लोकसभा में बुधवार को तीन नए आपराधिक कानून विधेयक को पारित कर दिया गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में इन विधेयकों पर हुई चर्चा पर जवाब दिया। अब इन विधेयकों को राज्यसभा में पेश किये जाएंगे। यहां से पारित होने के बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने पर कानून के  शक्ल में आ जाएंगे। कानून बनने के बाद भारतीय दंड संहिता, 1860 (आईपीसी) की जगह भारतीय न्याय (दूसरी) संहिता, 2023 (बीएनएस), दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (सीआरपीसी) की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा (दूसरी) संहिता, 2023 (बीएनएसएस), भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (आईईए) की जगह भारतीय साक्ष्य (दूसरा) अधिनियम 2023 (बीएसए) लागू होंगे। नए विधेयक में पहली बार आतंकवाद की व्याख्या की गई है। जो व्यक्ति भारत की एकता, अखंडता, संप्रभुता, सुरक्षा या आर्थिक सुरक्षा को संकट में डालने या संभावना के आशय से या भारत में या विदेश में जनता अथवा जनता के किसी वर्ग में आतंक फैलाने के आशय से बमों, डायनामाइट, विस्फोटक पदार्थों, न्यूक्लियर का उपयोग करके ऐसा कार्य करता है जिससे किसी व्यक्ति या व्यक्तियों की मृत्यु होती है एवं संपत्ति की हानि होती है उसे आतंकी कृृत माना जाएगा।

करेंसी के निर्माण या उसकी तस्करी या परिचालन को भी आतंकवादी कृृत समझा जाएगा। ऐसी स्थिति में दोषी को मृत्युदंड या आजीवन कारावास का प्रावधान होगा। आजीवन कारावास की सजा पाए दोषी को पैरोल भी नहीं मिलेगी। नए कानून बनने से अब सरकार या शासन की जगह नागरिक पर फोकस होगा। अपराध से जुड़े तमाम दस्तावेजों को डिजिटलाइजेशन करने का प्रावधान होगा। सरकार का कहना है कि नए कानूनों का मकसद दंडित करना नहीं, कानून और अदालतों की चौखट से इंसाफ दिलाना है। गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में बताया कि संविधान से भारतीय नागरिकों को जितने अधिकार मिले हैं, सरकार उनकी रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। अब स्मार्ट फोन और लोकेशन मुहैया कराने वाले डिवाइस में लोकेशनल को सबूत माना जाएगा। निर्दोष नागरिकों को फंसाने की प्रवृत्ति पर नकेल कसने के लिए तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया के दौरान वीडियो रिकॉर्ड करना अनिवार्य बनाया गया है।

अब आपराधिक मामले में पुलिस को 90 दिनों में शिकायत का स्टेटस बताना होगा। अदालतों से 30 दिनों के भीतर फैसले आएंगे। कानूनों में बदलाव से जिला और सत्र अदालतों पर दबाव कम होगा। अदालतों से आरोप तय करने का नोटिस सात दिनों में देना अनिवार्य होगा। अंतर्राज्यीय गिरोह और संगठित अपराधों के खिलाफ और कठोर सजा का प्रावधान किया गया है। नए कानून के तहत राजद्रोह की जगह देशद्रोह को शामिल किया गया है। 18 वर्ष से कम आयु की बच्चियों के साथ बलात्कार एवं मॉब लीचिंग के लिए आजीवन कारावास एवं फांसी का प्रावधान रखा गया है। पहली बार शादी, नौकरी, प्रमोशन एवं झूठे वादे कर यौन संबंध बनाने को अपराध के दायरे में लाया गया है। अब सरकार को कानून बनाने के साथ-साथ इसके बेहतर कार्यान्वयन पर ध्यान देना चाहिए, ताकि उसके उद्देश्य की प्राप्ति हो सके।