पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : राज्य प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने एक नोटिस जारी करके राज्य में 1,281 मदरसों को बंद कर दिया है और उन्हें मध्य अंग्रेजी (एमई) स्कूलों में बदल दिया गया है। ये स्कूल अब अरबी या धार्मिक शिक्षा का पाठ नहीं पढ़ा सकेंगे। एमई मदरसों से एमई स्कूलों में परिवर्तित किए गए 1,281 स्कूलों में ज्यादातर दक्षिण सालमारा-मनकाचर, नगांव, मोरीगांव, धुबड़ी, बरपेटा, करीमगंज, कछार, होजाई, हैलाकांडी, ग्वालपाड़ा और नलबाड़ी जिलों में हैं। इसके अलावा बजाली, बिश्वनाथ, बंगाईगांव, दरंग, गोलाघाट, हैलाकांडी, जोरहाट, कामरूप ग्रामीण, लखीमपुर और सोनितपुर जिलों में भी कुछ मदरसे नाम परिवर्तन के लिए सूचीबद्ध हैं। राज्य की प्राथमिक शिक्षा निदेशक सुरंजना सेनापति द्वारा हस्ताक्षरित एक अधिसूचना में इन स्कूलों के नाम से तुरंत मदरसा शब्द हटा दिया गया है। हालांकि, नाम बदलने पर भी स्कूलों में छात्र और शिक्षक वही रहेंगे।

यहां उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार द्वारा 2021 मदरसा अधिनियम को निरस्त कर दिया था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मदरसों के छात्र गणित, विज्ञान और कंप्यूटर भी पढ़ सकें। मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा ने न सिर्फ राज्य बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी तर्क दे रहे हैं कि सरकार मुस्लिम बच्चों को डॉक्टर और इंजीनियर बनाने के मकसद से ऐसा कर रही है। तदनुसार, मदरसों को उच्च प्राथमिक विद्यालयों में परिवर्तित कर दिया गया है। राज्य सरकार ने यह भी तर्क दिया है कि सार्वजनिक धन के व्यय से कोई धार्मिक शिक्षा प्रदान नहीं की जानी चाहिए। विगत 4 दिसंबर को दिसपुर में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में प्राथमिक शिक्षा विभाग के तहत मदरसों के नाम बदलकर उच्च प्राथमिक या केवल एमई करने का निर्णय लिया गया था। तदनुसार राज्य प्राथमिक शिक्षा विभाग ने कल एक नोटिस जारी कर राज्य में एमई मदरसों के नाम बदल दिए।

यहां उल्लेखनीय है कि राज्य के इन 1,281 मदरसा स्कूलों में अन्य सामान्य विषयों के अलावा अरबी भाषा या धार्मिक विषय भी था। गौरतलब है कि सामान्य उच्च प्राथमिक विद्यालयों में छात्रों को छह विषयों का अध्ययन करना आवश्यक था जबकि मदरसों में उन्हें सात विषयों का अध्ययन करना पड़ता था। अब से संबंधित स्कूल राज्य के अन्य उच्च प्राथमिक स्कूलों की तरह केवल छह विषय ही पढ़ा सकेंगे। इस बीच, बरपेटा के कांग्रेस सांसद अब्दुल खालेक ने मदरसों को बंद करने के सरकार के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह गलत फैसला है। सरकारी मदरसों पर सरकार का नियंत्रण हो सकता है, निजी मदरसों पर नहीं। अगर मदरसा बंद कर दिया जाता है तो सरकार उन लोगों को जमीन लौटा देना चाहिए, जिन्होंने मदरसे के नाम पर जमीन दान की थी। मुख्यमंत्री के लिए, अगर मुसलमान मदरसों में जाकर कुरान पढ़ते हैं तब भी मुश्किल हौ और अगर वे डॉक्टर बन जाते हैं तो भी सरकार के लिए मुश्किल है। इस दौरान लोकसभा से 14 सांसदों के निष्कासन पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सांसद खालेक ने कहा कि किसे निलंबित किया जाना चाहिए था और किसे निलंबित किया गया है।