भारतीय संस्कृति के हिन्दू धर्मशास्त्र में हर माह के तिथि पर्व का अपना विशेष महत्व है। ज्योतिषविद् विमल जैन ने बताया कि मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि सोमवार, 11 दिसंबर को अद्र्धरात्रि के पश्चात 6 बजकर 25 मिनट पर लगेगी जो कि अगले दिन मंगलवार, 12 दिसंबर को अद्र्धरात्रि के पश्चात 5 बजकर 02 मिनट तक रहेगी। मंगलवार, 12 दिसंबर को संपूर्ण दिन अमावस्या तिथि का मान रहेगा। मंगलवार को अमावस्या तिथि पड़ने से इसे भौमवती अमावस्या भी कहते हैं। इस तिथि पर स्नान-दान-व्रत एवं श्राद्ध करने का विशेष महत्व है। ऐसे करें पूजा-अर्चना : ज्योतिषविद् ने बताया कि व्रतकर्ता को प्रात:काल ब्रह्ममुहूर्त में उठकर समस्त दैनिक कृत्यों से निवृत्त हो, स्वच्छ वस्त्र धारण करके अपने आराध्य देवी-देवता की पूजा-अर्चना के पश्चात् अपने दाहिने हाथ में जल, पुष्प, फल, गंध व कुश लेकर भौैमवती अमावस्या का संकल्प लेना चाहिए। अमावस्या तिथि पर पीपल वृक्ष की पूजा-अर्चना से सुख-समृद्धि, खुशहाली मिलती है। अमावस्या तिथि पर विधि-विधान पूर्वक पितरों की भी पूजा-अर्चना की जाती है।
अमावस्या तिथि पर पूजा-अर्चना अपने पारिवारिक, धार्मिक रीति-रिवाज व परंपरा के अनुसार ही करनी चाहिए। पितरों के आशीर्वाद से जीवन में भौतिक सुख-समृद्धि, खुशहाली का आगमन होता है। इस दिन भगवान् विष्णु जी तथा पीपल वृक्ष की पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही पीपल वृक्ष की परिक्रमा करने पर आरोग्य व सौभाग्य की प्राप्ति का सुयोग बनता है। पीपल वृक्ष की विशेष महिमा—विमल जैन ने बताया कि पौराणिक व धाॢमक मान्यता के अनुसार पीपल वृक्ष में समस्त देवताओं का वास माना गया है। पीपल के वृक्ष को जल से सिंचन करके विधि-विधान पूर्वक पूजा के पश्चात् 108 बार परिक्रमा करने पर सौभाग्य में वृद्धि होती है। इस दिन व्रत उपवास रखकर इष्ट-देवी देवता एवं आराध्य देवी देवता की पूजा अर्चना अवश्य करनी चाहिए।
ब्राह्मण को घर पर निमंत्रित करके उन्हें भोजन करवाकर सफेद रंग की वस्तुओं का दान जैसे—चावल, दूध, मिश्री, चीनी, खोवे से बने सफेद मिष्ठान्न, सफेद वस्त्र, चांदी एवं अन्य सफेद रंग की वस्तुएं दक्षिणा के साथ देकर, उनका चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेना चाहिए। किसी कारणवश यदि ब्राह्मïण को भोजन न करवा सकें तो इस स्थिति में उन्हें भोजन सामग्री (सिद्धा) के साथ नकद द्रव्य देकर पुण्यलाभ प्राप्त करना चाहिए। समस्त धार्मिक अनुष्ठान करने पर उत्तम फल की प्राप्ति होती है। पीपल के वृक्ष की पूजा का आज विशेष महत्व है।
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