संसद को लोकतंत्र का मंदिर कहा जाता है, परंतु इन दिनों इस मंदिर की पवित्रता को नष्ट करने के वे सारे प्रयास किए जा रहे हैं, जो इसके पहले पक्ष या विपक्ष किसी ने नहीं किया। वर्तमान में इसकी मान-मर्यादा को नष्ट करने में पक्ष-विपक्ष दोनों की भूमिका है, इसमें कोई दो राय नहीं है, परंतु जब संदेह के दायरे में इसके अभिभावक आ जाएं तो परिस्थिति बिल्कुल विपरीत चली जाती है और वहां न्याय की कल्पना करना किसी भी गुनाह से कम नहीं है। फिलहाल लोकसभा के स्पीकर और राज्यसभा के चेयरमेन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, जो भारत के संसदीय लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं है। वैसे भी जिस देश का संविधान संसद के इर्द-गिर्द घूमता है, वहां लोकसभा के स्पीकर और राज्यसभा के सभापति यानी संसदीय लोकतंत्र के अभिभावकों का सवालों के घेरे में रहना कतई शुभ नहीं है। स्पीकर भी किसी न किसी पार्टी से जुड़ा रहता है, परंतु स्पीकर बनने के बाद उसकी भूमिका बदल जाती है और उसके लिए निष्पक्ष आचरण करना जरूरी है, परंतु इन दिनों विपक्ष को सत्ताधारी पार्टी की भूमिका कम और स्पीकर और सभापति की भूमिका ज्यादा परेशान करती है, तब विपक्ष के नेता ऐेसी बातें कह जाते हैं, जो स्पीकर और सभापति की शान के खिलाफ चला जाता है। ऐसे में हमें सर्वप्रथम उन अवयवों की गतिविधियों पर नजर दौड़ानी चाहिए, जो दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश की शान में बट्टा लगा रहे हैं और इसी कड़ी में संसद के मौजूदा शीतकालीन सत्र में 19 दिसंबर को भी विपक्षी सांसदों का निलंबन जारी रहा।

आज सोमवार को लोकसभा से 49 सांसदों को निलंबित किया गया। इस तरह शीतकालीन सत्र में अब तक निलंबित किए जा चुके सांसदों की संख्या 141 हो गई है, इनमें 95 सांसद लोकसभा से और 46 राज्यसभा से हैं। इससे पहले 18 दिसंबर को 78 सांसद निलंबित किए गए थे। इनमें 45 राज्यसभा के सांसद हैं, इनमें से 34 सांसदों को पूरे शीतकालीन सत्र के लिए निलंबित किया गया है। 11 सांसदों को उनके व्यवहार पर विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट आने तक निलंबित किया गया है। निलंबित किए गए बाकी 33 सांसद लोकसभा के हैं। इनमें से 30 सांसदों को पूरे शीतकालीन सत्र के लिए निलंबित किया गया है। तीन को विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट आने तक निलंबित किया गया है। इससे पहले 14 दिसंबर को भी राज्यसभा से एक सांसद और लोकसभा के 13 सांसदों को निलंबित किया गया था। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा के सभापति पर मनमाने तरीके से सांसदों को निलंबित करने का आरोप लगाया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन  खडग़े का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह संसद में आने से बच रहे हैं। मोदी और शाह बाहर लेक्चर दे रहे हैं... उन्होंने सदन की गरिमा का एक तरह से अपमान किया है। डेमोक्रेसी का अपमान करने वाले हमें पाठ पढ़ाते हैं।

ये बड़े दुख की बात है कि सदन के स्पीकर और चेयरमैन दोनों ने सांसदों को प्रोटेक्शन नहीं दिया और उन्हें मनमाने तरीके से सस्पेंड किया गया। जानकार बताते हैं कि देश के इतिहास में पहली बार है कि इतने लोगों को उन्होंने सस्पेंड किया। ये डेमोक्रेसी के लिए अच्छी बात नहीं है। ये डराने की बात हो गई है। इस तरह डराकर डेमोक्रेसी खत्म करना चाहते हैं। जो स्टेटमेंट सदन के बाहर दे रहे हैं, वो स्टेटमेंट सदन के अंदर क्यों नहीं दे रहे। ये तो प्रिविलेज होता है कि जब सदन चलता है तो जो बातें यहां बोलनी हैं, वो अगर आप बाहर बोलते हैं, तो ये आप सदन की मर्यादा को ठेस पहुंचा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि इससे पहले विपक्ष ने सरकार के आगे दो मांगें रखी थी। एक तो यह कि केंद्रीय गृह मंत्री को संसद की सुरक्षा में गंभीर उल्लंघन पर दोनों सदनों में बयान देना चाहिए और दूसरी मांग यह कि इस मामले पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। विपक्ष ने यह भी आशंका जताई कि विपक्ष-रहित संसद में अब मोदी सरकार महत्वपूर्ण लंबित कानूनों को बिना बहस के बहुमत के बाहुबल से पारित करवा सकती है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर भी 19 दिसंबर को निलंबित किए गए 49 सांसदों में शामिल हैं। 

उन्होंने अभूतपूर्व स्तर पर हुए सांसदों के निलंबन पर टिप्पणी की। यह स्पष्ट है कि भाजपा विपक्ष मुक्त लोकसभा चाहती है और वो ऐसा ही कुछ राज्यसभा में भी करेगी। दुर्भाग्तवश अब हमें भारत में संसदीय लोकतंत्र पर शोक समाचार लिखना शुरू कर देना चाहिए। वैसे भी यह विचित्र है कि स्पीकर कहते हैं कि हमें निलंबित किया जा रहा है क्योंकि हमने संसदीय शिष्टाचार का उल्लंघन किया। सरकार से सवाल करना संसदीय शिष्टाचार का उल्लंघन कैसे हो सकता है? इसका उल्लंघन तब नहीं हुआ, जब सदन में गालियां दी गईं, उन सांसद को ना तो निलंबित किया गया ना ही उनके खिलाफ कोई कार्रवाई हुई। 13 दिसंबर को संसद पर हमले की बरसी थी, उस दिन सदन की कार्यवाही के दौरान दो लोग दर्शक दीर्घा से कूदकर सांसदों के बीच आ गए। विरोध-प्रदर्शन करते हुए उन्होंने स्मोक कैन भी खोले, जिसमें से पीले रंग का धुआं निकला, इसे सुरक्षा में बड़ी चूक माना गया। इसी मुद्दे पर विपक्ष सरकार से लगातार सवाल पूछ रहा था और प्रदर्शन कर रहा था।