पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : एक-दो नहीं बल्कि तीन ग्रेनेड विस्फोट हुए जिससे ऊपरी असम में हलचल मची हुई है। विद्रोही समूह अल्फा (स्वतंत्र)भले ही असम पुलिस के महानिदेशक जीपी सिंह को अपनी ताकत का आभास कराने के लिए इस ग्रेनेड विस्फोट को अंजाम दिया, लेकिन इससे दिल्ली भी हिल रही है। क्योंकि पिछले कुछ दिनों से मुख्यमंत्री हिमंत विश्वशर्मा और पुलिस महानिदेशक जीपी सिंह यह प्रचार कर रहे हैं कि असम में अल्फा सहित कोई भी उग्रवादी समूह में सक्रिय नहीं हैं। यहां तक कि दिल्ली में नेतृत्व भी अक्सर दावा करता रहा है कि असम में आतंकवाद का सफाया हो गया है। इसी बीच विद्रोही समूह अल्फा के कई सदस्यों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया और मुख्यधारा में लौट आए। इधर केंद्र सरकार ने भी अल्फा के वार्ता समर्थक गुट को शांति समझौते के लिए तैयार किया। हर कोई केंद्र द्वारा समझौते पर हस्ताक्षर करने की तारीख की घोषणा का इंतजार कर रहा था। लेकिन इसी समय परेश बरुवा के आदेश पर अल्फा (स्वतंत्र)ने ग्रेनेड हमलों की एक श्रृंखला शुरू कर दी जिससे सब कुछ बदल गया। दरअसल, अल्फा (स्वतंत्र) ने इस हमले से अपनी ताकत दिखा दी।
अब ऐसी आशंका भी है कि अल्फा (स्वतंत्र) शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने में भी बाधा डाल सकता है। यह आशंका तीन मुख्य कारणों से पैदा हो रहे है। पहला कारण यह है कि अल्फा (स्वतंत्र) की उपेक्षा करने पर असम में शांति स्थापना की कोई आशा नहीं है। दूसरे, राजनीतिक दृष्टि से या पुलिस महानिदेशक जीपी सिंह द्वारा परेश बरुवा को शक्तिहीन साबित करने की कोशिश निरर्थक हो गई है। तीसरा, परेश बरुवा के नेतृत्व वाला अल्फा (स्वतंत्र) गुट प्रस्तावित शांति प्रक्रिया में भी बाधा डाल सकता है। हालांकि, अल्फा (स्वतंत्र) के हमले के बाद परेश बरुवा को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा केंद्र सरकार पर दबाव बना रहे हैं। सीएम ने खुद शुक्रवार को दिल्ली में मीडिया से कहा कि टेलीफोन पर परेश बरुवा से उनकी बातचीत जारी है। इतना ही नहीं, ऊपरी असम में ग्रेनेड धमाकों से जब दिल्ली दहल उठी तब मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और केंद्रीय खुफिया प्रमुख तपन कुमार डेका के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। मुख्यमंत्री ने अपने दिल्ली दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की। इसलिए अब मुख्यमंत्री का दिल्ली दौरा खास मायने रखता है।
हालांकि, परेश बरुवा की गतिविधियों से शांति प्रक्रिया में बाधा आने की आशंका के बीच ही मुख्यमंत्री हिमंत विश्वशर्मा ने घोषणा की है कि नए साल के जनवरी में केंद्र और अनूप चेतिया के नेतृत्व वाले अल्फा के वार्ता समर्थक गुट के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। मुख्यमंत्री की घोषणा स्वाभाविक रूप से अल्फा (स्वतंत्र) के संघर्ष को एक विशेष संदेश देती है। मुख्यमंत्री ने गुरुवार को संवाददाताओं से कहा कि मुझे उम्मीद है कि अगले साल जनवरी तक वार्ता समर्थक अल्फा गुट के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। शांति समझौते का मसौदा लगभग तैयार है, केवल अंतिम रूप देना बाकी है। सीएम ने कहा कि अल्फा के वार्ता समर्थक गुट के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर के बाद परेश बरुवा से भी शांति वार्ता के संदर्भ में बातचीत करेंगे। सीएम ने उन मुद्दों की भी जानकारी दी जिन्हें शांति समझौते में प्राथमिकता दी जाएगी। सीएम ने कहा कि शांति समझौते के प्रस्ताव में असम समझौते के अनुच्छेद 6 को प्राथमिकता दी गई है।
इसके अलावा प्राथमिकता वाले संवैधानिक, आर्थिक अधिकार, राजनीतिक अधिकार, भूमि अधिकार आदि को लेकर शांति समझौते में अल्फा को सरकार से कितना महत्व मिलेगा वह शांति समझौते से पहले पता चल जाएगा। हालांकि, शांति समझौते और परेश बरुवा के बारे में सकारात्मक चर्चा के साथ ही सीएम ने तिनसुकिया, सिबसागर और जोरहाट में अल्फा (स्वतंत्र) द्वारा किए गए ग्रेनेड विस्फोटों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, केवल दो या तीन ग्रेनेड विस्फोट करने से असम स्वतंत्र नहीं हो जाएगा। अपनी मातृभूमि पर बमबारी कौन करता है? उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने परेश बरुवा से कम से कम 9-10 बार बात की है और अगर जरूरत पड़ी तो आगे भी बात करेंगे। लेकिन बात करने से समस्या का समाधान नहीं होता। हमें समस्या के समाधान के लिए आगे बढऩा चाहिए। स्वाभाविक रूप से जनवरी में अल्फा के वार्ता समर्थक गुट के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर की खबर ने असम को शांति की ओर एक कदम बढ़ा दिया है।