नई दिल्ली : उत्तर बनाम दक्षिण की बहस को और भड़काते हुए डीएमके नेता दयानिधि मारन ने कथित तौर पर कहा कि उत्तर प्रदेश और बिहार से तमिलनाडु आने वाले हिंदी भाषी निर्माण कार्य शौचालयों की सफाई जैसे छोटे-मोटे काम करते हैं। वे सिर्फ हिंदी सीखते हैं। उन्हें अंग्रेजी बोलनी नहीं आती। जो अंग्रेजी सीखते हैं, वे आईटी कंपनियों में अच्छी नौकरी करते हैं। अब दयानिधि मारन के इस बयान पर राजनीति गर्मा गई है। बीजेपी ने इस बयान पर पूरे इंडिया गठबंधन को घेर लिया है और सफाई देने की मांग की है। वहीं तेजस्वी यादव ने भी द्रमुक सांसद के बयान की आलोचना की है। बीजेपी नेता शहजाद पूनावाला ने डीएमके सांसद का यह बयान देते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है। हालांकि, ये वीडियो कब का है, इसकी जानकारी नहीं है। बीजेपी ने कहा कि हिंदुओं और सनातन को गाली देना, लोगों को बांटकर राजनीति करना इंडिया में शामिल पार्टियों के डीएनए में है। वहीं बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने हिंदी पट्टी के लोगों के बारे में सांसद दयानिधि मारन के कथित बयान को लेकर उनकी आलोचना की है।
यादव ने कहा कि उनकी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की तरह, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन के नेतृत्व वाली द्रमुक भी ऐसी पार्टी है जो सामाजिक न्याय में विश्वास करती है और ऐसी पार्टी के नेता के लिए इस तरह की टिप्पणी करना अशोभनीय है। राजद नेता ने कहा कि अगर द्रमुक सांसद ने जातीय अन्याय को उजागर किया होता, अगर उन्होंने बताया होता कि केवल कुछ सामाजिक समूहों के लोग ही ऐसा खतरनाक काम करते हैं, तो इसका कोई मतलब होता। यादव ने कहा कि लेकिन बिहार और उत्तर प्रदेश की पूरी आबादी के बारे में अपमानजनक बातें करना निंदनीय है। हम इसकी निंदा करते हैं। हमारा मानना है कि लोगों को देश के अन्य हिस्सों से आने वालों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए। राजद नेता यादव ने कहा कि हम द्रमुक को एक ऐसी पार्टी के रूप में देखते हैं जो सामाजिक न्याय के हमारे आदर्श में यकीन करती है। इसके नेताओं को ऐसी बातें कहने से बचना चाहिए जो इस आदर्श के विपरीत हों। मारन के तमिल में दिए हालिया भाषण को लेकर विवाद पैदा हो गया है, जिसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री ने अंग्रेजी शिक्षा के महत्व पर जोर दिया था।
ये पहला मामला नहीं है, जब डीएमके के किसी नेता ने हिंदी भाषी राज्यों पर बयान दिया है। हाल ही में संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान सांसद डॉ. सेंथिल कुमार ने हिंदी भाषी राज्यों को गोमूत्र स्टेट्स बताया था। सेंथिल ने विवाद बढऩे के बाद अपने बयान को लेकर माफी मांगी थी। लोकसभा में भाषण देते हुए सेंथिल ने 5 दिसंबर को कहा कि बीजेपी की ताकत केवल हिंदी बेल्ट के उन राज्यों को जीतने में ही है, जिन्हें हम आमतौर पर गोमूत्र राज्य कहते हैं। दक्षिण के राज्यों में भाजपा को घुसने नहीं दिया गया है। सेंथिल कुमार ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत के खिलाफ यह बयान दिया था। गृह मंत्री अमित शाह ने 4 अगस्त को एक बैठक में कहा था कि सभी राज्यों को हिंदी स्वीकार करनी चाहिए। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इस पर आपत्ति जताते हुए 5 अगस्त को एक ट्वीट किया। उन्होंने लिखा- अमित शाह गैर-हिंदी राज्यों पर जबरदस्ती हिंदी थोप रहे हैं। तमिलनाडु इसे स्वीकार नहीं करेगा, हम हिंदी के गुलाम नहीं बनेंगे। कर्नाटक और पश्चिम बंगाल जैसे और स्टेट भी इसका विरोध कर रहे हैं।