फिलहाल भारतीय उपमहाद्वीप के तीनों प्रमुख राष्ट्रों भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में चुनावी माहौल है। भारत में संभवतः अगले साल 2024 के अप्रैल-मई महीने में लोकसभा चुनाव कराए जाएंगे और अभी तक जो संभावनाएं सामने आई हैं, उनमें भाजपा और मोदी की स्थिति मजबूत है, वहीं पाकिस्तान में भी चुनाव होने वाले हैं और वहां के अधिकांश मतदाता चाहते हैं कि इमरान खान की पार्टी फिर से सत्ता में आए तो बांग्लादेश में शेख हसीना की जीत एकतरफा दिख रही है। आज हम यहां बांग्लादेश के चुनाव पर अपनी नजरें दौड़ाते हैं जहां सात जनवरी, 2024 को चुनाव होने वाले हैं। वहां पर शेख हसीना की पार्टी अपने विरोधियों से काफी मजबूत दिख रही है। बांग्लादेश से जो रिपोर्ट आ रही हैं, उसके मुताबिक बांग्लादेश की सत्तारूढ़ अवामी लीग पार्टी और प्रधानमंत्री शेख हसीना लगातार चौथी बार सत्ता पर काबिज होने को तैयार हैं, क्योंकि यह चुनाव एकतरफा होता नजर आ रहा है। देश के मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने कहा है कि वह कई अन्य पार्टियों के साथ मिलकर 7 जनवरी को होने वाले चुनावों का बहिष्कार करेगी।
सेंटर-राइट बीएनपी ही सिर्फ ऐसी पार्टी है, जो सत्ता में मौजूद शेख हसीना को वाकई चुनौती दे सकती थी। पार्टी का कहना है कि 28 अक्तूबर को राजधानी ढाका में बीएनपी की एक विशाल रैली निकाली गई थी। इसके बाद पिछले पांच हफ्तों में बड़े स्तर पर कानूनी कार्रवाई करते हुए हजारों कार्यकर्ताओं समेत उसके पूरे नेतृत्व को गिरफ्तार कर लिया गया है, वहीं पुलिस का कहना है कि रैली के बाद हुई हिंसा में एक पुलिस अधिकारी समेत छह लोग मारे गए। दूसरी ओर बीएनपी और अन्य विपक्षी दलों ने कहा कि उनके करीब 20 कार्यकर्ता मारे गए हैं। इस राष्ट्रव्यापी कार्रवाई में गिरफ्तार किए जाने के बाद पुलिस हिरासत में पांच लोगों की मौत हो गई है, वहीं जेल अधिकारियों ने बताया कि कैदियों की मौत ‘प्राकृृतिक कारणों से हुई। अधिकारियों ने बीएनपी के इस दावे को भी खारिज किया कि बंदियों को प्रताड़ित किया गया था। विपक्षी पार्टी के कई कार्यकर्ताओं को आगजनी और तोड़फोड़ के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। हालांकि बीएनपी का दावा है कि ये आरोप पूरी तरह राजनीति से प्रेरित हैं। पार्टी ने कहा कि गिरफ्तारियों के अलावा पार्टी के कम-से-कम नौ सदस्यों को मौत की सजा सुनाई गई है।
पिछले आरोपों के आधार पर 925 नेताओं और कार्यकर्ताओं को हालिया हफ्तों में जेल की सजा सुनाई गई है। बीएनपी का मानना है कि ये मामले मूल रूप से राजनीतिक हित साधने के लिए उछाले गए हैं। एकतरफा कार्रवाई करते हुए पुलिस ने ऐसी घटनाओं के आधार पर फर्जी मामले दर्ज किए, जो कभी हुए ही नहीं। यहां तक कि उन लोगों के खिलाफ भी मामले दर्ज किए गए, जो मर गए हैं या जबरन लापता कर दिए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी तटस्थ गवाह के पुलिस की फर्जी गवाही एकमात्र सबूत के तौर पर पेश की गई। पहले से सोच-समझकर सुनाए गए इन फैसलों से जाहिर होता है कि देश में न्याय, निष्पक्षता और कानून का शासन खत्म हो चुका है। वहीं दूसरी ओर,अवामी सरकार ने विपक्षी दलों पर कानूनी कार्रवाई के आरोपों को खारिज किया है। सत्तारूढ़ अवामी लीग पार्टी के सांसद मोहम्मद ए अराफात के मुताबिक हमारा रुख स्पष्ट है, जो लोग तोड़-फोड़ या आगजनी जैसी घटनाओं में शामिल हैं, जिन्होंने पुलिस पर हमला किया है, उन्हें मारा है, उन लोगों पर कानून के मुताबिक कार्रवाई की जा रही है। हम इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हैं कि विपक्षी दल के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई की गई है। उल्लेखनीय है कि 2009 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से शेख हसीना ने देश को आर्थिक रूप से काफी आगे बढ़ाया है, जो देश को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है, लेकिन लोकतंत्र की स्थिति में गिरावट और हजारों विपक्षी कार्यकर्ताओं की गैर-न्यायिक तरीके से हत्या को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई गई है।