कनाडा के अल्बर्टा प्रांत में साल 1972 में ट्रांसअल्टा कॉरपोरेशन ने नॉर्थ सस्केचेवान नदी पर बिघोर्न बांघ को बनाना शुरू किया, इसके साथ ही वहां की सबसे बड़ी मानव निर्मित झील अब्राहम लेक का निर्माण हुआ। आर्टिफिशियल होने के बावजूद, ये झील यहां की अन्य ग्लेशियर झीलों से मिलती-जुलती है, जो मीथेन गैस से बर्फ के बुलबुले और अद्वितीय फिरोजा रंग के लिए जानी जाती है। ये झील जितनी खूबसूरत है, उतनी ही खतरनाक भी है। इसके पीछे की वजह हैरान कर देने वाली है। अब इस झील की तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर ये वीडियो @preetikasharma नाम की यूजर ने पोस्ट किया है, जिसके कैप्शन में बताया गया है कि, 'अब्राहम झील की खूबसूरती को व्यक्त करना कठिन है। जैसा कि कहा जाता है कि एक तस्वीर हजार शब्दों के बराबर होती है। अल्बर्टा की अब्राहम झील में जमे हुए मीथेन बुलबुले।' आप भी इन तस्वीरों और वीडियो में इसकी सुंदरता का लुत्फ उठा सकते हैं। अब्राहम झील की लंबाई 32 किलोमीटर है, जो 53.7 वर्ग किलोमीटर एरिया में फैली हुई है। यह समुद्र तल से 1,340 मीटर ऊपर है। इसकी प्राकृृतिक सुंदरता देखते ही बनती है। झील में माउंटेन व्हाइटफिश, रेनबो ट्राउट और बुल ट्राउट जैसी अन्य प्रजातियों की मछलियां भी पाई जाती हैं। हालांकि यह झील मानव निर्मित है, लेकिन इसका रंग रॉकी पर्व की अन्य ग्लेशियर झीलों की तरह नीला है, जिससे इस झील को देखने को अलग ही मजा है।
Allthatsinteresting.com की रिपोर्ट के अनुसार, अब्राहम झील खूबसूरत होने के साथ-साथ खतरनाक भी है, क्योंकि झील साल भर मीथेन गैस उत्सर्जित करती है। सर्दियों में जब मीथेन के बुलबुल झील की सतह के नीचे फंस जाते हैं और जम जाते हैं, जिससे सतह के नीचे क्रिस्टल जैसी संरचनाएं बन जाती है, जिन्हें देखने और कैमरे में कैद करने के लिए टूरिस्ट्स इस झील तक पहुंचते हैं।
झील में कैसे बनती है मीथेन? : झील में मीथेन के बुलबुले तब बनते हैं, जब मृत पौधे या जानवर जैसे कार्बनिक पदार्थ झील के तल में डूब जाते हैं। जैसे ही कार्बनिक पदार्थ विघटित होता है, यह मीथेन गैस छोड़ता है, जो ऊपर उठती है। जैसे ही सर्दियां शुरू होती हैं, बुलबुले जम जाते हैं और एक-दूसरे के ऊपर ढेर हो जाते हैं, जिससे नीले-सफेद क्रिस्टल और जमे हुए स्तंभों की अनूठी संरचनाएं बन जाती हैं। एक बार जब बर्फ पिघल जाती है, तो सतह से बुलबुले फूट जाते हैं और मीथेन गैस वायुमंडल में निकल जाती है। जमे हुए मीथेन बुलबुले जितने खूबसूरत दिखते हैं, पर्यावरण वैज्ञानिकों के लिए उतनी ही चिंता का कारण भी हैं, क्योंकि मीथेन एक ग्रीन हाऊस गैस भी है, जो ग्लोबल वॉर्मिंग के लिए जिम्मेदार होती है। इसके अतिरिक्त, मीथेन गैस ज्वलनशल होती है। सही समय पर झील की सतह के ऊपर जलाई गई माचिस आग की लपटों का कारण बन सकती है।