राजस्थान, मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ में मिली जीत से उत्साहित भाजपा वर्ष 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए कमर कस चुकी है। चुनाव परिणाम के बाद ऐसा लग रहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सत्ता में दोबारा लौटना लगभग निश्चित है। उपरोक्त तीनों राज्यों में मिली पराजय एवं तेलंगाना में मिली जीत के बाद कांग्रेस ने इंडिया अलायंस पर फोकस करना शुरू कर दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े की पहल पर दिल्ली में अलायंस के 28 घटक दलों की बैठक हुई, जिसमें आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। नेताओं ने लोकसभा चुनाव में अपनायी जाने वाली रणनीति एवं मुद्दों पर चर्चा की। सभी नेताओं ने एकमत से यह स्वीकार किया कि भाजपा को शिकस्त देने के लिए सभी पाॢटयों को मिलकर चुनाव लडऩा होगा। लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि नई दिल्ली बैठक में सीटों के बंटवारे के मुद्दे पर कोई विशेष चर्चा नहीं हुई। एक प्रस्ताव पारित कर जनवरी के दूसरे सप्ताह तक सीटों के बंटवारे को अंतिम रूप देने का निर्णय लिया गया।

अलायंस के घटक दलों में इस बात पर भी सहमति बनी कि सीटों के बंटवारे की जिम्मेवारी राज्य इकाई पर होगी। अगर मामला फंसता है तभी यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर जाएगा। नेताओं में इस बात पर भी सहमति बनी कि 30 जनवरी से अलायंस के नेता कम से कम 8-10 संयुक्त रैली करेंगे ताकि जनता में सकारात्मक संदेश जाए। घटक के कई दलों का मानना है कि कांग्रेस को 270 से 300 तक सीटों पर चुनाव लडऩा चाहिए। बाकी सीटों को सहयोगी दलों के लिए छोड़ देना चाहिए। पांच राज्यों में विपक्ष को मनमाफिक सफलता नहीं मिलने से नेताओं में फिर से अलायंस के प्रति प्रेम बढ़ा है। बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरङ्क्षवद केजरीवाल ने विपक्ष की तरफ से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े का नाम प्रस्तावित कर सबको चौंका दिया। ममता और केजरीवाल ने खडग़े का नाम लेकर राहुल और नीतीश को एक ही झटके में बाहर कर दिया।

हालांकि खडग़े ने कहा कि पहले हमें ज्यादा संख्या में जीत कर आने की जरुरत है, प्रधानमंत्री का चयन तो बाद में भी हो जाएगा। कांग्रेस चाहती है कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार हों। जनता दल(यू) चाहती है कि नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जाए। संयोजक पद के लिए नीतीश का नाम घोषित नहीं होने से बिहार के मुख्यमंत्री नाराज बताये जाते हैं। लालू यादव भी इंडिया अलायंस की चौथी बैठक के परिणाम से खुश नहीं हैं। गठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सीटों के बंटवारे को लेकर है। राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु जैसे राज्यों में कोई विशेष दिक्कत नहीं होनी चाहिए। लेकिन पश्चिम बंगाल, केरल, दिल्ली, पंजाब एवं बिहार जैसे राज्यों में अलायंस को काफी मशक्कत करनी पड़ेगी। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी का रुख नरम पडऩे के बाद ऐसी उम्मीद है कि कांग्रेस के साथ सीटों का तालमेल हो जाएगा। आम आदमी पार्टी के रुख को देखते हुए पंजाब एवं दिल्ली में मुश्किल आ सकती है। बिहार में राष्ट्रीय जनता दल एवं जनता दल(यू) कांग्रेस को ज्यादा सीट देने के मूड में नहीं हैं। इन दोनों दलों का मानना है कि कांग्रेस के जनाधार का ग्राफ बिहार में काफी नीचे है। अगला एक महीना इंडिया एलायंस के लिए अग्निपरीक्षा के समान होगा।