित संगठन की कार्य परिषद की 10 सदस्यीय टीम भी मौजूद रहेगी।
गौरतलब है कि 2011 के बाद से वार्ता समर्थक अल्फा गुट भारत सरकार के साथ बातचीत की मेज पर है। बांग्लादेश द्वारा अल्फा के अध्यक्ष अरविंद राजखोवा सहित केंद्रीय नेतृत्व को भारत को सौंपने के बाद बातचीत शुरू हुई थी। डॉ. हिरेन गोहाईं के नेतृत्व में बुद्धिजीवियों और राष्ट्रीय दलों और संगठनों का एक सर्वसम्मत मंच जातीय अभिवर्तन द्वारा अल्फा का डिमांड चार्टर तैयार किया गया था। दूसरी ओर जानकारों का मानना है कि वार्ताकारी अल्फा के साथ समझौते के बाद असम की स्थिति कितनी बदलेगी, यह तो आने वाला समय ही बताएगा।
कारण कि इन दिनों अल्फा का परेश बरुवा गुट काफी सक्रिय है और पिछले दिनों इस आतंकी संगठन ने कई ग्रेनेड विस्फोट कर अपनी मंशा साफ कर दी। दूसरी ओर संगठन की ओर से नई नियुक्तियां करने भी बात कही जा रही है। ऐसे में जब तक वार्ता में परेश बरुवा गुट शामिल नहीं होता है तब तक किसी भी समझौते का उतना महत्व नहीं माना जा सकता है। इसलिए सीएम डॉ. हिमंत विश्वशर्मा परेश गुट से बार-बार राष्ट्र की मुख्यधारा में आकर वार्ता करने का आग्रह करते हैं ताकि प्रदेश में स्थायी शांति स्थापित की जा सके।