यूपी की राजधानी लखनऊ के हरा हरी आचार्य चंद्रभूषण तिवारी पौधों को न सिर्फ अपनी कन्या मानते हैं बल्कि उनका कन्यादान भी करते हैं। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं है बल्कि हकीकत है। लखनऊ के चंद्रभूषण तिवारी ने सरकारी नौकरी छोड़कर 2006 में देश में 11 लाख पौधे लगाने का संकल्प लिया था। अब तक वह 9 लाख से ज्यादा पौधे लगा चुके हैं। लोगों को पौधों के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए उन्होंने अपने पास जो भी पौधा रखा उसको अपनी पुत्री माना और जब लोग उनसे पौधा लेते हैं तो वह उन लोगों को अपना समधी मानकर उनसे रिश्ता जोड़ लेते हैं। चंद्रभूषण तिवारी बताते हैं कि जब वह किसी को पौधा देते हैं या उनके पास कोई पौधा लेने आता है तो उनसे वह यही निवेदन करते हैं कि यह पौधा नहीं मेरी पुत्री है। बहुत लाड प्यार में रही है। गर्मियों में इसे प्यास ज्यादा लगती है। जानवर देखते ही डर जाती है। यह बहुत ही कोमल और नाजुक है। इसे 2 साल पालेंगे तो पीढ़ियों-पीढ़ियों को पालेगी। मेरी बेटी जिंदा रहती है तो फल, फूल और छाया देती है। साथ ही कोई शिकायत भी नहीं करती। यही नहीं, मर जाने के बाद चौखट पल्ला बनकर घर की रखवाली करती है। मेरी बेटी मरघट तक साथ देती है। इसे अपना लीजिए। मुझे अपना समधी बना लीजिए। मैं आपके सुख दुख में सदा ही खड़ा रहूंगा। यही पंक्तियां लोगों को आकर्षित करती हैं। चंद्रभूषण तिवारी बकायदा वैन से चलते हैं। इस दौरान लाउडस्पीकर से अपनी लिखी हुई कथा को सुनाते हैं।

अब तक लाखों कन्यादान कर चुके हैं : चंद्रभूषण तिवारी ने बताया कि वह निशुल्क शिक्षा भी गरीब और मलिन बस्ती के बच्चों को देते हैं। साथ ही उन्हें पर्यावरण संरक्षण की भी जानकारी देते हैं। उन्होंने बताया कि आज पर्यावरण संरक्षण और पौधे लगाने की बेहद आवश्यकता है। यही वजह है कि वे पौधों को पुत्री मानते हैं और उनका कन्यादान करते हैं। जिसे पौधा देते हैं उन्हें अपना समधी बनाते हैं। उसके यहां दोबारा जाकर देखते भी हैं कि वह उनकी पुत्री मतलब पौधे की देखरेख कर रहे हैं या नहीं। अब तक लाखों पौधों का कन्यादान कर लोगों को समधी बना चुके हैं। बंगला बाजार के रहने वाले शिव सिंह ने बताया कि वह अब चंद्रभूषण तिवारी के समधी बन चुके हैं। ऐसे में उनकी पुत्री मतलब पौधे की पूरी देखरेख करेंगे। उस पर दिक्कत नहीं आने देंगे। उनकी पत्नी रेखा सिंह ने कहा कि उनके घर में एक और कन्या आ गई है। वह इसका ध्यान रखेंगी।