देवास जिले की शंकरगढ़ पहाड़ी अब अपने आप में खास पहचान बना चुकी है और इसे पहचान दी है तीन दोस्तों की मेहनत और हरियाली के प्रति प्रेम ने। मध्य प्रदेश के छोटे से शहर देवास के तीन दोस्तों ने मिलकर जर्रर पहाड़ को हरा-भरा कर नई जान देने का काम किया है और अब इनके इस सराहनीय कार्य में 700 से ज्यादा लोग शामिल होकर अपना योगदान दे रहे हैं। दरअसल देवास की शंकरगढ़ पहाड़ी पर पहले खनन माफियाओं का कब्जा था और खनन के चलते इसे जर्रर कर दिया गया था। इसके बाद स्थानीय नागरिकों ने खनन माफियाओं से परेशान होकर एनजीटी को आवेदन दिया और साल 2015 के सितंबर माह में एनजीटी ने खनन पर रोक लगा दी, लेकिन तब तक पहाड़ी का लगभग आधा हिस्सा खनन की भेंट चढ़ चुका था।

खनन की भेंट चढ़ पहाड़ी का लगभग आधे हिस्से के बाद साल 2016 में तीनों दोस्तों ने फिर से पहाड़ी को विकसित करने का ठाना और पहली बार में करीब 40 पौधे लगाए। दो साल तक पौधों को सींचने के बाद जब जिला कलेक्टर को इस बात की जानकारी लगी तो तत्कालीन कलेक्टर चंद्रमौली शुक्ला ने वन विभाग का सहारा दिया। कभी खनन माफियाओं की भेंट चढ़ी शंकरगढ़ पहाड़ी अब पर्यटन स्थल बन चुकी है और लोग यहां घूमने-फिरने के लिए आते हैं। तीन दोस्तों की मेहनत की बदौलत अब इस सराहनीय कार्य में 700 से ज्यादा लोग शामिल होकर अपना योगदान दे रहे है और इसे ग्रीन आर्मी के नाम से जाना जाता है।